Sajida Akram

Horror


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Sajida Akram

Horror


"रूमी गुड़िया"

"रूमी गुड़िया"

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हम लोग देहरादून के सरकारी क्वार्टर में रहतें थे, हमें कई साल हो गए उस एरिया में रहते हुए । बहुत ही सुनसान और खौफनाक था ,..... शी..शी... कोई है ऐसा महसूस होता था ।

दिन में भी निकलने में हमें डर लगता था । पूरा एरिया घने जंगलों से भरा पड़ा था , मेरे बच्चे छोटे थे और पति का टूरिंग जाब था , फारेस्ट आफिसर्स थे,

आकाश टूर पर चले जाते तो रात में भयानक झिंगूर की सीटी बजाती आवाजें और सियारों की रोने की आवाजें रात के माहौल को खौफ़नाक बना देती , 

हमारे यहाँ का काम करने के लिए पास के गाँव से दोनों पति और पत्नी आते थे।, मैंने उन दोनों को आकाश से कहकर अपने क्वार्टर के पीछे सर्वेन्ट क्वार्टर में रखने का बोला, मेरी सोच थी कि आकाश के टूर पर होने से मुझे हिम्मत रहेगी ।सुखी और हरिया पति-पत्नी थे। दोनों बहुत ही अच्छे स्वभाव के थे ।हम अक्सर शाम की चाय अपने लान में बैठ कर पीते थे बच्चे वहीं खेलते या साइकिल चलाते ।हरिया ने गार्डन बहुत अच्छा तैयार कर दिया था । वो ख़ुशनुमा शाम को एक ऐसी घटना घटी के हम दोनों के दहशत से रोंगटे खडे़ हो गए ।


हुआ यूँ कि बच्चे साइकिल चला रहे थे ,कि एक जगह साइकिल का पिछला पहिया रुक गया , वो चीज़ थी एक कांच की गुड़िया बड़ी डरावनी सी मिट्टी में दबी थी साइकिल की वजह से बाहर दिखने लगी थी ।कुछ देर बाद अंदर आ गए हमनें उस गुड़िया को वहीं छोड़ दिया , जैसे रात गहराई बच्चों को सुलाने के बाद मैं वाशरूम गई तो सिंक के पास वहीं गुड़िया रखी थी मैं हतप्रभ थी घबरा कर बेडरूम में आई तो आकाश खराटे मार कर सो गए थे।

आकाश को उठा कर बताया तो वो कहने लगे "अरे सो जाओ बच्चे उठा लाएं होगें, सुबह फेंक देंगे ,करवट बदल कर सो गए ।"

गुड़िया ने तो रात में वो तांडव मचाया कि मत,पूछो बच्चों के कमरे से आती चींखों कि आवाजें आई तो हम दोनों भागे क्या देखतें हैं कि बेटे को दीवार पर लटका दिया है और बेटी डर से थरथर कांप रही है । आकाश ने बेटे को उतारने के लिए हाथ बढाया तो आकाश को दूर उछाल दिया उस गुड़िया ने....

हम दोनों ने उस गुड़िया से हाथ जोड़कर पूछा "हम से या बच्चों से कोई गलती हो गई है क्या..... ?" 

गुड़िया के ठहाके गूंजने लगे भयानक वाले हमने फौरन बच्चों को लिया सुखी और हरिया के पास गए और सब बताया दोनों कहने लगे "साहब, बीबी जी वो बहुत पुरानी बात है फिर बताएंगे ,अभी तो हमें गाँव में तांत्रिक है वो झाडफूंक करतें हैं वहां चलते हैं" हमने गाड़ी निकालने की कोशिश की तो पंक्चर थी ।

कांच की गुड़िया के ठहाके गुंजने लगे थोड़ी देर में बहुत दूर से आवाज़ें सुनाई दी , "मैं फिर आउंगी"

वो रात हमने जैसे- तैसे काटी जाग कर के वो फिर ना लौट आए,दूसरे दिन तांत्रिक को बुलाया उसने कुछ मंत्र पढ़े और ध्यान लगा कर देखा । आकाश से हाथ जोड़कर कहा "साहब हम कुछ नहीं कर सकते।आप ऐसा करो यहाँ से 100 किलोमीटर पर एक बुजुर्ग बाबा साहेब रहतें है ।बहुत इबादत करने वाले है शायद वहीं कुछ कर पाएं।"

अब तो हमारे यहाँ बहुत ही भयानक हादसे होने लगे कभी कपड़ो में आग लग जाती, कभी बच्चे खूब रोने लगते किसी हाल चुप नहीं होते । एक दिन तो हम लोग पूजा कर रहे थे की घर की बत्तियां जलने बुझने लगी ।हम लोग तांत्रिक के साथ उस कुटिया पर गए बाबा साहेब ने सब सुना और ध्यान लगाने पर उन्होंने सब देख लिया, आकाश और मुझसे कहा कि आपने उस की जगह पर कुछ खुदाई करवाई थी हमें तो ऐसा कुछ याद नहीं आया ।

बाबा साहेब ने कहा ठीक है "अभी तो आप लोग ये ताविज़ ले जाओ घर की चौखट पर बांध देना "गुरुवार को हम आएंगे आपके घर पर फिर उसका बंदोबस्त कर देंगे ।"

अब तक समझ में आ गया था वो कोई मामूली कांच की गुड़िया नहीं है ,कोई शापित आत्मा का वास है उसमें....



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