सात समंदर और वादा
सात समंदर और वादा
सात समंदर और वादा
क्रिस्टोफर कोलंबस बचपन से ही समुद्र की लहरों में अपना भविष्य देखता था।
उसके दिल में एक वादा था—वादा कि वह सात समंदर पार करेगा और नई दुनिया खोजेगा।
स्पेन के राजदरबार में उसने कहा:
“मैं वादा करता हूँ कि सात समंदर पार करके ऐसी धरती खोजूँगा, जहाँ सूरज नई आशा लेकर उगेगा।”
राजा और रानी ने उसे जहाज़ दिए।
कोलंबस ने अपनी यात्रा शुरू की—
पहले समंदर में तूफ़ान ने उसे परखा।
दूसरे में नाविकों का डर उसे रोकना चाहता था।
तीसरे में भूख और प्यास ने चुनौती दी।
चौथे में अंधकार और अनिश्चितता थी।
पाँचवें में विद्रोह की आवाज़ें उठीं।
छठे में आशा की किरणें चमकीं।
सातवें समंदर में, क्षितिज पर नई धरती दिखाई दी।
जब उसने नई दुनिया देखी, तो उसका वादा पूरा हुआ।
वादा केवल खोज का नहीं था, बल्कि साहस, विश्वास और सपनों का था।
सात समंदर पार करके उसने साबित किया कि इंसान का वादा, अगर दिल से किया जाए, तो इतिहास बदल सकता है।
और उसी क्षण उसे समझ आया—
सात समंदर असल में बाहर नहीं होते।
वे इंसान के भीतर होते हैं।
जो उन्हें पार कर लेता है,
वही अपनी नई दुनिया खोज लेता है।
