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संजय असवाल "नूतन"

Abstract Classics Inspirational

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संजय असवाल "नूतन"

Abstract Classics Inspirational

भारत की अमर विरासत..!

भारत की अमर विरासत..!

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भारत भूमि दिव्य तपोभूमि
यह वीरों का अभिमान है,
संस्कृति जिसकी गंगा जैसी
हिमालय इसकी पहचान है।

वेदों की गूंज यहां कण-कण में
ज्ञान जहां का दीपक है,
वसुधैव कुटुम्बकम् का संदेश यहां
रचा बसा हर दिल में है।

रंग अनेक भाषाएं अनगिनत
सबकी एक कहानी है,
कश्मीर से कन्याकुमारी तक
सब मां भारती की निशानी है।

मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारे
हम सब यहां शीश नवाते हैं,
प्रेम, दया और भाईचारे के
गीत सदा हम गाते हैं।

योग,आयुर्वेद और दर्शन
दुनियां को राह दिखाते हैं,
सत्य, अहिंसा के आदर्शों से
हम नए युग को सजाते हैं।

हम इस माटी की संतान हैं
इस गौरव को न भूलेंगे,
संस्कृति की इस अमर ज्योति को
रग-रग में हम घोलेंगे।

जिस मिट्टी में हमने जन्म लिया
उसका मान बढ़ाएंगे,
भारत के गौरवशाली गाथा को
हम दुनियां को बतलाएंगे।

जब तक गंगा बहे यहां
हिमगिरि इसकी शान रहेगा,
भारत की इस अमर विरासत का
युग युग तक सम्मान रहेगा।


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