टेंडर डॉक्यूमेंट
टेंडर डॉक्यूमेंट
आजकल ऑफिस में ज्यादातर कमिटियों की चेयर पर्सन अमूमन वह ही होती है...इतने सर्विस और एक्सपीरियंस के बाद चीजों की समझ आ गयी है। सीनियर पोस्ट में होने के बाद ऑफिस में डिसीजन लेना भी एक बड़ा काम है....
आज यूँहीं एक मीटिंग ख़त्म होने के बाद उसे एक पुरानी मीटिंग की याद आयी...वह टेक्निकल इक्विपमेंट की ख़रीद के लिए बनायी गयी कमिटी थी जिसकी वह मेंबर थी....टेक्नोलॉजी में चेंज के कारण उस समय ऑफीस में टेक्निकल इक्विपमेंट की पर्चेस होने वाली थी।
उसके लिए वह सब नया था। तीन-चार राउंड की मीटिंग्स के बाद ड्रॉफ्ट टेंडर बन गया। सब कमिटी मेंबर्स की मेहनत उसमे लगी थी। बस अब अप्रूवल की देरी थी और फिर टेंडर पब्लिश.....इस स्टेज का काम फिनिश।
लर्निंग के लिए फाइनल स्पेसिफिकेशन्स की कॉपी उसने एक कमिटी मेंबर मिस्टर वर्मा से माँग ली। बाद में देता हुँ कहते हुए वह खड़े हो गए।
अगले दिन मिस्टर वर्मा उसकी केबिन में पेपर्स लेकर आये। उसने वर्मा जी को बैठने के लिए कहा। मिस्टर वर्मा और वह दोनो सेम पोस्ट पर काम करते थे...लेकिन वे उससे काफ़ी सीनियर थे। मिस्टर वर्मा ने उसे पेपर्स दिए। उसने कहा, "स्पेसिफिकेशन्स?" "येस..येस..सीट पर काम है..आय हॅव टू गो..मैं निकलूँगा..आपकी चाय ड्यू रही.." हँसते हुए वह निकल गए...
उन कागजों को वह पढ़ने लगी, लेकिन जैसे जैसे वह आगे पढ़ने लगी उसके माथे पर शिकन बढ़ने लगी। वह एक पुराना टेंडर डॉक्यूमेंट था जो ऑलरेडी वेबसाइट पर मौजूद था।
फिर यह क्या है? इस तरह पुराने टेंडर देने का मतलब? वह समझ नहीं पा रही थी। उसे लगा कि मिस्टर वर्मा ने शायद ग़लती से उसे यह पुराने टेंडर की प्रिंट आउट निकाल कर दी है। उसने उन्हें इंटरकॉम कर कन्फर्म किया की वह अपनी सीट पर हैं थे। क्योंकि ऑफिस में मीडिया का काम होता है तो टेक्निकल एरिया में भी जाना पड़ता है।
मिस्टर वर्मा अपनी केबिन में बैठ कर हमेशा की तरह कोई मैन्युअल पढ़ रहे थे। उसने कुर्सी पर बैठते हुए कहा, "मैंने इस बार के ड्राफ्ट टेंडर की कॉपी माँगी थी जो अभी हमने फाइनल किया है। आपने मुझे शायद ग़लती से पुराने टेंडर की प्रिंट आउट दी है...यह वापस लीजिये। यह मैं भी डाउन लोड कर सकती थी।" उन्होंने कहा, "क्योंकि नया टेंडर अभी नहीं दे सकते।" मैंने कहा, "मुझे टेक्निकल आइटम्स की लिस्ट और स्पेसिफिकेशन्स देखने है जिससे की मैं इंटिग्रेशन की बारीकियों को समझ पाऊँ..."
"आप समझ नहीं रही है, इस लिस्ट को हम लीक नहीं कर सकते।" एक मिनट के लिए वह सकपका गयी...वह एकदम से खड़ी हुयी, "लीक नहीं कर सकते? मतलब मैं लीक करूँगी? आपका मतलब है कि मैं डॉक्यूमेंट लीक करती हुँ? मिस्टर वर्मा, क्या आप मेरी इंटीग्रेटी पर डाउट कर रहे है? आपको क्या लगता है इस ऑफिस के साथ मेरी लॉयलिटी कम है? मिस्टर वर्मा मैं दावे के साथ कहती हुँ की आप से कही ज्यादा मेरी लॉयलिटी है और रही बात मेरी इंटिग्रिटी की तो वह भी आपसे ज्यादा है..." थोड़ा पॉज लेते हुए वह आगे कहने लगी,
"और जो आप यह तामझाम कर यह टेंडर डॉक्यूमेंट मुझे देने के लिए मेरी केबिन तक चलकर आये थे, वह क्या था? क्या मैं टेंडर डाउनलोड नहीं कर सकती थी? यह लीजिये अपना टेंडर डॉक्यूमेंट और पढ़ते रहिए इसे बार बार..लेकिन ये जो भी आपने किया वह बिल्कुल अच्छा नहीं किया..."
"अरे, नहीं नहीं..." करते वह कुछ बोलने की कोशिश करने लगे। "इतनी समझ मुझे है" कहते हुए उठकर वह आ गयी।
आज वह खुद परचेस कमिटी की चेयरपर्सन रहने लगी है। न जाने कितने ही टेंडर डाक्यूमेंट्स बनाती रहती है और ऑफिस में परचेस भी होती रहती है...
लेकिन उन मीटिंग्स से और उस इंसिडेंट से उसे समझ आ गया था की टेक्निकल फील्ड वाले इस मेल डॉमिनेटेड वर्ल्ड में बीइंग फीमेल अपनी जगह बनाना आसान नहीं है...लेकिन अपने हार्ड वर्क से उसने यह कर दिखाया।
अचानक कोई स्टॉफ एक अर्जेंट अप्रूवल के लिए कोई फ़ाइल लाया था...झटके से वह वर्तमान में वापस आयी...
उसने सिग्नेचर कर फ़ाइल लौटा दी और मीटिंग की कार्यवाही को आगे बढ़ाना शुरू किया, "हाँ तो बताइये, इस मीटिंग के मिनिट्स कब बनाएँगे?... ड्रॉफ्ट मिनट्स ले आइये...करेक्शन कर के शाम को ही फाइनल कर देंगे..."
