### **मधुमक्खियों का करिश्मा** *लेखक: सोनू गुप्ता*
### **मधुमक्खियों का करिश्मा** *लेखक: सोनू गुप्ता*
किसी गांव में एक व्यक्ति रहता था, जो शारीरिक रूप से कमजोर था और गरीब भी। उसके माता-पिता उसका ख्याल रखते थे, लेकिन उसके भाई-बहन और अन्य रिश्तेदार उसकी परवाह नहीं करते थे। माता-पिता को भी इस बात का दुख था, मगर वे मजबूर थे।
एक दिन माता-पिता किसी जरूरी काम से बाहर गए और उसे उसकी चचेरी बहन के सहारे छोड़ गए। वह बहन, जो पहली नज़र में दयालु लगती थी, असल में बेहद निर्दयी थी। उसका पति भी क्रूर स्वभाव का था। कुछ दिनों तक तो सबने उस व्यक्ति का ख्याल रखा, लेकिन समय के साथ उनका असली स्वभाव सामने आने लगा।
वे लोग उसके सामने अच्छा खाना बनाते और खुद खा लेते, जबकि वह भूखा रह जाता। जब उसने विरोध किया, तो उसे खूब डांट पड़ी। उसकी बहन और उसके पति ने उसे तिरस्कृत कर कहा, "तुम जैसे हो, वैसे ही पड़े रहो। तुमसे कोई काम तो होता नहीं, तो हम क्यों तुम्हारा ख्याल रखें?"
एक दिन बात इतनी बढ़ गई कि उसके जीने की उम्मीद ही खत्म हो गई। उसकी बहन और बहनोई ने उसे घर की छत पर ले जाकर मारना शुरू कर दिया। उस छत पर मधुमक्खियों का बड़ा सा छत्ता था। उन्होंने सोचा कि मधुमक्खियां उसे काट लेंगी और उनकी समस्या खत्म हो जाएगी। मारने-पीटने के बाद उन्होंने उसे वहां छोड़ दिया।
लेकिन प्रकृति ने उस कमजोर व्यक्ति के लिए कुछ और ही योजना बनाई थी। थोड़ी देर बाद, जब वह दर्द से कराह रहा था, तो उसने महसूस किया कि मधुमक्खियां उसके पास मंडरा रही हैं। पहले तो उसे डर लगा, लेकिन फिर उसने देखा कि मधुमक्खियां उसके घावों पर शहद डाल रही थीं। यह शहद उसके घावों को भरने लगा और धीरे-धीरे उसकी भूख भी मिटने लगी।
वह यह देखकर दंग रह गया। मधुमक्खियां उसके प्रति दयालु थीं और उसकी मदद कर रही थीं। कुछ समय में वह व्यक्ति पूरी तरह से ठीक हो गया। यह सब देखकर उसकी बहन और बहनोई को गुस्सा आया। वे फिर से उसे मारने के लिए आए, लेकिन इस बार मधुमक्खियां उनकी रक्षा के लिए तैयार थीं।
जैसे ही उन्होंने उस व्यक्ति पर हमला करने की कोशिश की, मधुमक्खियों ने उन पर धावा बोल दिया। उनके डंक से दोनों इतने घायल हो गए कि दर्द के मारे वे वहां से भाग गए। गांव वालों ने यह सब देखा और उस गरीब व्यक्ति के साहस और मधुमक्खियों की करुणा से बहुत प्रभावित हुए।
गांव के लोग मधुमक्खियों की इस अनोखी दयालुता को समझ गए। उन्होंने फैसला किया कि मधुमक्खियों को भगाने के बजाय वे उनका ध्यान रखेंगे। उन्होंने मधुमक्खियों के लिए हर दिन गुड़ का घोल देना शुरू किया। मधुमक्खियां और भी खुश होकर शहद बनाने लगीं, जिससे गांव के लोगों की जिंदगी बेहतर होने लगी।
कुछ समय बाद उस व्यक्ति के माता-पिता वापस लौटे। उन्होंने जब यह सब देखा तो उनकी आंखों में आंसू आ गए। उन्होंने अपनी बेटी और दामाद को गांव से निकाल दिया। अब वह व्यक्ति मधुमक्खियों की मदद से अपनी जिंदगी अच्छे से जीने लगा।
गांव के लोग अब मधुमक्खियों को देवदूत मानते थे। हर घर में मधुमक्खियों के लिए गुड़ का घोल रखा जाने लगा। मधुमक्खियां गांव की खुशहाली का प्रतीक बन गईं। इस घटना ने पूरे गांव को यह सिखाया कि प्रकृति के साथ तालमेल बनाकर चलने में ही असली सुख है।
**मधुमक्खियां सिर्फ शहद ही नहीं देतीं, बल्कि इंसानियत का संदेश भी देती हैं।**
