STORYMIRROR

Amitosh Sharma

Romance

4  

Amitosh Sharma

Romance

सच्ची मोहब्बत

सच्ची मोहब्बत

1 min
350

ना जाने इश्क़ की किन

गलियों से मैं गुज़रता हूँ,


अक्सर पास् होने पर झगड़ता हूँ,

वहीं दूरियों में हर पल मरता हूँ,


पर उसे खोने से बहुत डरता हूँ,

क्यूंकि आज भी मैं उससे

बेइंतहा मोहब्बत करता हूँ।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance