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sukhwinder Singh

Inspirational

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sukhwinder Singh

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शीर्षक: अहंकार की भेंट

शीर्षक: अहंकार की भेंट

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शीर्षक: अहंकार की भेंट ​एक बार एक धनी और अहंकारी जमींदार गुरु गोबिंद सिंह जी के दरबार में आया। उसने गुरु जी को दिखाने के लिए अपने हाथों में बहुत ही कीमती सोने के कंगन पहने हुए थे। वह चाहता था कि गुरु जी उसके गहनों की तारीफ करें। ​बैठते समय उसने चालाकी से अपना एक कंगन उतारा और गुरु जी के चरणों में रखकर बोला, "महाराज, यह तुच्छ भेंट स्वीकार करें।" गुरु साहिब उसकी नीयत ताड़ गए। उन्होंने वह कंगन उठाया और पास बहती नदी में फेंक दिया। जमींदार घबरा गया और चिल्लाया, "महाराज! वह बहुत कीमती था! कहाँ गिरा है? मैं उसे निकाल लाता हूँ।" ​गुरु जी ने मुस्कुराकर अपना दूसरा कंगन भी उतारा और उसे भी उसी जगह नदी में फेंकते हुए कहा, "वह यहाँ गिरा है।" जमींदार सन्न रह गया। गुरु जी ने उसे समझाया, "सिक्ख! मैं तेरे सोने का भूखा नहीं हूँ। तू यहाँ त्याग करने आया था या अपनी अमीरी दिखाने? अगर त्याग करना है, तो पहले अपने अहंकार का त्याग कर। इन कंगन से कीमती तेरी श्रद्धा है।" जमींदार का सिर शर्म से झुक गया और उसे समझ आया कि गुरु के पास वस्तुएँ नहीं, भावनाएँ लेकर जाना चाहिए।


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