STORYMIRROR

ritesh deo

Abstract

3  

ritesh deo

Abstract

सुनो

सुनो

2 mins
140

सुनो

   ज्यादा कुछ नहीं बस मैं इतना तुमसे चाहता हूं की जैसे मैं आप से प्रेम करता हूं वैसे आप भी मुझसे करो ऐसा जिसमें मुझे अगर चोट लगे तो मेरी आवाज़ से तुम मेरी पीड़ा का एहसास कर सको जैसे मैं तुम्हारी आवाज से तुम्हारे दर्द को महसूस कर लेता हूं और तुम्हें अपने प्यार के मरहम से मुस्कुराहट देता हूं....ठीक ऐसा ही एहसास सुकून मुझे भी करना है....


    मैं जानता हूं उम्मीद रखना ये प्रेम में नहीं आता है और मैं कोई उम्मीद भी नहीं रखता हूं और हाँ आप को बोल भी नहीं रहा हूं कुछ आप जैसे भी मुझसे प्रेम करती हो मुझे स्वीकार है ... मैं तो सिर्फ अपने हृदय की बात आप से बता रहा हूं जिससे मेरे मन को शांति और मुझे सुकून मिले....


     आप को पता है आप मेरी कहानी का हिस्सा बन गई हो जैसे शरीर का कोई अंग काम न करे तो मन में बहुत पीड़ा होती है....ठीक उसी तरह आप अगर मुझसे दूर जाती हो या कही बिन बताए जाती हो तो मुझे बेचैनी घबराहट होती हैं ऐसा लगता है की मेरे जिस्म का एक हिस्सा गायब हो गया हो....


   मैं इसी लिए आप से दूर नहीं होता हूं जानती हो क्यों क्योंकि मुझे जो पीड़ा होती है मैं नहीं चाहता हूं आप को भी उसी पीड़ा से गुजरना पड़े... हाँ मैं इतना ज़रूर चाहता हूं मेरी पीड़ा का तुम आभास करो और जैसे मैं तुमसे प्रेम करता हूं... वैसा ही प्रेम पाने की अभिलाषा रखता हूं ...आप प्रेम करो अपने हिसाब से हमने तो अपने हृदय की बात को कह दिया है


Rate this content
Log in

Similar hindi story from Abstract