राजू का मार्ग
राजू का मार्ग
🐾 राजू का मार्ग
लेखक: कल्पेश पटेल
राजू एक छोटा‑सा बछड़ा था, जिसकी आँखों में हमेशा चमक रहती थी। गाँव के सारे बछड़े तेज़ दौड़ते, लेकिन राजू धीरे‑धीरे चलता।
एक दिन जंगल में सब जानवरों ने खेल रखा। खरगोश, हिरन, बंदर सब दौड़ने लगे। राजू भी चला, पर वह एक बूढ़े कछुए के साथ धीरे‑धीरे कदम बढ़ाता रहा।
खेल खत्म हुआ। सब जानवर हँसते‑खेलते आगे निकल गए। किसी ने राजू से पूछा:
“तू हमेशा पीछे क्यों रहता है?”
राजू मुस्कुराया और बोला:
“मार्ग दिखाने वाला अगर सही हो तो पीछे रहने में कोई बुराई नहीं...।।
मैं जीतने नहीं आया हूँ, मैं सही रास्ता दिखाने आया हूँ।”
उस दिन से जंगल के सारे बच्चे जानवर जब रास्ता भूलते, तो राजू उन्हें अपनी प्यारी मुस्कान और शांत चाल से सही दिशा दिखाता।
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🌟 सीख
बच्चों के लिए यह कहानी बताती है कि हर बार आगे दौड़ना ज़रूरी नहीं होता। कभी‑कभी पीछे रहकर दूसरों को रास्ता दिखाना भी बहुत बड़ा काम होता है।
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