"खिलौनों की भूतिया नगरी"**
"खिलौनों की भूतिया नगरी"**
ये कहानी है एक ऐसी नगरी की, जो शहर की अद्भुत दुनिया में बसती है। यहां केवल खिलौने ही नहीं, बल्कि भूत, प्रेत, चुड़ैल और आत्माएं भी मौजूद हैं। लेकिन डरने की बात नहीं, क्योंकि ये सब सिर्फ मौज-मस्ती और मजाक में ही सही हैं। यह नगरी आपके लिए इतनी अद्भुत है कि यहां छोटे-छोटे, इंसान और आत्माएं सभी कलाकारों से जुड़ी हैं और हंसी-खुशी के भावुक कलाकार हैं।
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### **खिलौनों की नगरी का निर्माण**
इस नगरी में शोरूम की अलग-अलग दुकानें हैं। हर खिलौना किसी न किसी भूतिया कलाकार का बनाया हुआ है। कोई खिलौना लकड़ी से बना हो, तो कोई प्लास्टिक, कांच या लोहे से। यहां के सबसे प्रसिद्ध खिलौने हैं:
1. **शहर (व्हिसल):**
- विच "शीतला" प्लास्टिक की सिटी बनी है, जो नीले और लाल रंग में होती है।
- लोहे की सिटी बनाना भूत "मंगल" का काम है, जो चमचमाती और गहरी सुरों में बजती है।
- "मोगरा" नाम का प्रेत बांस की सिटी बनाती है, जो जंगल के मधुर संगीत की याद दिलाती है।
2. **गा पौधा:**
- "तारा चुड़ैल" लकड़ी का अधिष्ठापन है, जिन पर फूलों की सुन्दर रचना होती है।
- "बजरंगी भूत" लोहे और प्लास्टिक से इलेक्ट्रॉनिक कारखाने हैं, जो चमचमाती रोशनी छोड़ते हैं।
- "नंदिनी आत्मा" हाथ से बनी मिट्टी की छोटी-छोटी साज-सज्जा है, जिसे देखकर हर कोई बचपन में लौट आता है।
3. **गुड़िया और कठपुतली:**
- "कमला चुड़ैल" रंग-बिरंगी गुड़िया गुड़िया हैं, जो हर बार अलग-अलग गाने गाती हैं।
- "राजन भूत" काठ की कठपुतली बनी है, वृत्तांत कहानियों में हर कोई रोमांचित हो जाता है।
4. **गेंद:**
- "पन्ना आत्मा" रबड़ की गेंद है, जो उछलकर आकाश को दिखाई गई है।
- "जोगिंदर प्रेत" लोहे की गेंदें बनाती हैं, जो अच्छी हैं भारी हैं, पर खेल में बहुत मज़ा आता है।
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### ** का मैदान**
नगरी का केंद्र एक बड़ा खेल का मैदान है। रात को जब चांद-तारे और आकाश के तारे नजर आते हैं, तब यह मंडप के हंसी-खुशी के रंग में डूब जाता है।
- **भूत प्रेत और चुड़ैल का खेल:**
- "माया चुड़ैल" लकड़ी की गाड़ी लेकर रेस में भाग लेने की योजना है।
- "भैरव भूत" अपनी लोहे की गाड़ी लेकर तेज़ गति से दौड़ता है।
- "परी आत्मा" रंगीन गुड़िया लेकर उनके साथ नाचती है।
यहां तक कि बड़ी बोतलें भी खुद को रोक नहीं पातीं और गेम में शामिल हो जाती हैं।
- "चंद्रकांत आत्मा," जो 200 साल की बूढ़ी प्रेत है, गेंद के साथ फुटबॉल खेलती है।
- "रजनी विच," जो हमेशा डरावनी दिखती है, कठपुतली के शो में मास्टरप्लान का निर्माण होता है और बच्चे हंसते हैं।
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### **रोमांचकदृश्य**
इंसानों को भूतों की ये मजेदार तस्वीर देखने को मिलती है। जो लोग यहां आते हैं, वे डंग रह जाते हैं।
- एक बार "रवि" नाम का इंसान अपनी बेटी को लेकर आया। उसने देखा कि बच्चों को चुड़ैलें और आत्माएं सिखाती रहती हैं कि वे कैसे खिलौने बनाते हैं।
- "गीता आत्मा" बच्चों को मिट्टी से खिलौने बनाना सिखाया जाता है।
- "जोगी भूत" इंसानों को लोहे के खिलौने बनाने के उपकरण देता है।
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### **नागरी का संदेश**
इस नगरी का उद्देश्य केवल मौज-मस्ती नहीं है, बल्कि यह सिखाया जाता है कि उम्र कम करना भी कोई हो, खेल का आनंद सबके लिए लेना जरूरी है। यहां बड़ी-बड़ी कंपनियों की टीमें लगती हैं और अपने बचपन की यादें लौट आती हैं।
यह नगरी हमें यह भी सिखाती है कि डरावने दिखने वाले भूत, प्रेत और चुड़ैल को भी हंसना-मुस्कुराना जानते हैं। हमें इस संदेश में कहा गया है कि हंसी और खुशी का कोई रूप नहीं होता।
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### **अंतिम नजारा**
जब रात खत्म हुई और सूरज निकला, तो भूत, प्रेत और चुड़ैल-अपने-अपने खिलौने गायब हो गए। लेकिन इंसानों के दिलों में इस नगरी की याद हमेशा बस रहती है। हर कोई इस रोमांचक अनुभव को कभी नहीं भूलता।
यह हर उम्र के लोगों के लिए फिल्में है कि खिलौने और खेल केवल बच्चों के लिए नहीं हैं, बल्कि हर इंसान के जीवन में खुशियां और उल्लास का जरिया हैं।
**---समाप्त---**

