सव्यसाची भाग-2
सव्यसाची भाग-2
इस आवाज को सुनकर दिवाकर बुरी तरह डर गया वह डरते हुए बोला- क..... कौन
मैं हूं अमृता- अंदर से आवाज आई
अमृता, लेकिन तुम तो सपने में थी फिर नहीं नहीं मैं सपना देख रहा हूं
अमृता- तुम सपना नहीं देख रहे हो ये हकीकत है और वो भी हकीकत ही था जिसे तुम सपना समझ रहे थे
दिवाकर- जो भी हो लेकिन तुम मेरे शरीर में क्या कर रही हो बाहर निकलो मेरे शरीर से ?
अमृता- नहीं निकलूंगी जब तक मेरा प्रतिशोध पूरा नहीं हो जाता तब तक मैं तुम्हारे शरीर में ही रहूंगी और तुम्हें मेरा साथ देना होगा
तभी किसी ने दरवाजा खटखटाया
ओय हिरो, चल जल्दी से बाहर आ मुझे भी नहाना है,- अनू चिल्लाई
दिवाकर- हां रूक आता हूं
दिवाकर दरवाजा खोलकर बाहर निकलता है और अनू को देखकर वहां से जाने लगता है तभी अनू की आवाज आई- ओय सुन, ये अंजलि कौन है
अंजलि! अंजलि के नाम सुनकर दिवाकर चौंक गया जैसे उसकी चोरी पकड़ी गई हो
दिवाकर- वो वो मेरी दोस्त हैं कालेज में
अनू - अच्छा बच्चू दोस्त कभी I love you नहीं बोलते, सच सच बता वरना अभी पापा को बताती हूं
दिवाकर- नहीं नहीं पापा को नहीं मैं बताता हूं लेकिन वादा कर तू मम्मी पापा को कुछ नहीं बताएगी
अनू- कोशिश करूंगी
दिवाकर- क्या !
अनू - अच्छा बाबा नहीं बताऊंगी, तुम बताओ
दिवाकर- जब मैं कालेज में नया नया एडमिशन हुआ था तब सीनियर्स ने मेरे रेंकिंग लेना का मन बनाया सीनियर्स लडकीयां थी इसलिए उन्होंने मुझे पिटवाने का नया अंदाज निकाला, मुझे एक गुलाब पकडाकर गेट से थोड़े दूर पर खड़ा करा दिया गया और आदेश दिया गया कि जो। भी पहली लड़की उस गेट से अंदर आएगी उसे तुम्हें ये गुलाब देकर किस्स करना पड़ेगा।
मेरे लाख मना करने के बावजूद वे नहीं माने और आखिरकार मुझे वो काम करना ही पड़ा गेट के पास एक लाल गुलाब लेकर खड़ा हो गया दिल जोरों से धड़क रहा था क्योंकि मैं बचपन से ही लड़कियों के मामले में कमजोर था मैं मन ही मन दुआ कर रहा था कि आज कोई लड़की ना आए
लेकिन किस्मत को तो कुछ और ही मंजूर था सामने से एक लड़की ब्लू ड्रेस में पुस्तक को अपने सीने से लगाए हुए आंखों में एक सुंदर सा चश्मा पहने हुए लेकिन नजरें झुकाए हुए आ रही थी, उसे देखकर मुझे लग रहा था जैसे हमारा रिश्ता जन्मों जन्मों का है मैं वहीं खड़े खड़े उसके ख्यालों में खोया था कि तभी किसी लड़की ने मुझे आवाज दिया वे सीनियर थे जो बोल रहे थे आगे बढ़ो
मैं भी तैयार होकर जंग के लिए निकल पड़ा और उसके सामने जाकर खड़ा हो गया वो रूक गई उसने अपने आंखें ऊपर कर मुझे देखने लगी उसके आंखों में मुझे मेरा पूरा संसार दिखने लगा मैंने उसे गुलाब दिया वो कन्फ्यूज थी कि मैं उसे गुलाब क्यो दे रहा हूं और उसके बाद समय आया मेरे पिटने का मैंने सोचा चलो जो होगा देखा जायेगा
मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिया मेरे आंखें अपने आप बंद हो गया मेरे शरीर में जैसे 440 वोल्ट का करंट दौड़ रहा था, तभी वहां सीटियों के आवाज से मेरे आंखें खुल गई और तभी मेरे गालों पर एक जोरदार थप्पड़ रसीद हुआ और वो लड़की वहां से भाग गई मेरा चेहरा भी पीला पड़ चुका
ऐसा मेरे साथ पहली बार हुआ था, वो लड़की ना जाने मेरे बारे में क्या सोच रही होगी और अगर उसने सर से कम्प्लेन कर दिया तो मेरे पापा तो मुझे मार ही डालेंगे बेटा दिवाकर तुने ये क्या किया अब तो तुम गए काम से
अनू बीच में बोल पड़ी- वाह भाई, इस बात पर तो तुम्हारी तारीफ बनती है आखिर तूने साबित कर दिया कि तू मेरा भाई है, फिर आगे क्या हुआ ???
दिवाकर- उसके बाद में उसे पुरे कालेज में ढूंढता रहा मुझे उसे सच सच बताना था और माफी भी मांगना था लेकिन वह कालेज में नहीं थी, पुरे सात दिन बाद वो कालेज आई मैंने बहुत बार कोशिश किया की जाकर उससे माफी मांग लूं लेकिन नहीं कर पाया वह भी फस्ट ईयर की स्टूडेंट थी
कालेज से वो अकेली ही घर के लिए निकल पड़ीं मुझे उससे माफी मांगने का इससे अच्छा अवसर नहीं मिलने वाला था मैं भी उसके पीछे पीछे चला गया और तभी एक सुनसान जगह पर...
अनू चौंक कर बोली- क्या किया
दिवाकर सावधान इंडिया देख देखकर तो तू बिल्कुल CID बन चुकी है कुछ नहीं हुआ बस में हिम्मत करके उसके सामने खड़ा हो गया और एक ही सांस में सब फटकार बोल दिया
मेरी बात सुनकर वो जाने लगी मैंने सोचा वो अभी भी गुस्सा है लेकिन थोड़ी दूर जाने के बाद वो मुडकर मुझे देखने लगी उसके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान थी।
अनू- अच्छा तो ये हैं अंजलि का राज
दिवाकर- हां खामखाह तेरे चक्कर में हारर कहानी में प्यार जोड़ना पड़ा पता नहीं पाठक मेरे बारे में क्या सोच रहे होंगे, अच्छा तू अपना वादा याद रखना, मैं कालेज जाता हूं
अनू- भाभी से मिलने
दिवाकर- तू ना मार खायेगी मेरे हाथों से
अनू- अच्छा बाबा जाओ
तभी इतने समय से चुप अमृता बोली - अरे तुम्हारी बहन तो बहुत खूबसूरत है यार चलो मैं तुम्हारे शरीर को छोड़कर उसके शरीर में चली जाती हूं
नहीं उसे छूना भी मत - दिवाकर चिल्लाया
क्या हुआ भईया किसे मत छुना- अनू घबराई
दिवाकर- कुछ नहीं तुम जल्दी से अपने कमरे में जाओ
और तुम खबरदार जो मेरे परिवार के साथ कुछ किया तो - दिवाकर घबराते हुए बोला
ओके ओके वैसे भी मैं सिर्फ तुम्हारे ही शरीर में प्रवेश कर सकतीं हूँ - अमृता फुसफुसाई
अमृता- अच्छा ठीक है पहले तुम मुझे खाना खिलाओ बहुत भूख लगी है
डाइनिंग टेबल पर मां ने खाना परोसा, खाने को देखकर वह भड़क गई और खाने की थाली को जमीन पर फेंक दिया
मां- क्या हुआ बेटा खाना क्यों फेंक दिया
दिवाकर- कुछ नहीं मां वो बस , मैं जाता हूं
तुमने खाना क्यों फेंक दिया तुम्हें तो बहुत भूख लगी थी ना - दिवाकर
अमृता- वो घास फूस कौन गाएगा
दिवाकर- तो
अमृता- मुझे मांस खाना है
दिवाकर- हरगिज नहीं मैं शुद्ध शाकाहारी हूं मैं मांस नहीं खाऊंगा
अमृता- तुम्हें खाने के लिए कौन बोल रहा है, मांस तो मैं खाऊंगी
दिवाकर- लेकिन पेट में तो मेरे जाएगा
अमृता- अरे हां, तो क्या हुआ मुझे तो मांस ही खाना है अगर मुझे मांस नहीं मिला तो मैं तुम्हारे फैमली को खा जाऊंगी
दिवाकर- ओके
न चाहते हुए भी दिवाकर को चिकन खाना पड़ा लेकिन चिकन देखकर अमृता उस पर टूट पड़ी और ऐसे खाने लगी जैसे सालों से भूखी हो
दिवाकर- अब चलो मुझे कालेज जाने के लिए लेट हो रहा है
अमृता- नहीं मैंने सुना है खाना खाने के बाद आइसक्रीम खाना चाहिए, मुझे आइसक्रीम खाना है
दिवाकर- दिस इस टू मच, हम अभी कालेज जा रहे हैं
अमृता- नहीं आइसक्रीम
दिवाकर- जी करता है तुम्हें मार डालूँ
आइसक्रीम खाने के बाद दोनों मतलब दिवाकर कालेज पहुंचता है कालेज में उसके दोस्त उनका इंतजार कर रहे थे, हरीश उसे गले लगाते हुए बोला- कैसा है दोस्त
लेकिन गले लगाने से पहले ही उसने हरीश को दूर हटा दिया
हरीश- क्या हुआ यार
दिवाकर- कुछ नहीं यार बस थोड़ी तबीयत ख़राब है मैं तुम लोगों है बाद में बात करता हूं
दिवाकर- तुमने उसे दूर क्यों ढकेला
अमृता- तो और क्या करती वो मुझे गले लगाने वाला था
दिवाकर- वो तुम्हें नहीं मुझे गले लगा रहा था
अमृता लेकिन मैं भी तो तुम्हारे शरीर में हूँ ऐसे ही किसी को गले लगाने नहीं दूंगी
दिवाकर- तो बाहर निकल जाओ ना
अमृता- निकल जाऊंगी पर समय आने पर
तभी पीछे से किसी ने दिवाकर को गले लगाया- वो अंजलि थी
दिवाकर- अरे अंजलि तुम
अंजलि- हां मैं और मैं तुमसे नाराज़ भी हूँ तुमने मुझे फोन क्यों नहीं किया इतने दिन
दिवाकर- सारी यार वो थोड़ा बिज़ी था
तभी अमृता बोली- अच्छा तो ये हैं अंजलि वैसे मानना पड़ेगा तुम्हारे च्वाइस को
रात के बारह बज रहे थे सभी गहरी नींद में सो चुके थे लेकिन दिवाकर अभी भी जाग रहा था तभी वो उठकर बेंड में बैठ गया
अमृता- क्या हुआ
दिवाकर- अगर तुम्हें मेरे शरीर में रहना है तो बताओ आखिर तुम हो कौन और तुम्हारा ये हाल कैसे हुआ
अमृता- कुछ महीने पहले तक मैं भी जींदा थी मैं ऐजगाड नामक ग्रह से आई हूं मेरे पिता वहां के राजा थे हमारे राजपरिवार को सव्यसाची कहते थे मैं उनकी राजकुमारी थी हम खुशी खुशी रह रहे थे लेकिन हमारे खुशियों पर उनकी नजर लग गई
दिवाकर- किसकी
अमृता- उन काली शैतानों की जो पूरे आकाश गंगा में भ्रमण करते हैं और ग्रहों में जाकर वहां का विनाश कर देते हैं सभी को मार डालते हैं , समझ लो वो जिस ग्रह में जाते वहां कयामत आता है ऐसे ही उनकी नजर हमारे ग्रह पर पड़ चुका था उन्होंने सब को मार डाला मेरे परिवार सब को लेकिन मैं बच गई और भागते भागते यहां आ पहुंची
और जब मैंने तुम्हें लोगों की मदद करतें हुए देखा तो मुझे लगा तुम अच्छे हो और मेरी मदद कर सकते हो इसलिए मैं तुम्हारे शरीर में प्रवेश हो गई मैं तो उनकी नजरों से बच गई लेकिन एक बुरी खबर है
दिवाकर- बुरी खबर ???
अमृता- हां वो काली शक्तियां पृथ्वी पर आ चुके हैं अगर उन्हें रोका नहीं गया तो पृथ्वी का नामोनिशान नहीं रहेगा उनकी शक्तियां अनंत है
दिवाकर- ओह नो, अब क्या हुआ क्या उन्हें रोकने का कोई उपाय नहीं है ????
तभी टीवी पर ब्रेकिंग न्यूज आ रहा था किसी अंजान शक्तियों ने मुम्बई को तहस-नहस कर दिया है लाखों लोगों के मरने की खबर आ रही है कोई भी समझ नहीं पा रहा है कि वो कौन है जो एक पल में ही सबकुछ तहस नहस कर दिया है क्या सरकार उन्हें रोक पाएगा।

