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Sanjay Arjoo

Abstract Classics Inspirational

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Sanjay Arjoo

Abstract Classics Inspirational

ट्री गार्ड

ट्री गार्ड

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"ट्री गार्ड"

कार चलाते हुए मोहन का मूड एक दम बहुत खराब हो गया । पास बैठी पत्नी राधिका, ओर पीछली सीट पर बैठे बेटे  प्रफुल्ल से झगड़ा बढ़ता ही जा रहा था, प्रफुल एक नए व्यवसाय को शुरू करना चाहता था तो वहीं  मोहन का कहना था  कि पहले मुझे पूरी  तरह समझना है कि प्रफुल्ल क्या व्यवसाय शुरू करने जा रहा है मोहन अपने अनुभवों से प्रफुल्ल के व्यवसाय को ठीक तरह से विश्लेषण कर लेना चाहता था।
प्रफुल्ल चिढ़ने की हद तक जा चुका था, प्रफुल्ल का कहना था वो अब बच्चा नहीं रहा है, और पहले से ही बिज़नस कर भी रहा है।
अभी वो बेटे के लिए कुछ बडबडा  रहा था, अपना  ध्यान हटाने की लिए  इधर उधर देखने लगा की तभी उसे सामने एक पेड़ दिखाई दिया, जिसके तने में लोहे का "ट्री गार्ड"  समय के साथ बुरी तरह धंसा गया था। वह बोल उठा,इस पेड़ की रक्षा के लिए लगाया हुआ ये ट्री गार्ड अब  निकल जाना चाहिए, देखो अब ये सुरक्षा के बजाय उसका विकास रोक रहा है।
मोहन ने ये शब्द कहे हीं थे कि राधिका बोल  उठी
"आपने सही कहा एक समय के बाद ट्री गार्ड को  हटा देना चाहिए या फिर  सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए थोड़ी दूरी बनाकर  रखनी चाहिए ताकि  पौधे का विकास न रुके"
मोहन ने  राधिका की आंखों में देखा।
मोहन को अपनी गलती का अहसास हुआ है ये उसके चेहरे से साफ दिखाई पड़ रहा था।

संजय आरजू "बड़ौतवी"



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