Laxmi Yadav

Tragedy Others


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Laxmi Yadav

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सपनों के रिश्ते

सपनों के रिश्ते

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बचपन से ही अपने चारों ओर प्यार का जहाँ देखती आई थी- मुस्कान। परी जैसा रूप, परी जैसे सुनहरे रेशमी बाल व परी जैसी मुस्कान। इसलिए उसका नाम था मुस्कान। गुड़ियों व सखियों की दुनिया में कब उसका बचपन पलक झपकते बीत गया उसे पता ही नहीं चला। युवा अवस्था में तो यौवन में और भी निखार पर था। हाँ, अब मुस्कान कॉलेज जाती थी। गोरी- गोरी , कजरारी सुंदर आँखें कमर तक लहराते सीधे रेशमी केश, गली में हर कोई उसका दीवाना था। पर मुस्कान तो मृगनयनी समान इन सबसे बेखबर कुलांचे भरती मानो आसमा छू लेगी। उसका तो सपना था पढ़ना और कुछ बन कर दिखाना। पर क्रूर नियति के दाँव- पेंच भला कौन समझ सका? 

मुस्कान अपने सपनों की दुनिया में खोई रहती। कोई राजकुमार आता उसे एक अलग ही सपनों की नगरी में ले जाता। फूलों का शहर, छोटी सी झील और उसमे फूलों से सजी छोटी नौका। बस वो नौका- विहार करती रहती अपने राजकुमार की आँखों में डूबते हुए। पर सपने तो बस सपने होते है......। समय का कालचक्र कुछ ऐसा चला की आज मुस्कान फूलों की सेज पर दुल्हन बन कर बैठी ज़रूर थी, पर उसके चेहरे पर मुस्कान ही नहीं थी। कैसे रहती? भाग्यविधाता ने उसके सपनों के साथ क्रूर मज़ाक जो कर डाला। डोली में बैठने से पहले ही बाबुल को छीन लिया। चाचा ने उसकी शादी एक बेटे के पिता से करवा दी। अब न उसके अरमाँ थे ना ही उसके सपनों की दुनिया। बस हकीक़त से टकरा कर चकना चूर हुए उसके ख़्वाब बिखरे पड़े थे। कब उसकी आँख लग गयी उसे पता ही नहीं चला। फिर वही उसके सपनों के रिश्ते, फूलों का शहर, गुलमोहर से सजी गालियाँ, कमल पुष्प से सज्जित सरोवर, फूलों से सुवासित नौका और राजकुमार की आँखों की गहराई में विहार करती मुस्कान- उसके चेहरे पर उसकी अमर मुस्कान। 

जी, हाँ उसके अर्थी की तैयारी हो रही थी। लोग कह रहे थे बिचारी नींद में चिर निद्रा में चली गई। कोई समझ नहीं सका कि वो तो अपने स्वप्न लोक में चली गई। 



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