"रहस्यमयी प्रेम का अभिशाप"
"रहस्यमयी प्रेम का अभिशाप"
### भूमिका:
कहानी एक ऐसे व्यक्ति की है जिसे समाज ने ठुकरा दिया है, जिसका दिल टूट चुका है, और जिसका आत्मविश्वास मानो समाप्त हो चुका है। उसे सबने इतना अपमानित किया कि वह खुद को एक बोझ समझने लगा। एक रात, जब उसकी हताशा चरम पर थी, वह जंगल की ओर निकल पड़ा। घना अंधेरा, ठंडी हवा, और चारों ओर सन्नाटा उसे कहीं दूर ले जाने लगा। परंतु उसे पता नहीं था कि उसकी यह यात्रा उसे कहाँ तक ले जाएगी और कैसी परछाइयों से उसका सामना होगा। यही वह रात थी जब उसकी मुलाकात एक भूतनी से होती है, जो उसकी ज़िन्दगी में ऐसे रंग भरती है जो उसने कभी सोचे भी नहीं थे।
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### कहानी:
#### **अधिकारहीन और अकेला**
रघु एक साधारण इंसान था, लेकिन उसकी ज़िन्दगी उतनी ही कठिनाइयों भरी थी। उसे अपने गाँव के लोग उसके किसी पुराने अपराध के कारण मानो भूल चुके थे। किसी पराए की तरह उसे गाँव के हर घर से निकाल दिया गया था। कोई उससे बात नहीं करता, कोई उसे अपने पास बैठने नहीं देता था। यहाँ तक कि जिन दोस्तों ने कभी साथ दिया था, वो भी अब पराए हो चुके थे। आखिरकार, एक दिन समाज के तानों और उपहास से तंग आकर रघु ने खुद को अकेले जंगल की ओर निकलने का फैसला किया।
#### **रहस्यमयी भूतनी की मुलाकात**
जंगल के अंदर चलते-चलते वह एक नदी के किनारे पहुँचा। उसकी आँखों में थकान थी, परंतु उसके मन में एक अजीब सा आकर्षण भी था। उसे ऐसा लगा जैसे कोई उसकी ओर खींच रहा हो। अचानक, उसकी नज़र सामने पड़ी जहाँ एक आकर्षक स्त्री खड़ी थी। उसकी आँखें चमक रही थीं, चेहरा पर एक रहस्यमयी मुस्कान थी। यह कोई और नहीं, बल्कि एक भूतनी थी, जो अपनी अलग ही दुनिया में अकेली थी।
भूतनी ने बिना कुछ कहे ही रघु की ओर हाथ बढ़ाया। रघु ने भी बिना सोचे-समझे उसका हाथ थाम लिया, जैसे कोई आत्मा उसे बाँध रही हो। उसकी आँखों में एक गहरी करुणा और प्रेम था, जैसे उसे देखकर उसे भी एक साथी मिल गया हो।
#### **प्रेम का जादू**
धीरे-धीरे भूतनी ने रघु को अपने प्यार में ऐसा बाँधा कि वह दिन और रात उसके ख्यालों में खोया रहने लगा। वह उसे अपने सोने के महल में ले गई, जो एक अद्भुत संसार था। यहाँ वह हर उस सुख को अनुभव कर रहा था जिसे उसने सिर्फ कहानियों में सुना था। महल में सोने के चमकते हुए कक्ष थे, हर जगह सुंदरता की गूंज थी। उसकी शादी उस भूतनी के साथ हो गई और वह उसे एक रानी की तरह रखती थी।
#### **दुल्हन की सेज और अमृत तुल्य भोजन**
भूतनी ने उसके लिए एक सुंदर सेज सजाई। बिस्तर पर मखमली चादरें और सुगंधित फूल बिछे हुए थे। चारों ओर महकती खुशबू उसे एक अलग ही दुनिया का अहसास करा रही थी। खाने में स्वादिष्ट पकवान, मिठाईयाँ, और अमृत जैसा पेय था जिसे पीते ही उसे एक अलग ही ताजगी का अनुभव होता। वह रोज़ भूतनी के प्रेम में गहरा डूबता चला गया और हर दिन उसे किसी नए सुख का अहसास होता।
#### **एक असमाप्त प्रेम का बंदी**
रघु का बाहरी दुनिया से सम्पर्क पूरी तरह से कट चुका था। वह अपने इस नये संसार में ही खुश था। उसे पता नहीं था कि उसका जीवन एक भ्रम में जी रहा है। यह प्रेम का ऐसा जाल था जिससे वह कभी बाहर नहीं आ सकता था। धीरे-धीरे उसे यह समझ में आया कि यह कोई सामान्य जीवन नहीं था, बल्कि एक अनंत प्रेम के बंधन में बंध कर वह एक अनंत रात में फँस चुका है।
कहानी का अंत ऐसा है जहाँ रघु को यह एहसास होता है कि वह हमेशा के लिए एक ऐसी दुनिया का बंदी बन चुका है जहाँ से निकलने का कोई रास्ता नहीं है।

