शीर्षक: काली हवेली का खूनी सन्नाटा
शीर्षक: काली हवेली का खूनी सन्नाटा
शीर्षक: काली हवेली का खूनी सन्नाटा जीप घने जंगल के बीच टूटी-फूटी सड़क पर रेंग रही थी। चारों तरफ इतना गहरा अंधेरा था कि टॉर्च की रोशनी भी उसमें खोती नज़र आ रही थी। आर्यन खामोशी से गाड़ी चला रहा था, लेकिन उसके चेहरे पर तनाव साफ़ दिख रहा था। बगल में बैठी रिया घबराहट में बार-बार अपने हाथ मल रही थी। पीछे लकी, समीक्षा और बबलू बैठे थे। हमेशा बकवास करने वाला बबलू आज अजीब तरह से चुप था और खिड़की से बाहर घूर रहा था। "बबलू भाई, क्या हुआ? आज 'ब्लैक सर्पेंट' के डर से बोलती बंद हो गई क्या?" समीक्षा ने माहौल को हल्का करने के लिए चुटकी ली। लेकिन बबलू ने कोई जवाब नहीं दिया, वह बस जड़ बना बाहर देखता रहा। अचानक, पेड़ के झुरमुटों के बीच से 'काली हवेली' का भयानक ढांचा नज़र आया। हवेली के टूटे हुए कंगूरे और काली दीवारें रात के अंधेरे में किसी राक्षस की तरह लग रही थीं। हवा में एक अजीब सी सड़न भरी बदबू फैली थी और अजीब-अजीब सी आवाज़ें आ रही थीं। जीप रुकते ही एक सन्नाटा छा गया, जिसे केवल चमगादड़ों की फड़फड़ाहट तोड़ रही थी। बबलू अचानक पागलों की तरह हँसने लगा। "आ गए! हम आ गए!" उसकी आवाज़ पहले जैसी नहीं थी, वह बहुत भारी और डरावनी लग रही थी। वह गाड़ी से उतरा और हवेली की तरफ दौड़ पड़ा। "बबलू, रुको! वहां जाना खतरनाक है!" आर्यन चिल्लाया और सब उसके पीछे भागे। लेकिन बबलू हवेली के काले खंभों के बीच ओझल हो गया। जब वे हवेली के अंदर पहुँचे, तो टॉर्च की रोशनी में उन्होंने जो देखा, उसे देखकर उनके पैरों तले ज़मीन खिसक गई। हवेली के बीचों-बीच एक पुराना, विशाल बरगद का पेड़ खड़ा था, जिसकी जड़ें और शाखाएं हवेली की दीवारों में धँसी हुई थीं। बबलू उस पेड़ के पास खड़ा था, लेकिन वह अकेला नहीं था। उसके चारों तरफ हवा में काली, धुंधली परछाइयां तैर रही थीं। वे परछाइयां चिल्ला रही थीं, रो रही थीं और बबलू को पीट रही थीं। उनके प्रहार इतने ज़ोरदार थे कि बबलू के शरीर से खून की धाराएं बहने लगीं। वह दर्द से तड़प रहा था, लेकिन वह उन परछाइयों से बच नहीं पा रहा था। "बबलू!" रिया जोर से चिल्लाई। आर्यन ने हिम्मत जुटाई और बबलू की तरफ बढ़ने लगा, लेकिन एक काली परछाई ने उसे पीछे धकेल दिया। लकी और समीक्षा डर के मारे कांप रहे थे। अचानक, एक और आवाज़ गूँजी - जैसे कोई लोहे की जंजीरें घसीट रहा हो। सब सहम गए। बरगद के पेड़ से एक औरत की परछाई बाहर निकली। उसके लंबे काले बाल उसके चेहरे पर बिखरे थे और उसकी आँखें लाल अंगारे की तरह चमक रही थीं। "ये... ये काली हवेली का भूत है!" बबलू तड़पते हुए चिल्लाया। वो औरत धीरे-धीरे उनकी तरफ बढ़ रही थी। उसकी हँसी बहुत ही खौफनाक थी। वह बोली, "तुम सब यहाँ क्यों आए? ये हवेली मेरी है! और तुम सब मेरे शिकार हो!" तभी एक ज़ोर का धमाका हुआ और हवेली का दरवाज़ा खुल गया। सब भाग खड़े हुए। वो औरत भी हवा में गायब हो गई। जीप तक पहुँचते-पहुँचते सबकी साँसें फूल रही थीं। बबलू का चेहरा सफ़ेद पड़ गया था और उसका पूरा शरीर खून से लथपथ था। "स... समीक्षा जी, आपने... आपने देखा ना? काली हवेली का भूत!" उसने हकलाते हुए कहा। समीक्षा ने अपनी आँखें पोंछते हुए कहा, "हाँ बबलू भाई, मैंने... मैंने देखा। काली हवेली का भूत!" लकी ने मुस्कुराते हुए कहा, "अरे, ये तो बस एक भ्रम था!" लेकिन उसकी आवाज़ में वो आत्मविश्वास नहीं था। आर्यन ने रिया का हाथ थामा और बोला, "भले ही वो एक भ्रम था या सच, लेकिन जब तक हमारे पास अपनों का साथ है, हम हर मुश्किल से टकरा सकते हैं।"

