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संजय असवाल "नूतन"

Abstract Inspirational Others

4.5  

संजय असवाल "नूतन"

Abstract Inspirational Others

दौड़ते रहो 🏃

दौड़ते रहो 🏃

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मत पूछो कि राह कठिन है
मत पूछो है कितनी दूर,
इरादे जिसके हो पर्वत जैसें
कौन करें उसे मजबूर।

तू धावक है योद्धा है
तू अपने भाग्य का है निर्माता,
तेरे पसीने की हर बूँद भी
लिखेगी एक विजय गाथा।

जब मांसपेशियाँ जलने लगें
जब साँसें तेरी उखड़ जाए,
जब कदमों में तेरे कंपन हो
जब हौसला तेरा डगमगाए।

तब याद सदा रखना तू
ना रुकना ना कभी झुकना ,
जब तक लक्ष्य मिले ना तुझे
तब तक है तुझे बस दौड़ते रहना।

तू दर्द से रिश्ता जोड़ ले
तकलीफ़ों को दोस्त बना,
हर आँसू को मोती कर दे
तू, हर हार को अपनी जीत बना।

जो बीच सफ़र में गर लौट गया
उसका किसने नाम लिया?
इतिहास भी उसी को याद रखे
जिसने खुद को जीत लिया।

तूफ़ानों से आँख मिला तू
चट्टानों से भी टकरा जा,
अपने भीतर की ज्वाला से
हर अँधियारा दूर मिटाता जा।

आज अगर शरीर टूटे
तो टूटने दे मत रुकना तू,
हिम्मत यदि डगमगा भी जाए
फिर भी कदम न खींचना तू।

दुनियां उन्हीं पर हँसती है
जो कायर बन लौट जाते हैं,
चरण उन्हीं की चूमती मंजिल
जो अंगद से अडिग हो जाते हैं।

दुनिया तेरी गति ना देखेगी
तेरी ज़िद ही जानेगी,
तेरे संघर्ष का हर एक पन्ना
एक नई कहानी गाएगी।

दौड़ कि तेरे कदमों की गूँज
आसमां को भी छू जाए,
दौड़ कि तेरे हौसलों से
बादल भी शर्माए।

दौड़ कि तेरे सपनों का सूरज
जग को रोशन कर जाए,
दौड़ कि तेरे अरमानों का तिरंगा
एक दिन जग में लहराए।

और जब फिनिश लाइन..!

तेरे कदमों को चूमे
तब विजय तेरे गले का हार बने,
जब दुनियां तेरे गीत गाएगी
संघर्ष जीत का आधार बने।


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