सपनों का आसमान
सपनों का आसमान
सपनों का आसमान
– मिस गुनगुन की कहानी
हर इंसान के जीवन में एक ऐसा पल आता है, जब वह खुद से पूछता है — “क्या मैं उड़ सकता हूँ?”
मेरे लिए वो पल हर शाम आता था… जब पहाड़ी गाँव धारकोट के ऊपर बादलों से भरा आसमान दिखता था।
मैं गुनगुन हूँ — अब सब मुझे मिस गुनगुन – पायलट गुनगुन कहते हैं।
पर कभी मैं सिर्फ एक लड़की थी, जो छत पर बैठकर बादलों से बातें करती थी।
माँ नहीं थी, और पापा स्कूल में अध्यापक थे। मुझे सपनों से बहुत प्यार था, पर दुनिया को लड़कियों के सपने अक्सर भारी लगते हैं।
कहते थे —
“तू पायलट बनेगी? यहाँ से शहर तक गई नहीं और आसमान की बात करती है।”
पर मुझे यकीन था — मेरा आसमान यहीं से शुरू होगा।
हर रात मैं आसमान से कहती —
"तू डरावना है, काला है, भारी है… पर एक दिन मैं तुझसे ऊपर जाऊँगी।"
स्कूल में अव्वल आई, फिर स्कॉलरशिप से शहर गई। कठिनाइयाँ थीं — भाषा की, पैसे की, ताने और अकेलेपन की।
पर हर बार जब हिम्मत टूटने लगती… मैं छत, आसमान और माँ को याद करती।
और खुद से कहती —
“तेरे पंख तेरे इरादे हैं, गुनगुन। बस उड़ते रह।”
सालों बाद, जब मेरा पहला उड़ान परीक्षण पास हुआ — मैं रोई नहीं।
मैं सिर्फ चुपचाप आसमान की ओर देखकर मुस्कुरा दी — जैसे बादलों ने मेरी पीठ थपथपाई हो।
और फिर, उस दिन… जब मैं धारकोट के ऊपर हेलिकॉप्टर लेकर पहुँची — पूरा गाँव मैदान में था।
पापा ने मुझे देखा — वर्दी में, चश्मे में, अपने सपनों के साथ।
मैंने सिर्फ इतना कहा —
“पापा, देखो… अब ये बादल मुझे डराते नहीं, ये मेरे नीचे हैं।”
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सीख:
हर गुनगुन के अंदर एक आसमान होता है — बस उसे पहचानने के लिए थोड़ी हिम्मत और बहुत सारा यकीन चाहिए।
