प्रशांत की बहन की शादी के लिए कई रिश्ते आ रहे थे, लेकिन आज प्रशान्त ने एक रिश्ते को शादी के लिए पक्का कर दिया।
"कल जो लोग रिश्ते की बात करने आए थे, उनका परिवार भी आज के रिश्ते जैसा ही है, है न प्रशांत?"
प्रशांत की माँ ने पूछा।
"हाँ,माँ।'
"फिर दोनों में से कौन-सा लड़का तुम्हें ज्यादा पसंद आया प्रशांत?"
"आज वाला लड़का, माँ।"
"क्यों? दोनों ही तो एक समान ही पढ़े हुए हैं और फिर दोनों के परिवार की आर्थिक स्थिति भी बिलकुल समान है, फिर किस आधार पर आज वाला लड़का।"
"बताता हूँ माँ, जब दोनों से उनके बड़े भाइयों के बारे में जानना चाहा तो आज वाले लड़के ने बिना किसी झिझक या शर्मिंदगी के, खुद्दारी से आँखों में चमक के साथ न सिर्फ़ बड़े भाई का व्यवसाय बताया बल्कि उनके सेल्समेन बनने की पारिवारिक वजह बताते हुए यह भी कहा, कि मेरे भैय्या मुझसे ज्यादा होनहार हैं। साथ ही परिवार के प्रति अधिक संवेदनशील भी, इसीलिए परिवार की माली हालात ठीक नहीं होने पर, उन्होंने तुरंत जो भी काम मिला ले लिया ताकि परिवार के खर्च के साथ मेरी पढ़ाई जारी रह सके। अगर आपको मेरे भाई के सेल्समैन होने से शर्मिंदगी है, तो माफ कीजिए, हमारा रिश्ता जुड़ नहीं पाएगा।"
"अच्छा!
लेकिन कल वाले लड़के ने क्या कहा था?"
आज से उलट कल वाले लड़के की आँखों में अपने बड़े भाई के बारे में बात करते समय शर्मिंदगी थी। जो अपने परिवार की बात करते समय सम्मान महसूस न करे, वह न तो अपनी पत्नी का सम्मान कर सकता है, नाही स्वयं ही समाज में मान-सम्मान का पात्र बन सकता है। मेरी बहन ऐसे परिवार का सदस्य तो हरगिज नहीं बन सकती माँ।"