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Kanchan Shukla

Horror

4  

Kanchan Shukla

Horror

ठाकुर हवेली में दफ़न राज़

ठाकुर हवेली में दफ़न राज़

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   शुक्ला अंकल मैंने सुना है कि, उदय रायगढ़ में एक पंच सितारा होटल बनाने जा रहा है और आपने वहां ज़मीन भी ख़रीद ली है इसके बारे में उदय ने मुझसे कोई चर्चा नहीं की जबकि हम दोनों का सभी काम पार्टनरशिप में होता है"  

 " रोशन वह होटल मैं बनवा रहा हूं उदय सिर्फ उसको अपनी रेखदेख में बनवा रहा है और मुझे कोई भी काम पार्टनरशिप में करने की आदत नहीं है शायद यह बात उदय ने तुम्हें बताई हो इसलिए तुम्हारे साथ पार्टनरशिप में काम करने का सवाल ही नहीं उठता" शहर के जाने माने बिजनेस टायकून मिस्टर देव शुक्ला ने गम्भीर लहज़े में रोशन को बताया।

 " सारी अंकल मुझे यह बात पता नहीं थी क्या मैं भी उदय के साथ काम कर सकता हूं मुझे भी आपसे बहुत कुछ सीखने को मिलेगा " रोशन ने मुस्कुराते हुए पूछा

 " जरूर बेटा मैं तुम्हें काम करने की तनख्वाह भी दूंगा यह तुम दोनों का जेबखर्च होगा " मिस्टर देव ने मुस्कुराते हुए कहा

 " मुझे मंजूर है अंकल!! मैं कल से काम शुरू कर सकता हूं क्या "? रोशन ने उत्साहित होकर पूछा

 "कल से क्यों आज से ही, तुम आज ही रायगढ़ के लिए निकल जाओ मैंने वहां जो हवेली होटल बनवाने के लिए ख़रीदा है उसके एक हिस्से को मैं अपना रेजिडेंट बनवाना चाहता हूं तुम बहुत अच्छे आर्किटेक्ट हो मैं चाहता हूं की तुम अपनी रेखदेख में उस हिस्से को बनवाओ लेकिन उस हवेली को वहां के लोग भूतही हवेली कहते हैं उदय और मैं इन बातों पर विश्वास नहीं करते इसलिए हमने उस हवेली को खरीदा है अगर तुम्हें भूत प्रेत से डर लगता हो तो वहां जाने की जरूरत नहीं है अगर कुछ उल्टा सीधा हो गया तो तुम्हारे मम्मी पापा हमें दोषी ठहराएंगे " देव शुक्ला ने मुस्कुराते हुए कहा

  देव शुक्ला की बात सुनकर रोशन का चेहरा पहले डर से सफ़ेद पड़ गया लेकिन फिर खुशी से चमक उठा उसने मुस्कुराते हुए कहा" अंकल मैं भूत प्रेत में विश्वास करता हूं पर मैं भी ऐसी जगह काम करना चाहूंगा जहां एक अलग ही चुनौती का सामना करना पड़े" इतना कहकर रोशन अपने घर चला गया क्योंकि थोड़ी देर बाद ही उसे रायगढ़ के लिए निकलना था।

 लगभग पांच घंटे के सफ़र के बाद रोशन रायगढ़ की सीमा में प्रवेश कर रहा था वहां का प्राकृतिक सौन्दर्य देखते ही बनता था शाम घिर आई थी आसमान पर काले बादल छाए हुए थे जैसे बारिश होने वाली हो ठंडी हवा के झोंके शरीर को छू कर मन को गुदगुदा रहे थे रोशन गुनगुनाते हुए कार चला रहा था सड़क के दोनों किनारों पर देवदार और चिनार के वृक्ष लगे थे बीच बीच में जंगली फूलों की क्यारियां भी दिखाई दे रहीं थीं सड़क पर ज्यादा लोग नहीं थे कुछ लोग और एक दो गाड़ियां ही आ जा रही थीं ऐसा प्राकृतिक आलौकिक सौन्दर्य रोशन ने पहले कभी नहीं देखा था यह भी कह सकते हैं की कभी उसे ऐसे खुबसूरत जगह जाने का मौका ही नहीं मिला या वह अपने काम की व्यस्तता के कारण किसी पहाड़ी इलाके में गया ही नहीं रोशन गुनगुनाते हुए गाड़ी चला रहा था तभी अचानक उसकी गाड़ी के सामने एक लड़की आ गई रोशन ने तेजी से ब्रेक लगाया तेज़ झटके से गाड़ी रूक गई लेकिन रोशन आगे स्टेरिंग से टकरा गया । फिर गुस्से से कार से बाहर आया और उस लड़की के पास जाकर चिल्लाकर बोला " आपको आत्महत्या करने के लिए मेरी ही गाड़ी मिली है" रोशन की आवाज सुनकर उस लड़की ने सिर उठाकर रोशन की ओर देखा उसे देखकर रोशन की चीख निकल गई उस लड़की का चेहरा आग से जला हुआ था उसकी लाल लाल आंखें बाहर को निकली हुई थीं होंठ लटककर ठोढ़ी को छू रहा था उसके बड़े बड़े दांत होंठ से बाहर निकले हुए थे उसके खुले बाल हवा में लहरा रहे थे उसका चेहरा इतना भयावह था की रोशन की चीख निकल गई और उसका चेहरा डर के मारे पीला पड़ गया रोशन अपने स्थान पर जड़ वत सा खड़ा रहा

 " आप मुझे देखकर चीखें क्यों शहरी बाबू क्या आपको मेरे चेहरे में चुड़ैल का चेहरा दिखाई दिया है एक तो आपने मुझे अपनी गाड़ी से टक्कर मार दी और ऊपर से ख़ुद ही चिल्ला रहें हैं " एक मधुर आवाज़ सुनकर रोशन को होश आया तब उसने देखा की एक बहुत ही खूबसूरत लड़की उसके सामने कमर पर हाथ रखकर खड़ी हुई है उसके चेहरे पर गुस्सा दिखाई दे रहा था वह इतनी सुन्दर थी की स्वर्ग की अप्सरा भी उसके सामने आकर शरमा जाए रोशन उस सुन्दर लड़की को देखकर भौंचक्का रह गया उसने अपनी आंखों को मला फिर उस लड़की को देखा तो भी वही सुन्दर लड़की उसके सामने खड़ी हुई थी रोशन सोचने लगा तो क्या जो कुछ देर पहले मैंने देखा वह मेरा भ्रम था या मैंने कोई सपना देखा था नहीं नहीं मैंने जो देखा वह झूठ नहीं था मैंने एक जली हुई चुड़ैल को देखा था।

 " क्या सोच रहो हो शहरी बाबू"? उस लड़की ने चिढ़कर पूछा

 " तुम कौन हो और जिसे मैंने देखा था वह कौन थी"? रोशन ने डरते हुए पूछा

 " शहरी बाबू मुझे लगता है की आपका दिमाग ख़राब हो गया है मैं एक लड़की हूं और यहां तो मुझे कोई और दिखाई नहीं दिया आपने यहां किसी और को भी देखा था क्या पर आप तो मेरे सामने गाड़ी से नीचे आए हैं और टक्कर तो आपने मुझे मारी है क्या किसी और लड़की को भी टक्कर मार कर आए हो आप शहर वालों को जब पहाड़ी इलाके में गाड़ी चलाना नहीं आता तो किसी ड्राईवर को साथ क्यों नहीं लाते "? उस लड़की ने गुस्से में घूरते हुए पूछा।

 जबतक रोशन संभल गया उसने अपने सर को झटकते हुए उस लड़की को गुस्से में देखते हुए कहा "मैडम गलती मेरी नहीं थी आप मेरी गाड़ी के सामने आईं थीं मुझे लगता है की आप आत्महत्या करना चाहतीं हैं पर इसके लिए आपने मेरी गाड़ी को क्यों चुना आप किसी पहाड़ी से भी कूद सकतीं थीं"

 " ऐ शहरी बाबू मैं शहर की मैडम नहीं मेरा नाम तारा ठाकुर है और मैं क्यों आत्महत्या करूं गलती आपकी है आपने जानबूझकर मुझे टक्कर मारी है गिरने से मेरे पैर में मोच आ गई है अब आप ही मुझे मेरे घर तक छोड़ने चलो वरना•••" तारा ठाकुर ने बात अधूरी छोड़ दी वह लाल लाल आंखों से रोशन को घूरने लगी रोशन तारा को देखकर घबरा गया उसने आगे कुछ नहीं कहा,

 रोशन उस लड़की से उलझना नहीं चाहता था क्योंकि उसके दिल दिमाग में वही भयानक जली हुई चुड़ैल बसी हुई थी और अब तारा की आंखें भी उसे डरा रहीं थीं उसने गाड़ी का दरवाज़ा खोलते हुए कहा " बैठो तुम्हें कहां जाना है मुझे बताओ मैं तुम्हें छोड़ दूंगा"

 तारा गाड़ी में बैठ गई और उसने गाड़ी का दरवाज़ा बंद किया उसका गाड़ी के दरवाजे को बन्द करते देखकर रोशन समझ गया की यह लड़की पहले भी गाड़ी में बैठी है रोशन ने स्टेरिंग संभाली और गाड़ी आगे बढ़ गई गाड़ी चलाते हुए रोशन ने पूछा " आपको कहां जाना है"?

 " मुझे जहां जाना है वहां आप मुझे लेकर नहीं जा सकते क्योंकि अगर आप वहां गए तो आप जिंदा नहीं बचोगे मेरे भाई आपको मार डालेंगे आप मुझे रास्ते में ही उतार दीजिएगा मैं अपनी हवेली में चली जाऊंगी" तारा ने सर्द आवाज में कहा

 " आपके भाई गुंडे हैं क्या"? रोशन ने व्यंग्यात्मक मुस्कुराहट के साथ पूछा

 " नहीं!! लेकिन जब उन्हें पता चलेगा की आपके कारण मुझे चोट लगी है तो वह आपको नहीं बख्शेंगे मेरे भाई मुझे बहुत प्यार करतें हैं जब उन्हें यह पता चलेगा की आपने मुझे अपनी गाड़ी से टक्कर मारी है इस कारण मेरे पांव में मोच आईं है तो वह अपना क्रोध आप पर निकालेंगे और आप भी जबाव देंगे फिर दोनों में बहसबाज़ी होगी और अगर उन्हें यह पता चला की आप किसी अमीर खानदान से ताल्लुक रखते हैं और शहर से यहां घूमने आए हैं तो वह बिना मारे आपको छोड़ेगे नहीं"

तारा ने हाथ नचाकर अकड़ते हुए जबाव दिया ।

 " तुम्हारे भाईयों को शहर के अमीरों से इतनी नफ़रत क्यों है"? रोशन ने व्यंग्यात्मक लहजे में पूछा

 " शहर के अमीर लोग धोखेबाज होते हैं" तारा ने चिढ़कर कहा

 " क्या किसी अमीर आदमी ने आपको धोखा दिया है"? रोशन ने बिना तारा की ओर देखे मुस्कुराते हुए पूछा

 तारा की ओर से कोई जवाब नहीं आया तब रोशन ने अपनी बगल में बैठी तारा की ओर देखते हुए पूछा "आप•••ने •••ज•••बा••व उसके शब्द मुंह में ही रह गए क्योंकि बगल की सीट पर कोई नहीं था यह देखकर रोशन का चेहरा डरकर पीला पड़ गया तभी भयानक अट्टहास सुनाई दिया उसने देखा वह जली हुई चुड़ैल उसके कार के आगे खड़ी भयानक अट्टहास कर रही थी उसका भयानक चेहरा देखकर रोशन की सिट्टी पिट्टी गुम हो गई तभी रोशन ने देखा की वह चुड़ैल कार के दरवाज़े की ओर बढ़ रही है और उसने अपने बड़े बड़े नाखूनों से शीशे पर वार करना चाह रही है यह देखकर रोशन ने बिना कुछ सोचे कार की स्पीड बढा दी और बिना पीछे मुड़े आगे बढ़ गया उसने अपनी दादी से सुनी था कि, अगर कभी कोई चुड़ैल या भूत मिल जाए तो भागते हुए पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहिए उसका पूरा शरीर कांप रहा था वह किसी तरह होटल पहुंचा जहां उदय रूका हुआ था रोशन ने होटल पार्किंग में कार खड़ी की और होटल के अन्दर चला गया वह अपने होशोहवास में नहीं था रोशन सीधे उदय के कमरे में पहुंचा कमरे में पहुंचकर वह सोफे पर बैठकर हांफने लगा जैसे मीलों दौड़कर आया हो रोशन को देखकर उदय ने आश्चर्य से पूछा " क्या हुआ रोशन तुम इतने डरे हुए क्यों हो"?

 रोशन के मुंह से कोई आवाज़ नहीं निकली रोशन की हालत देखकर उदय ने उसे पानी दिया और फिर बहुत प्यार से पूछा " अब बताओ क्या हुआ है"?

 " उदय मेरी कार में एक चुड़ैल बैठी थी मैं उससे पीछा छुड़ाकर यहां आया हूं" रोशन ने डरते हुए कहा

 रोशन की बात सुनकर उदय ने जोरदार ठहाका लगाया उदय को इस तरह हंसता देखकर रोशन ने कहा " मैं सच कह रहा हूं उदय रास्ते में मुझे एक चुड़ैल मिली थी"

 " तू कैसी बातें कर रहा है यहां पहाड़ी इलाकों में लोगों को सुंदर लड़कियां मिलती हैं और यहां चुड़ैल तेरी कार में बैठी थी"? इतना कहकर उदय हंसने लगा मुझे लगता है कि तू जासूसी किताबें पढ़ पढ़कर पागल हो गया है तू भूत प्रेतों में विश्वास रखता है पर चुड़ैल को लिफ्ट देता है यह मैं नहीं जानता था "? उदय ने रोशन को चिढ़ाते हुए कहा

 " उदय मैं मज़ाक नहीं कर रहा हूं मैंने कोई सपना नहीं देखा था मैं पूरे होश में था मेरा विश्वास करो मेरी कार में चुड़ैल बैठी थी " रोशन ने कहा उसका चेहरा अभी भी डर से सफ़ेद पड़ा था उदय आश्चर्य से रोशन को देख रहा था रोशन ने पूरी घटना उदय को बताई रोशन की बात सुनकर उदय भी सोच में पड़ गया लेकिन उसे रोशन की बात पर विश्वास नहीं हुआ उसने कहा तुम्हें कोई भ्रम हुआ होगा तुमने टीबी पर कोई डरावना सीरियल देखा होगा और वही सब तुमने जागती आंखों से देख लिया अगर चुड़ैल तुम्हारी कार में बैठी होती तो क्या वह तुम्हें इतनी आसानी से बिना नुकसान पहुंचाएं छोड़ देती तुम भूत प्रेत में विश्वास करते हो इसलिए ऐसा कह रहे हो मैं ऐसी बातों पर विश्वास नहीं करता तुम्हें पता है, हो सकता है की किसी पहाड़ी लड़की ने चुड़ैल का मुखौटा लगाकर तुम्हें डराया हो मैंने सुना है की पहाड़ी इलाकों की लड़कियां सीधी और शरारती दोनों ही होती हैं"? उदय ने हंसते हुए रोशन को समझाया रोशन को भी लगा हो सकता है की वह कोई डरावना सपना ही रहा हो या किसी लड़की ने मज़ाक किया हो।

 उसके बाद वह दोनों काम की बातें करने लगे और खाना खाने के बाद सो गए सुबह नाश्ता करने के बाद रोशन और उदय ठाकुर हवेली पहुंचे जहां होटल और रेजिडेंस का काम शुरू होने वाला था उदय की कार जब ठाकुर हवेली पहुंची तो वहां काम करने वाले कुछ लोग दौड़कर उदय के पास आए और उनको अभिवादन किया।

 उसमें से एक बुढ़ा आदमी थोड़ी दूरी पर चुपचाप खड़ा हुआ था उदय और रोशन को घूरते हुए देख रहा था उसकी शक्ल भी कुछ अजीब सी थी रोशन की नज़र उस व्यक्ति पर पड़ी रोशन को कुछ अजीब लगा वह उस आदमी के पास जाकर खड़ा हो गया " बाबा आप यहां क्यों खड़े हुए हैं"?

 " मेरी मर्ज़ी मैं आप लोगों के साथ काम नहीं करूंगा और मेरी मानिए तो आप लोग भी यहां से चले जाइए वरना आप लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ सकता है यह ठाकुरों की हवेली है उन्हीं की रहेगी मैं तुम्हें चेतावनी दे रहा हूं यहां से चले जाओ जब तक हम बदला नहीं ले लेंगे यह हवेली हमारी ही रहेगी " उस आदमी ने गुस्से में दांत पीसते हुए कहा रोशन ने देखा उसकी आंखें लाल लाल हो रहीं थीं चेहरा विकृत हो गया था उस आदमी को देखकर रोशन घबरा गया वह कुछ और कहता तभी उदय की आवाज सुनाई दी " रोशन तू यहां अकेला खड़ा किससे बातें कर रहा है"?

 रोशन ने चौंककर पीछे देखा और कहा"मैं यहां इन बाबा जी से बात कर रहा हूं"

 " वहां तो कोई नहीं है" उदय ने रोशन को आश्चर्य से देखते हुए पूछा

  रोशन ने पलटकर देखा तो वाकई वहां कोई नहीं था रोशन के चेहरे पर दहशत दिखाई देने लगी क्योंकि उसने अभी अभी एक बुढ़े व्यक्ति से बात की थी जो उसे यहां से जाने की धमकी दे रहा था।

 " उदय मुझे लगता है कि, इस हवेली में भूत प्रेत का वास है इसे तोड़ने से पहले किसी तांत्रिक से कुछ उपाय करवा लो नहीं तो कहीं ऐसा न हो की हम किसी मुसीबत में न फंस जाएं " रोशन ने डरी हुई आवाज में कहा

 " रोशन तुम पढे लिखे होकर जाहिलो जैसी बात क्यों कर रहे हो आज के युग में भूत प्रेत को कोई नहीं मानता यह सब मन का भ्रम है अब चलो हवेली का मुआइना करना है जिससे हमें पता चल सके की किस हिस्से को तोड़ना है और किसे उसी तरह रखना है " उदय ने रोशन को घूरते हुए कहा

  रोशन का मन अन्दर हवेली में जाने का नहीं था वह यहां आकर पछता रहा था पर अब उसे उदय के साथ जाना ही पड़ा वह मन ही मन हनुमान चालीसा का पाठ करता जा रहा था। रोशन को अहसास हो रहा था की कोई उसके साथ साथ चल रहा है लेकिन दिखाई कोई नहीं दे रहा था उन दोनों के अन्दर हवेली के विशाल हाल में प्रवेश करते ही हवेली का मुख्य द्वार जोरदार आवाज के साथ अपने आप बंद हो गया यह देखकर उदय और रोशन दोनों चौंक गए रोशन का शरीर डर से कांपने लगा उसके माथे पर पसीना आ गया लेकिन उदय अभी भी सामान्य था।

 जहां उदय और रोशन खड़े थे वह हवेली का मुख्य कक्ष था छतों पर बड़े बड़े फानूस लटक रहे थे दीवारों पर बेस कीमती तस्वीरें टंगी हुई थी जानवरों के सिर भी दीवारों पर लटके हुए थे।उदय और रोशन के अलावा वहां और कोई नहीं था तभी उदय ने देखा की दीवार की तलवार अपने आप हवा में उड़ने लगी छत पर लगे फानूस तेज़ी से घूमने लगे और वहां औरत आदमियों की दर्दनाक चीखें सुनाई देने लगी वह चीखें इतनी भयानक थी की की उदय और रोशन के रोंगटे खड़े हो गए तभी सात जले हुए भयानक चेहरे हवा में उड़ने लगे वह चीख भी रहे थे और जोरदार अट्टहास भी करते जा रहे थे।

 तभी उन भयानक चेहरों में से एक ने कहा "यह दोनों शहरी रईस हैं हमारी हवेली खरीदने आए हैं इन्हें मारकर हम अपने दिल में लगी प्रतिशोध की आग को ठंडा करेंगे"

 " इन्हें मारकर क्या होगा यह असली अपराधी तो है नहीं" एक औरत की आवाज सुनाई दी

 " तो क्या हुआ यह भी तो शहरी बाबू हैं " एक दूसरी औरत की अट्टहास करती आवाज सुनाई दी फिर उसने उदय और रोशन को हवा में उछाल दिया वह दोनों उड़ते हुए छत पर चिपक गए तभी उन्हें लगा की किसी ने उनका गला पकड़ रखा है गले पर दबाव इतना ज्यादा था कि दोनों की जबान बाहर आने लगी उदय और रोशन को लगा की अब उनके प्राण जाने ही वाले हैं।

 दोनों के मुंह से गूं•• गूं••• गूं••• की आवाजें निकलने लगी उन्हें लगा अब उनके प्राण गए लेकिन तभी उनके गले पर से दबाव हटने लगा और वह दोनों सीधे फर्श पर आ गिरे उनके मुंह से चीख निकल गई इतनी ऊंचाई से गिरने के बाद भी उनके हाथ पैर सलामत थे।वह दोनों कुछ सोच पाते उनके चारों ओर वह सातों जले चेहरे आकर खड़े हो गए और भयानक अट्टहास करने लगे।

 उन सातों का चेहरा इतना डरावना था की दोनों की रूह कांप गई तभी रोशन ने डरते हुए उदय से कहा " मैंने तुमसे कहा था की यहां हवेली में भूतों का डेरा है मुझे रास्ते में एक चुड़ैल मिली थी पर तुमने मेरी बात नहीं मानी अब हमें अपनी जान से हाथ धोना पड़ेगा"

 " वह चुड़ैल मैं थी तुमने ठीक सोचा है कि,अब तुम दोनों इस हवेली से बाहर नहीं जा सकते हम तुम्हें भी जिंदा जलाकर मार देंगे जैसे हम लोगों ने खुद को जिंदा जलाया था " इतना कहकर उस चुड़ैल ने अट्टहास किया और फिर फूट फूटकर रो पड़ी उसके काले लम्बे बाल उसके चेहरे पर फ़ैल गए उसका चेहरा और भी भयानक लगने लगा ।

 " तुम लोगों ने खुद को जलाया था और हमने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है जो तुम लोग हमें जलाना चाहते हो"? उदय ने डरते हुए पूछा वह दोनों वहां से भागने की फिराक में थे पर वह एक क़दम भी नहीं बढ़ा सके जैसे उनके पैरों में जैसे किसी ने पत्थर बांध दिए हो यह देखकर दोनों के चेहरों पर दहशत फ़ैल गई।

 " तुम जैसे शहरी लोगों के कारण हमने अपनी इज्ज़त बचाने के लिए खुद को ही इसी हवेली में जिंदा जला दिया यह राज़ हम सातों के अलावा कोई दूसरा नहीं जानता सबको यही लगता है की शार्ट सर्किट से आग लगी और हमारा पूरा परिवार जलकर राख हो गया" उसमें एक व्यक्ति ने गम्भीर लहज़े में बताया

 " यह घटना कब की है" रोशन ने डरते हुए पूछा

 " आज से 40 पहले की " एक लड़की की आवाज आई

 " तब तो हम दोनों पैदा भी नहीं हुए थे तो हम गुनेहगार कैसे हैं "? उदय ने थोड़ी हिम्मत करके पूछा

  तभी एक जोरदार थप्पड़ उदय के गाल पर पड़ा और उस आदमी ने गुर्राहट के साथ कहा "खामोश लड़के तुम शहरी लोग यहां आते हो और हमारी भोली भाली लड़कियों को अपने प्रेम के जाल में फंसाकर फिर धोखा देकर भाग जाते हो"

 थप्पड़ लगने से उदय के मुंह से खून निकलने लगा फिर भी उसने हिम्मत करके कहा " हमने यह हवेली ठाकुर जगमोहन से खरीदा है और हम यहां होटल बनाना चाहते हैं हम यहां घूमने और किसी लड़की को प्यार में धोखा देने नहीं आए हैं अंकलजी "

  " तुम लोग यहां से चले जाओ यह हमारी हवेली है जगमोहन का इस पर कोई अधिकार नहीं है हम जबतक उस प्रदीप से बदला नहीं ले लेते यह हवेली छोड़कर नहीं जाएंगे" उनमें से उनके मुखिया ने कठोर शब्दों में कहा और जोरदार अट्टहास किया उसके अट्टहास करने से छत के फानूस तेज़ी से घूमने लगे तलवारें एक दूसरे से टकराने लगी दीवारों पर लगे जानवर जिंदा होकर गुर्राहट के साथ भयानक आवाज निकालने लगे उन सातों के भयानक अट्टहास उनके चेहरे से निकलता ख़ून उनको और भी डरावना बना रहा था उदय और रोशन का चेहरा डर से सफ़ेद पड़ रहा था वह दोनों विवश थे अब तो कोई चमत्कार ही उन्हें बचा सकता था।

  तभी उन में से एक ने कहा " अब तुम दोनों यहां से जिंदा नहीं जा सकते हम तुम्हें मारकर अपना बदला पूरा करेंगे"

 तभी कुछ सोचते हुए रोशन ने पूछा " प्रदीप ने क्या किया था जिसकी सज़ा 40 साल बाद हम दो निर्दोषों को मिल रही है"?

 " प्रदीप लखनऊ का रहने वाला था वह यहां पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों के जीवन पर रिसर्च करने आया था वह मेरे बेटे राघव का दोस्त था इसलिए हमारी हवेली में ही ठहरा हुआ था और मेरी भोली भाली बेटी तारा को उसने अपने प्रेम जाल में फंसा लिया और प्रेम का झांसा देकर वह तारा के शरीर से खेलता रहा जब प्रदीप को पता चला की तारा मां बनने वाली है तो यह कहकर चला गया की वह जल्दी ही अपने माता पिता के साथ बारात लेकर आएगा पर देखते ही देखते 6 महीने बीत गए पर प्रदीप नहीं आया तब अपने खानदान की इज्ज़त बचाने के लिए इसी हवेली में हमने अपनी अग्नि समाधी बना ली 40 वर्षों से हमारी आत्मा इस हवेली में प्रदीप का इंतज़ार कर रही है हमें विश्वास था की वह एक न एक दिन जरूर आएगा पर वह आज तक नहीं आया हमने सुना है की तुम दोनों भी लखनऊ के हो अब हम तुम्हारे शरीर में प्रवेश करके तुम्हारे साथ लखनऊ चलेंगे और वहां प्रदीप को ढूंढकर उससे अपनी बहन का बदला लेंगे " यह बात प्रदीप के दोस्त राघव ने बताया।

 राघव की बात सुनकर रोशन की आंखें आश्चर्य से चौड़ी हो गई फिर उसके चेहरे पर एक दर्द भरी मुस्कराहट फ़ैल गई और उसने दर्द भरी आवाज़ में कहा,

" राघव अंकल प्रदीप अंकल यहां कभी नहीं आएंगे क्योंकि वह आज से 40 साल पहले ही इस दुनिया को छोड़कर चले गए हैं"

 " तुम कहना क्या चाहते हो तुम प्रदीप को कैसे जानते हो"? उन भूतों के मुखिया ने कठोर शब्दों में पूछा

 "आपकी कहानी सुनकर मुझे अपनी दादी की सुनाई कहानी याद आ गई दादी ने मुझे बताया था कि,मेरे प्रदीप अंकल किसी पहाड़ी इलाके में रिसर्च के लिए गए थे और वहां उनको किसी लड़की से प्रेम हो गया वह उनके बच्चे की मां बनने वाली थी अंकल ने घर जाकर दादाजी से शादी की इजाजत मांगी पर दादाजी ने अंकल की शादी अपने दोस्त की लड़की से बचपन में ही पक्की कर दी थी दादाजी ने प्रदीप अंकल से कहा की वह अगर उस लड़की से शादी करेंगे तो उन्हें हमेशा के लिए घर छोड़ना पड़ेगा प्रदीप अंकल ने कहा की वह घर छोड़कर जा रहें हैं जब यह बात दादाजी के दोस्त को पता चली तो उन्होंने कहा की प्रदीप अंकल को उनकी बेटी से शादी करनी पड़ेगी नहीं तो वह उन्हें गोली मार देंगे अंकल ने कहा की वह जिससे प्यार करते हैं उसी से शादी करेंगे यह सुनकर दादाजी के दोस्त ने गुस्से में प्रदीप अंकल पर गोली चला दी और वही प्रदीप अंकल की मौत हो गई इसलिए अंकल कभी यहां लौटकर नहीं आए क्योंकि उन्होंने तो पहले ही अपने प्रेम की खातिर अपने प्राणों की आहुति दे दी थी मेरी दादी ने बेटे की लाश देखकर अपने प्राण त्याग दिए दादाजी भी कुछ दिनों बाद परलोक सिधार गए उसके बाद वर्षों हमारा परिवार उस दुःख से उबर नहीं पाया पर कहते हैं कि,समय सब घाव भर देता है तो हमारा परिवार भी जीने लगा पर आज भी मेरे पिताजी अपने भाई की याद में आसूं बहाते हैं अगर आप लोगों को मेरी जान लेकर संतोष मिल जाए तो आप मेरी जान ले लीजिए पर मेरे दोस्त उदय को यहां से जाने दीजिए " रोशन ने दर्द भरी आवाज़ में हाथ जोड़कर कहा

 रोशन की बात सुनकर तारा ठाकुर फूट फूटकर रोने लगी और रोते हुए उसने अपने पिता से कहा " पिताजी मैं आपसे कहती थी की मेरा प्रदीप मुझे धोखा नहीं दे सकता पर आपने मेरी बात नहीं मानी आप मेरे बच्चे के हत्यारे हैं मैं आपको कभी माफ़ नहीं करूंगी" इतना कहकर उसने अपने पिता पर छलांग लगा दी और अपने बड़े बड़े नाखूनों से उनके चेहरे का मांस नोचने लगी वह व्यक्ति दर्द से चिल्ला उठा फिर कुछ सोचकर तारा ने उसे छोड़ दिया और वह रोशन के सामने आकर खड़ी हो गई और कठोर शब्दों में बोली " आप लोग इन दोनों बच्चों को जाने दो इनकी कोई ग़लती नही है अगर आप लोगों ने इन्हें कोई नुक़सान पहुंचाने की कोशिश की तो मैं यहां तांडव मचा दूंगी"

 " नहीं मेरी बच्ची हम इन बच्चों को कोई नुक़सान नहीं पहुंचाएंगे आज हम सभी प्रतिशोध की आग से बाहर निकल आए हैं अब रोशन ही हमारी आत्मा को यहां से मुक्त करेगा क्योंकि यह प्रदीप का भतीजा है इस नाते यह तुम्हारा बेटा हुआ और हमारा नाती यह जब हमारा तर्पण करेगा तो हम इस प्रेत योनि से मुक्त हो जाएंगे " तारा के पिताजी ने गम्भीर लहज़े में कहा।

 रोशन ने कहा की आप लोग हमें यहां से जाने दीजिए हम पंडित को साथ लेकर आएंगे और आप लोगों की आत्मा की मुक्ति के लिए हवन करेंगे।

 उन सातों प्रेतात्माओं ने रोशन और उदय को मुक्त कर दिया दूसरे दिन रोशन पंडित जी के साथ हवेली में आया और पंडित जी हवन करवाने लगे हवन की आहुतियां जैसे जैसे अग्नि में पड़ रहीं थीं वह सातों आत्माएं तड़प उठी और वहां चारों तरफ तांडव होने लगा उसका भयानक अट्टहास और दर्दनाक चीखें सुनाई दे रही थीं यह सिलसिला लगभग दो घंटे चलता रहा पंडित जी ने बताया यह लोग इस हवेली को छोड़कर जाना नहीं चाह रहे हैं पर अगर यह यहां रहे तो लोगों को परेशान करेंगे यह बात इन आत्माओं को पता है इसलिए न चाहते हुए भी यह हमारा साथ दे रहें हैं आखिर में पंडित जी के मंत्रों से उन सातों की शक्ति क्षीण होने लगी और फिर एक जोरदार अट्टहास करते हुए वह सभी प्रेतात्माएं आकाश में विलीन हो गई उनके वहां से जाते ही हवन कुंड में एक जोरदार धमाका हुआ और लोहे का हवन कुंड चूर्ण बनाकर बिखर गया आज ठाकुर की हवेली प्रेत आत्माओं से मुक्त हो गई थी और उस हवेली के राज़ से पर्दा भी उठ गया।



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