चूहा चौकीदार.
चूहा चौकीदार.
“चूहा चौकीदार ”
चंदनपुर गाँव के बीचों–बीच एक पुरानी हवेली थी, जिसके ऊँचे दरवाज़े, टूटी खिड़कियाँ और जालों से ढकी दीवारें उसके वीरान होने की कहानी कहती थीं।
लोग कहते थे कि यहाँ कभी बड़े ज़मींदार रहते थे और उन्होंने कहीं खज़ाना छुपा रखा है, लेकिन, कोई उसके पास जाने की हिम्मत नहीं करता था।
एक दिन उसी हवेली में एक छोटा सा चूहा आ गया। पहले तो सबने उसे मामूली समझा, लेकिन जल्द ही उसने अपनी शरारतों से सबको परेशान कर दिया—कभी रसोई में आटा गिरा देता, कभी मिठाई कुतर लेता, तो कभी पूजा–घर की घंटी बजा देता। धीरे–धीरे लोग उसकी आदत डाल बैठे।
एक रात, जब चारों ओर सन्नाटा था, हवेली का दरवाज़ा धीरे से खुला और एक चोर अंदर घुस आया। उसे उम्मीद थी कि यहाँ छुपा खज़ाना उसे मिल जाएगा।
लेकिन जैसे ही वह आगे बढ़ा, उसका सामना उस छोटे से चूहे से हो गया। चूहे ने बिना डरे उसके पैर पर काट लिया, अनाज के बोरे गिरा दिए और ज़ोर–ज़ोर से घंटी बजा दी।
आवाज़ सुनकर गाँव वाले जाग गए।
चोर घबराकर भागने लगा, लेकिन चूहा उसके पीछे लगा रहा—कभी उसके कपड़े खींचता, कभी उसके थैले में घुस जाता। आखिरकार चोर गिर पड़ा और पकड़ा गया।
तभी उसके थैले से एक पुराना नक्शा गिरा। चूहा उस पर बैठकर उसे खुरचने लगा, और गाँव वालों ने देखा कि उसमें हवेली के तहखाने का रास्ता बना हुआ है।
सबने मिलकर तहखाना खोला। अंदर अंधेरे में पुराने संदूक रखे थे। जब उन्हें खोला गया, तो उनमें सोने के सिक्के, चाँदी के गहने और कीमती रत्न चमक उठे।
सब हैरान रह गए और हँसते हुए बोले कि यह चूहा तो चौकीदार ही नहीं, खज़ाना खोजने वाला भी निकला।
उस दिन के बाद से चंदनपुर की हवेली का नाम पड़ गया—
“ खज़ाना हवेली और चूहा चौकीदार ”।

