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Amita Kuchya

Abstract Classics Fantasy

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Amita Kuchya

Abstract Classics Fantasy

वो पेड़ पर झूला झूलना ••••

वो पेड़ पर झूला झूलना ••••

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सावन का महीना आते ही मायके की याद किसे नहीं आती है, ऐसा कोई नहीं है जिसे याद न आए खास कर बारिश की रिमझिम हो, और मुंह पर पड़ती बारिश की बूंदें हो वो मन को सुकून भरा एहसास देती थी। कैसे हम सखियां झूला बारिश में भी झूलते थे।आज रेवती को अपनी पुरानी यादें याद आ रही थी। कैसे उसकी मां चाय पकौड़े की दुकान लगाती थी। उसकी दुकान में बारिश के मौसम में खासकर इसी की बिक्री बढ़ जाती है।

रेवती बहुत ही गरीब घर की लड़की है, उसे गांव में झूला झूलना बहुत भाता था। वहां मंदिर के पास पेड़ में झूला पड़ जाया करता था। वह हमेशा बारिश के मौसम में झूला झूलने अपनी सहेली रीना के साथ दोपहर को जाया करती।

वह ज्यादा पढ़ी- लिखी नहीं थी।उसकी उम्र भी शादी के लायक थी। गांव में शहर जैसा माहौल नहीं था। वहां सब बहू बेटियां अच्छे से झूला झूलती। वहां किसी को कोई परेशानी नहीं थी।

एक दिन की बात है मौसम सुहावना हो रहा था।

उसने सोचा! आज सुबह -सुबह मजे से झूला झूलुंगी, क्योंकि अभी इस समय खाली भी होगा। मां उसकी दुकान चली गई। उसके बाबा भी साथ में चले गए। उसने रीना को बोला -रीना चल मंदिर चल रही हैं क्या••••

वहां हम तुम मजे से झूला झूलेगें। तब रीना ने मना कर दिया। मैं अभी नहीं जा पाऊंगी। मुझे खाना बनाना है।

 फिर उसने सोचा मैं मंदिर तो चली ही जाती हूं। यदि कोई मिल गया तो झूला भी झूल‌ लूंगी। उसने मंदिर में दर्शन किए और झूले के पास चली गई। स्वयं ही झूलने लगी।

 वहां पहले से ही एक राजेश नाम का लड़का था। उसने कहा-' क्या आपको झूला झूला दूं?

तब रेवती ने सकुचाकर मना कर दिया। फिर वो एक टक प्यार भरी नजरों से देखने लगा। फिर दो दिन बाद रेवती ने उसी लड़के को रीना के घर के बाहर देखा तो पूछा कि कौन है?बाद में उसे पता चला कि उसका ममेरा भाई है, रीना ने रेवती को बताया- मंदिर में तेरा भाई मुझे ही देखे जा रहा था।

तब जाकर उसकी सहेली रीना ने बताया कि वो मेरे यहां काम से आया है।वो मेरी मां से तुम्हारे बारे में बात कर रहा था।वो तुम्हें पसंद करने लगा है।अब जब रेवती को पता चला कि राजेश मुझे पसंद करता है। अंदर ही अंदर सोचने लगी, ऐसे कैसे मुझे कोई पसंद करेगा! सब ऐसे ही है। मैं कहां इतनी सुन्दर हूं।

जब भी कहीं जाती तो उसकी नजरें राजेश से टकरा ही जाती है।वह कुछ न कहती।

तीन चार दिन तक मंदिर के झूले के पास रेवती नहीं गई। उसने सोचा बेकार में लोग बात बनाएंगे।

अब रेवती ने अपनी सहेली रीना से पूछा -तुम्हारा भाई चला गया।तब उसने भी हां कह दिया। यहां राजेश का बुरा हाल था।उसे रेवती इतनी भा गई कि उसका चेहरा आंखों से हटता नहीं था।एक दिन उसने अपने मां बाप से बात की। मुझे बुआ के गांव की एक लड़की रेवती पसंद है, मैं उससे शादी करना चाहता हूं। तब क्या था। फिर उसकी मां ने राजेश की शादी रेवती से करा दी।इस तरह आज रेवती राजेश जैसा पति पाकर बहुत खुश हैं कि उसे सच्चा प्यार करने वाला पति मिला।

जब भी बारिश आती तो उसे मायके में पड़े झूलों की याद आ जाती, कैसे मैं सबको गर्मागर्म भजिए मंगौड़े ले जाकर खिलाती थी।सब सखियां झूला झूलते हुए भजिए मंगौड़े का आनंद लेती थी। मुझे तभी पहली बार राजेश ने देखा। और मैं उनकी पसंद बन गई।

फिर अचानक से राजेश की आवाज सुनाई दी बोला- अरे रेवती कहां खोई हो! क्या हुआ••

उसने जैसे ही पीछे देखा कि राजेश ने उसे बांहों भर कर कहा चलो बारिश का मजा ले। दोनों छत में भीगने लगे। और उसका मन भी गदगद हो गया।

दोस्तों -बारिश का मजा भी अपना ही है साथ में प्यार करने वाला पति हो तो बात ही क्या।

दोस्तों -आप कैसे बारिश का मजा लेते हैं ? मायके की यादों में खो जाते हैं ? या भजिया मंगौड़े का आनंद उठाते है, अपने अनुभव शेयर करें।


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