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Neetu Lahoty

Romance

3.7  

Neetu Lahoty

Romance

चाहती हूँ मैं

चाहती हूँ मैं

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चाहत को इबादत में बदलना चाहती हूँ मैं,

तुझे तेरी इजाज़त के बगैर अपना बनाना चाहती हूँ मैं !

ताउम्र शिकायत न हो तुझसे दूरी की कभी,

अपने दिल की धड़कनों में, बसाना चाहती हूँ मैं..

कभी महसूस न हो,

मुझे कमी तेरी,

अपने ही अक्स में,

तेरा वजूद देखना चाहती हूँ मैं......


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