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Dr. Tulika Das

Classics Inspirational

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Dr. Tulika Das

Classics Inspirational

कल ख्वाब में मैं जिंदगीसे मिली

कल ख्वाब में मैं जिंदगीसे मिली

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कल ख्वाब में मैं जिंदगी से मिली

देख मुझे वो यूं मुस्कुरायी हौले से

कि वह हंसी सांसों में घुली।


बादलों के पार यह दुनिया थी कैसी

मेरी दुनिया का सच सजा था जहां

ख्वाबों के धुंध में हकीकत खड़ी थी

पर नजर मेरी धुंधली नहीं थी ।


खुशियों की कलियां बिखरी पड़ी थी

पर कोई कली खिली नहीं थी।

जी चाहा कुछ तोड़ लूं ,

गुथकर कलियों की माला ,

खुशियों का हार पहन चलूं

पर कोई धागा ना मिला ,

कोई सूई ना मिला,

आंचल में भी कोई तार बचा न था

जो कुछ बांध ही लाती ।


देख अपनी बेबसी

एक लहर दर्द की उठी दिल में

साथ आंसुओं की बूंदे लिए

बह निकली वो आंखों से

एक बूंद आंसू की

गिरी एक कली पर

और वो कली खिल उठी ।

एक सिहरन सी हुई बदन में

ये क्या देख लिया मैंने

देख मेरी ये हालत

फिर मुस्कुराई जिंदगी

कहा उसने

"खुशियों की कीमत चुकानी पड़ती है

तभी तो वो आती है"

एक पल वो चुप रही

फिर पास मेरे वो आई

थाम लिया हाथ मेरा

और बोल उठी-

"मेरे पास कोई ख्वाब नहीं है

तुम मुझे कोई ख्वाब ना दोगी।"


सवाल ये उसका मुझे मथने लगा

दिल में जैसे कुछ चुभने लगा

हाथ जिंदगी से छुड़ा लिया मैंने

तभी किसी ने पुकारा मुझे।

मुड़कर जो देखा मैंने

हकीकत खड़ी थी

साथ उसके ख्वाब आई थी ।


मैंने जिंदगी की ओर देखा ,

उसने मेरी ओर देखा,

फिर मुस्कुरायी वो

अब वो हंसी मेरे होठों पर भी खिली।


आंखों में ख्वाब बसाए

जिंदगी की बाहें थामें

हकीकत को साथ लिए

मैं लौट आई

ख्वाबों की दुनिया से

एक ख्वाब मैं ले आई

अपनी जिंदगी के लिए

एक मकसद मैं ले आई।


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