तांत्रिक की श्रापित आत्मा
तांत्रिक की श्रापित आत्मा
"गाँव के बाहर वो पुराना कुआँ... मत जाना!!!" यह चेतावनी गाँव के हर बुज़ुर्ग ने दी थी। लेकिन राहुल, आर्यन, समीर और नेहा ने उसे नज़रअंदाज़ कर दिया।
"भूत-प्रेत जैसी चीज़ें नहीं होतीं!" राहुल ने हँसते हुए कहा।
चारों दोस्त गाँव के बाहर बने खंडहरनुमा मंदिर में दाखिल हुए, जो बरसों से बंद था।
लेकिन अंदर घुसते ही... "खर्र...खर्र... खर्र..."
किसी के साँस लेने की भारी आवाज़ गूँज उठी!
नेहा ने डरकर पूछा "ये आवाज़ कहाँ से आ रही है?"
लेकिन तभी... "धड़ाम!!!" मंदिर के दरवाज़े ख़ुद-ब-ख़ुद बंद हो गए!!!
अचानक, एक भयानक परछाई उनके सामने प्रकट हुई। उसकी आँखें कोयले की तरह काली, दाढ़ी लंबी और उलझी हुई थी। वो हवा में तैर रही थी... और उसके गले में हड्डियों की माला थी!
"तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई इस जगह आने की?"
राहुल ने हिम्मत दिखाने की कोशिश की "क.. कौन हो तुम?"
परछाई की हँसी गूँजी "मैं हूँ तांत्रिक देवदत्त... जिसे इस गाँव ने धोखे से मार दिया था!!!"
चारों दोस्त सिहर उठे। समीर ने काँपते हुए पूछा— "त...तुम हमसे क्या चाहते हो?"
"बदला..." तांत्रिक की आवाज़ गूँजी।
"मेरी आत्मा को कभी मुक्ति नहीं मिली... अब तुम सब मेरे शाप के शिकार बनोगे!!!"
नेहा ने चिल्लाते हुए दरवाज़े की तरफ़ दौड़ लगाई। लेकिन जैसे ही उसने दरवाज़ा खोला...
"धड़ाक!!!" कोई अदृश्य शक्ति उसे पीछे खींच ले गई!!!
नेहा ज़मीन पर गिरी और उसके चेहरे पर गहरी खरोंचों के निशान उभर आए।
उसकी आँखों से खून टपकने लगा... "म...मुझे कुछ दिख नहीं रहा!!!"
वो अंधी हो चुकी थी!!! आर्यन ने डरकर उसकी तरफ़ देखा, लेकिन तभी... "खर्रर्रर्रर्र..."
एक लंबी, काली भयानक उंगली छत से नीचे उतरी और आर्यन की गर्दन कसकर पकड़ ली!!!
"घ...घ...गग..." वो हवा में झूलने लगा...
और अगले ही पल "चटाक!!!"
उसकी गर्दन पूरी तरह से घूम गई और उसने वहीँ दम तोड़ दिया!!!
राहुल और समीर सदमे में थे। "ये...ये हो क्या रहा है!!!"
तांत्रिक की परछाई अब पहले से भी ज़्यादा भयानक हो चुकी थी।
"ये सिर्फ़ शुरुआत है..." उसकी हँसी पूरे मंदिर में गूँज उठी।
राहुल ने हिम्मत जुटाकर समीर का हाथ पकड़ लिया और दोनों मंदिर से बाहर भागने लगे।
लेकिन जैसे ही वो मंदिर के गेट तक पहुँचे... "भड़ाम!!!"
दरवाज़ा अपने आप बंद हो गया!!! और तभी...
"किसी को भी... भागने की इजाज़त नहीं!!!"
राहुल और समीर घबराए हुए थे। मंदिर का दरवाज़ा ख़ुद-ब-ख़ुद बंद हो चुका था। नेहा अंधी हो चुकी थी, आर्यन की गर्दन मुड़ चुकी थी, और अब बारी थी...
"अब कौन बचेगा?" तांत्रिक की परछाई ने गहरी हँसी में कहा।
राहुल ने दीवार पर लगी एक फटी हुई तख्ती देखी।
उस पर धूल जमी हुई थी, लेकिन कुछ शब्द साफ़ पढ़े जा सकते थे "जो भी इस मंदिर में आएगा, वो कभी ज़िंदा वापस नहीं जाएगा!!!"
समीर ने कांपती आवाज़ में कहा "हमें यहाँ से निकलना होगा, वरना हम भी मर जाएँगे!!!"
राहुल ने चारों तरफ़ देखा। मंदिर की दीवारों पर भयानक चेहरे उभर रहे थे। अचानक, उन चेहरों में आर्यन का चेहरा भी दिखा!!!
"मदद करो... मुझे यहाँ से निकालो..." आर्यन की आत्मा की कमज़ोर आवाज़ दीवारों से आ रही थी।
नेहा, जो अभी तक ज़मीन पर पड़ी थी, कांपते हुए बोली "आर्यन... त.. तुम जिंदा हो?"
तभी दीवार से एक कटा-फटा हाथ बाहर निकला और नेहा की गर्दन पकड़ ली!!! "तूने मुझे मरने दिया... अब मैं तुझे अपने साथ ले जाऊँगा!!!"
नेहा ज़ोर-ज़ोर से चीखने लगी "नहीं!!! मुझे छोड़ दो!!!"
लेकिन अगले ही पल "चटाक!!!"
आर्यन की आत्मा ने नेहा को दीवार के अंदर खींच लिया!!!
नेहा का शरीर गायब हो गया...!!!
अब सिर्फ़ राहुल और समीर बचे थे।
"अब तुम दोनों में से कौन पहले मरेगा?" तांत्रिक की परछाई ने कहा।
राहुल ने हिम्मत जुटाकर पूछा "तू हमसे क्या चाहता है?"
तांत्रिक की आवाज़ गूँजी "एक बलि और... और मैं तुम्हें छोड़ दूँगा!!!"
समीर ने झट से पूछा "क.. कौनसी बलि?"
तांत्रिक मुस्कुराया "तुम दोनों में से कोई एक अपनी जान दे दे..."
राहुल और समीर एक-दूसरे को देखने लगे। अगर कोई एक मरता, तो दूसरा बच सकता था।
समीर ने कहा "राहुल, मैं तुझे बचाने के लिए अपनी जान दे सकता हूँ..."
राहुल की आँखों में आँसू आ गए। लेकिन तभी... "नहीं!!!"
राहुल ने पीछे से समीर को धक्का दिया!!! समीर सीधे तांत्रिक की छाया में गिरा...
और अगले ही पल... "आआआआआ!!!" तांत्रिक ने समीर को अपने अंदर समा लिया!!!
तांत्रिक अब और भी ताक़तवर हो गया था। राहुल ने भागने की कोशिश की, लेकिन... दरवाज़ा अब भी बंद था। अचानक, उसे ज़मीन पर पड़ा एक लाल धागा दिखा।
उसे याद आया गाँव की एक बुज़ुर्ग औरत ने कहा था "अगर कभी तांत्रिक से सामना हो, तो ये लाल धागा जलाकर फेंक देना!!!"
राहुल ने झट से धागा उठाया, माचिस जलाई और... "फड़ाक!!!"
धागा जलते ही... "आआआआ!!!"
तांत्रिक की आत्मा जलने लगी!!! पूरा मंदिर हिलने लगा... "नहीं!!! मुझे फिर से मरना नहीं है!!!"
"बचाओ!!!" लेकिन अगली ही पल...
"धड़ाम!!!" तांत्रिक की आत्मा धुएँ में बदलकर हमेशा के लिए ख़त्म हो गई!!!
राहुल ने जैसे-तैसे मंदिर का दरवाज़ा खोला और भागते हुए गाँव पहुँचा। गाँववालों ने उसे देखा और सन्न रह गए।
"तू जिंदा कैसे बच गया?" राहुल ने सब कुछ बताया।
गाँव के मुखिया ने गहरी साँस ली और कहा "लेकिन वो मरा नहीं है... वो कभी मर ही नहीं सकता!!!"
राहुल के शरीर में एक सिहरन दौड़ गई... राहुल की हालत ख़राब थी। उसकी आँखों के सामने नेहा, समीर और आर्यन की मौत का खौफनाक मंजर घूम रहा था। गाँववालों ने उसे हवन कुंड के पास बैठा दिया और मंत्रोच्चार करने लगे।
बुज़ुर्ग पुजारी ने कहा "इस पर मृत्यु का साया है... इसे जल्द से जल्द नहलाओ!!!"
राहुल को गंगाजल से नहलाया गया। गाँव की एक औरत ने उसके माथे पर भभूत लगाई और बोली "बेटा, तांत्रिक को जलाया तो है... पर उसने जाने से पहले कुछ कहा था?"
राहुल के दिमाग़ में तांत्रिक की आखिरी चीखें गूँजने लगीं "मैं वापस आऊँगा... तुम सब मरोगे...!!!"
राहुल को गाँव में रहने के लिए एक छोटी-सी झोपड़ी दी गई थी।
गाँव के बड़े-बुज़ुर्गों ने उसे सख़्त हिदायत दी थी "रात को झोपड़ी से बाहर मत निकलना, नहीं तो मौत तय है!!!"
राहुल धीरे-धीरे सोने की कोशिश कर रहा था कि तभी—
"खट... खट... खट..." झोपड़ी के दरवाज़े पर किसी ने दस्तक दी।
राहुल सिहर उठा। "इतनी रात को कौन हो सकता है...?"
उसने काँपते हाथों से खिड़की से बाहर झाँका। "कोई नहीं था..."
लेकिन तभी "राहुल..."
उसे एक कमज़ोर और जानी-पहचानी आवाज़ सुनाई दी...!!!
"नेहा...?!" राहुल का दिल धड़कना भूल गया। "नेहा तो मर चुकी थी...!!!"
राहुल ने दरवाज़ा नहीं खोला, लेकिन तभी "खटाक!!!"
दरवाज़ा अपने आप खुल गया!!! राहुल जमीन पर गिर पड़ा।
उसके सामने नेहा खड़ी थी...
लेकिन... उसकी आँखें सफ़ेद थीं... उसके बाल हवा में उड़ रहे थे... और उसका चेहरा बुरी तरह जला हुआ था...!!!
नेहा धीमे-धीमे राहुल की तरफ़ बढ़ रही थी। "तूने मुझे मरने दिया... अब मैं तुझे मारूँगी!!!"
राहुल ने पूरी ताक़त से चीखने की कोशिश की, लेकिन... "गला सूख गया था!!!"
राहुल ने जल्दी से माँ दुर्गा का ताबीज़ पकड़ लिया और नेहा पर फेंका। "धड़ाम!!!"
नेहा के शरीर से काला धुआँ निकला और वो चीख पड़ी "आआ!!!"
अचानक, नेहा की जगह कोई और खड़ा था...!!! "तांत्रिक!!!"
राहुल दहशत में आ गया। "मैंने तुझे मार दिया था...!!!"
तांत्रिक ने ज़ोर से हँसते हुए कहा "मौत की परछाई कभी नहीं मिटती... मैं लौट आया हूँ... और अब तुझे अपने साथ लेकर जाऊँगा!!!"
राहुल दीवार से चिपक गया। तांत्रिक की आँखों में लाल आग जल रही थी। उसके हाथ हवा में फैले थे और उसके काले कपड़े हवा में लहरा रहे थे।
"राहुल!!! तेरा भी अंत आ गया है!!!" राहुल ने कांपते हुए ताबीज़ अपनी गर्दन से निकालकर उसके सामने किया, लेकिन...
"ताबीज़ टूट गया!!! "आआआआ!!!"
राहुल के हाथ जलने लगे। तांत्रिक हवा में उड़ता हुआ उसकी तरफ़ बढ़ रहा था।
"अब तेरा भी वही हाल होगा जो तेरे दोस्तों का हुआ!!!"
राहुल ने झपटकर एक लकड़ी उठाई और तांत्रिक की तरफ़ फेंकी, लेकिन लकड़ी हवा में राख बन गई।
राहुल को समझ में आ गया कि गाँव में रहना अब नामुमकिन था। उसने दरवाज़े से बाहर छलांग लगाई और बिना देखे जंगल की तरफ़ भागने लगा।
"तू मुझसे भाग नहीं सकता, राहुल!!!" तांत्रिक की भयानक आवाज़ चारों तरफ़ गूँज उठी।
राहुल दौड़ रहा था, लेकिन... "गाँव खत्म होने से पहले ही उसके कदम ठिठक गए!!!"
सामने गाँव का पुजारी खड़ा था। "बेटा, रुक जा!!!"
पुजारी के हाथ में चमकती हुई एक पवित्र माला थी।
राहुल की आँखों में आशा की किरण जगी "बाबा, मुझे बचाइए!!!"
पुजारी ने तांत्रिक की तरफ़ माला उछाली। माला जैसे ही हवा में लहराई, तांत्रिक चीखने लगा "आआआआ!!! यह नहीं!!!"
माला जैसे ही तांत्रिक के ऊपर गिरी, उसका शरीर जलने लगा। "नहीं!!! मैं फिर लौटूंगा...!!!"
"आआआआआ!!!" राहुल और पुजारी ने देखा कि तांत्रिक धीरे-धीरे राख में बदल गया।
"बेटा, अब तू सुरक्षित है..."
राहुल घुटनों के बल गिर गया। "ये सच में खत्म हो गया बाबा?"
पुजारी ने आसमान की तरफ़ देखा और कहा "शायद हाँ... या शायद नहीं..."
राहुल को गाँववालों ने गंगा नदी में स्नान करवाया। सभी को लगा कि अब सब कुछ खत्म हो गया। लेकिन जैसे ही राहुल ने अपनी जेब में हाथ डाला...
"उसे वहाँ वही टूटी हुई ताबीज़ मिली... जो अपने आप फिर से जुड़ चुकी थी..." राहुल के चेहरे का रंग उड़ गया...
राहुल ने जैसे ही ताबीज़ को गौर से देखा, उसके शरीर में एक अजीब-सी ठंडक दौड़ गई। "ये तो जल गया था... फिर दोबारा कैसे जुड़ गया?"
पुजारी ने राहुल के चेहरे की घबराहट देखी और झट से ताबीज़ उसके हाथ से खींच लिया।
लेकिन... "आआआआ!!!"
पुजारी के हाथ से धुआँ निकलने लगा और वह ज़ोर से चीख पड़ा। "बाबा!!!"
गाँव के बाकी लोग दौड़कर आए, लेकिन जैसे ही उन्होंने पुजारी को छूने की कोशिश की...
"भड़ाक!!!" एक ज़बरदस्त धमाका हुआ और पुजारी धुएँ में बदल गया...!!!
गाँववालों ने यह देखा और बुरी तरह डर गए।
एक बूढ़ी औरत काँपते हुए बोली "त... तांत्रिक वापस आ गया!!!"
राहुल ने जल्दी से ताबीज़ उठाया और दूर फेंक दिया, लेकिन ताबीज़ वहीं पर रहा... जैसे कि उसे किसी शक्ति ने रोक रखा हो...
तभी... "खररर... खरररररर...."
जमीन में हलचल होने लगी। गाँव के बीचों-बीच एक काली दरार फट गई... और अंदर से एक जला हुआ हाथ बाहर आया...!!!
"र... रुक जाओ!!!" राहुल ने चिल्लाने की कोशिश की, लेकिन...
"भड़ाक!!!" धरती के नीचे से कोई उठ खड़ा हुआ था...!!!
गाँव में तेज़ आँधी चलने लगी। पेड़ टूटकर गिरने लगे। गाँव वालों ने अपनी झोपड़ियों में छुपने की कोशिश की, लेकिन तभी...
"खट... खट... खट..." गाँव के मंदिर के दरवाज़े अपने आप खुल गए।
और वहाँ से... "तांत्रिक फिर से लौट आया था...!!!"
लेकिन इस बार... "वो पहले से भी ज़्यादा ताक़तवर और भयानक था!!!"
उसकी आँखों से रक्त टपक रहा था, और उसके शरीर से काले साँप लिपटे हुए थे। गाँव की एक लड़की डर के मारे गिर पड़ी। तांत्रिक उसकी ओर बढ़ा, लेकिन राहुल बीच में कूद गया।
"तू... तू फिर से लौट आया...!!!"
तांत्रिक ने भयानक हँसी हँसी "मैंने कहा था न... मौत की परछाई कभी नहीं मिटती...!!!"
तांत्रिक की भयानक हँसी चारों तरफ़ गूँज रही थी। गाँव के मंदिर के पास मौजूद लोग डर से काँप रहे थे। राहुल ने तांत्रिक की तरफ़ देखा, उसकी आँखें सुर्ख लाल हो चुकी थीं और उसके चारों ओर एक काला धुआँ फैल रहा था।
तभी... "भड़ाक!!!"
मंदिर का सबसे ऊँचा खंभा गिर गया!!! गाँव के लोग चीखते हुए इधर-उधर भागने लगे। तांत्रिक ने अपना एक हाथ उठाया और... "गाँव की झोपड़ियों में खुद-ब-खुद आग लग गई!!!"
"आग आग आग!!!" लोग जलते हुए घरों से भागने की कोशिश करने लगे, लेकिन तांत्रिक की परछाई उनके पीछे-पीछे दौड़ रही थी।
राहुल समझ चुका था कि अब अगर कुछ नहीं किया गया, तो पूरा गाँव नष्ट हो जाएगा। उसने हिम्मत जुटाई और सीधा तांत्रिक की ओर देखा "बस बहुत हुआ!!!"
तांत्रिक की नज़र राहुल पर पड़ी और उसने एक शैतानी मुस्कान दी। "हाहाहा, तू मुझे रोक पाएगा? पहले भी तुझे छोड़ दिया था, लेकिन अब नहीं!!!"
राहुल ने ज़मीन से एक जलता हुआ लकड़ी का टुकड़ा उठाया और सीधा तांत्रिक की तरफ़ फेंक दिया। "भड़ाम!!!"
लेकिन... लकड़ी हवा में ही राख बन गई!!! राहुल के चेहरे का रंग उड़ गया... "अब... अब क्या करूँ???"
उसी समय, गाँव के एक बूढ़े बाबा दौड़ते हुए आए।
उन्होंने चिल्लाकर कहा "राहुल, अगर तुझे तांत्रिक को हराना है, तो तुझे मंदिर के अंदर जाना होगा!!!"
राहुल ने चौककर बाबा की तरफ़ देखा "मंदिर के अंदर???"
बाबा बोले "हाँ!!! वहाँ एक पवित्र शंख है... वो ही इसकी शक्ति को खत्म कर सकता है!!!"
राहुल बिना वक़्त गँवाए मंदिर की ओर दौड़ पड़ा। लेकिन जैसे ही वो मंदिर के दरवाज़े तक पहुँचा...
"भड़ाक!!!" दरवाज़े के सामने एक काली दीवार बन गई!!!
"अब तुझे कोई नहीं बचा सकता, राहुल!!!" तांत्रिक ज़ोर से चिल्लाया और हवा में उछलकर राहुल की तरफ़ झपटा!!!
तांत्रिक ने मंदिर के दरवाज़े के सामने काली दीवार बना दी थी। राहुल ने पूरी ताकत लगाकर उसे तोड़ने की कोशिश की, लेकिन...
"धड़ाम!!!" वो ज़मीन पर गिर पड़ा।
तांत्रिक उसकी ओर बढ़ा और उसने हवा में अपना हाथ घुमाया "खरररररर!!!"
राहुल के चारों तरफ़ काले साँप लिपटने लगे।
वो तड़प उठा "न... नहीं...!!!"
गाँव के बूढ़े बाबा ने दूर से देखा कि राहुल मुसीबत में है। उन्होंने ज़ोर से चिल्लाया "राहुल, मंत्र बोलो!!!"
राहुल ने काँपती आवाज़ में पूछा "क... कौन सा मंत्र???"
बाबा ने जल्दी से कहा "ॐ नमः शिवाय!!!"
राहुल ने बिना देरी किए ज़ोर से मंत्र बोलना शुरू किया "ॐ नमः शिवाय... ॐ नमः शिवाय... ॐ नमः शिवाय!!!"
जैसे ही उसने तीसरी बार मंत्र बोला... "भड़ाक!!!" काली दीवार टुकड़ों में बिखर गई!!!
राहुल जल्दी से मंदिर के अंदर भागा। अंदर अंधेरा था, सिर्फ़ दीवारों पर कुछ पुराने दीपक जल रहे थे।
उसने चारों तरफ़ नज़र दौड़ाई और देखा "शंख...!!!"
मंदिर के बीचों-बीच एक सुनहरा शंख रखा था। लेकिन जैसे ही उसने उसे उठाने के लिए हाथ बढ़ाया...
"खररररर... खररररर..." मंदिर की मूर्तियाँ अपने-आप हिलने लगीं!!!
राहुल ने घबराकर पीछे देखा "यह मूर्तियाँ... जिंदा हो रही हैं!!!"
सभी मूर्तियों की आँखों से खून टपक रहा था और उनके चेहरे भयानक दिखने लगे थे।
तभी... "भड़ाम!!!" मंदिर के दरवाज़े अपने-आप बंद हो गए!!!
राहुल फँस चुका था...
बाहर तांत्रिक गाँववालों को एक-एक करके मारने लगा।
एक आदमी चिल्लाया "हमें बचाओ!!!"
लेकिन तांत्रिक ने सिर्फ़ हाथ हिलाया और... "भड़ाक!!!"
वो आदमी हवा में उछलकर धुएँ में बदल गया!!! गाँववालों को बचाने का अब सिर्फ़ एक ही तरीका था... राहुल को पवित्र शंख मंदिर से लाना था!!!
मंदिर के अंदर, राहुल धीरे-धीरे पीछे हट रहा था। "खट... खट... खट..."
मूर्तियाँ अपनी जगह से हिलने लगीं। उनकी आँखों से खून की धाराएँ निकल रही थीं, और उनके होंठों पर एक भयानक मुस्कान थी।
"राहुल... रुक जा...!!! तू इस शंख को नहीं छू सकता...!!!"
राहुल के हाथ-पैर ठंडे पड़ने लगे। लेकिन उसने हिम्मत जुटाई और शंख की तरफ़ तेज़ी से भागा।
राहुल अब शंख से सिर्फ़ दो कदम दूर था।
लेकिन तभी... "भड़ाम!!!" मूर्तियाँ ज़मीन से निकलकर उसके सामने आ गईं!!!
राहुल ने घबराकर पीछे देखा "अब क्या करूँ???"
मूर्तियों में से एक, जो शिव की मूर्ति थी, उसने अपना हाथ उठाया और ज़ोर से कहा "अगर तुझे शंख चाहिए, तो पहले परीक्षा देनी होगी!!!"
राहुल ने चौंककर पूछा "क.. कैसी परीक्षा???"
शिव की मूर्ति गरजी "अगर तू सच्चे दिल से इस गाँव को बचाना चाहता है, तो मौत की घंटी बजा!!!"
राहुल की नज़र मंदिर के कोने में पड़ी एक पुरानी लोहे की घंटी पर गई।
लेकिन... घंटी पूरी तरह से जंग लगी थी और जैसे ही उसने उसे छूने की कोशिश की—
"खर्रररररर!!!" घंटी में से एक भूतिया काली परछाई निकली!!!
राहुल ने डरते-डरते घंटी को ज़ोर से बजा दिया "टन्न....."
"आआआआहhhhhhh!!!" मूर्तियों की भयानक चीखें गूँजने लगीं और वे तेज़ी से ज़मीन में समाने लगीं।
राहुल ने मौका देखकर पवित्र शंख उठा लिया!!! "गड़गड़!!!"
पूरे मंदिर में भूकंप आने लगा। राहुल ने पूरी ताकत लगाकर मंदिर के दरवाज़े की ओर दौड़ लगाई।
लेकिन... "भड़ाक!!!"
दरवाज़ा अपने-आप बंद हो गया!!! राहुल अब फँस चुका था...
राहुल ने पूरी ताकत से मंदिर के दरवाज़े को धक्का दिया, लेकिन...
"धड़ाम!!!" दरवाज़ा एक इंच भी नहीं हिला।
पीछे से मूर्तियों के अंदर बसी रूहें ज़ोर-ज़ोर से चीखने लगीं "तू ज़िंदा बाहर नहीं जा सकता...!!!"
राहुल ने तेजी से इधर-उधर देखा, और तभी... उसकी नज़र मंदिर की छत में बने एक छोटे-से छेद पर पड़ी!!!
राहुल ने बिना समय गँवाए दीवार पर चढ़ने की कोशिश की।
लेकिन तभी... "सssssसssss...."
मंदिर के कोनों से सैकड़ों काले नाग निकल आए!!! उनकी लाल आँखें चमक रही थीं, और उनकी फुफकार मंदिर में गूँज रही थी।
"राहुल...!!! जल्दी कर!!!" बाहर से बूढ़े बाबा की आवाज़ आई।
राहुल ने एक लंबी साँस ली, और एक बड़ा पत्थर उठाकर दीवार पर दे मारा "धड़ाम!!!"
छेद थोड़ा बड़ा हो गया!!! राहुल ने आखिरी कोशिश की और... "आआआह्ह्ह!!!" वो किसी तरह छेद से बाहर निकल आया!!!
जैसे ही राहुल मंदिर से बाहर आया, उसने देखा तांत्रिक ने अपने हाथ हवा में उठा रखे थे, और गाँववालों की आत्माएँ उसकी ओर खिंची चली जा रही थीं!!!
"हा... हा... हा...!!! अब कोई मुझे नहीं रोक सकता!!!"
राहुल ने घबराकर बाबा की ओर देखा "अब क्या करें???"
बाबा ने ज़ोर से कहा "राहुल, जल्दी से शंख बजा!!!"
राहुल ने बिना देर किए शंख को अपने होंठों से लगाया और...
"भोंnnnnnnnnn!!!"
जैसे ही शंख बजा, चारों तरफ़ रोशनी फैल गई।
तांत्रिक चिल्लाने लगा "नहीं...!!! ये नहीं हो सकता...!!!"
वो तड़पने लगा, उसकी काली छाया धुएँ में बदलने लगी।
"भड़ाम!!!"
तांत्रिक ज़मीन पर गिर पड़ा, और उसकी आत्मा जलकर राख हो गई। गाँववालों की आत्माएँ फिर से उनके शरीरों में लौट आईं। राहुल ने चैन की साँस ली "सब खत्म हो गया..."
गाँव में सब कुछ शांत था। बाबा ने मुस्कुराते हुए कहा "अब कोई भी तांत्रिक इस गाँव में नहीं आएगा।"
राहुल ने मंदिर की ओर देखा और धीरे-धीरे वहाँ से निकलने लगा... लेकिन तभी... "खर्रर्रर्रर्रर्र...!!!"
मंदिर के अंदर से एक डरावनी हँसी गूँजी। "क्या तुम सच में सोचते हो कि सब खत्म हो गया, राहुल...? ये तो बस शुरुआत थी..."
राहुल का दिल तेज़ी से धड़कने लगा। वो धीरे-धीरे पीछे हटा और बाबा की तरफ़ देखा। "बाबा... ये आवाज़...?"
बाबा की आँखों में डर था। "राहुल, जल्दी गाँव छोड़ दो...!!!" लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी...
राहुल ने मंदिर की ओर देखा "खर्रररररर..." अचानक मंदिर की धरती फटने लगी।
एक गहरी दरार से लाल रोशनी निकलने लगी। "हा... हा... हा...!!!"
"तुमने तांत्रिक को मारा नहीं... उसे और ताकतवर बना दिया है!!!" राहुल के होश उड़ गए!!!
मंदिर के अंदर से काली धुआँ जैसी एक छाया निकली। "अब मैं इस गाँव को पूरी तरह मिटा दूँगा!!!"
राहुल ने घबराकर बाबा की ओर देखा "बाबा, अब क्या करें???"
बाबा ने ज़ोर से कहा "शंख को फिर से बजाओ... लेकिन इस बार मंत्र के साथ!!!"
राहुल ने जल्दी से शंख उठाया और बाबा का बताया हुआ मंत्र पढ़ने लगा "ॐ ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे!!!"
लेकिन... शंख एकदम काला पड़ने लगा!!! नहीं!!! मंत्र काम नहीं कर रहा!!!"
छाया हँसने लगी "हा... हा... हा... अब कोई तुम्हें नहीं बचा सकता!!!"
बाबा ने अचानक अपनी आँखें बंद कीं और मंत्र पढ़ते हुए अपने शरीर को बलि देने का निर्णय लिया।
राहुल चिल्लाया "बाबा... नहीं!!!"
लेकिन बाबा ने अपना हाथ ज़मीन पर पटका और पूरा मंदिर तेज़ रोशनी से भर गया। "आआआआआआह्ह्ह!!!"
छाया चिल्लाई और भयानक चीख के साथ राख में बदल गई।
गाँव एक बार फिर शांत हो गया।
बाबा अब नहीं रहे थे... राहुल ने उनके शरीर को देखा और गहरी उदासी में डूब गया।
लेकिन तभी... बाबा की मुट्ठी में एक पुराना ताबीज़ था!!!
राहुल ने उसे उठाया और धीरे से फुसफुसाया "क्या ये सच में खत्म हो गया...?"

