प्रदूषण की सजा
प्रदूषण की सजा
रात का दोस्त गहरा था। दिल्ली के एक रेलवे स्टेशन पर, एक रेलवे स्टेशन से रुकी हुई है। भीड़भाड़ भरी इस दुनिया में लोग स्टेशन पर उतरते हैं, और कुछ ऐसा करते हैं जो उन्हें नहीं करना चाहिए—साल्टिक की बोतलें फेंकना, कूड़ाघराना। एक आदमी ने अपनी पानी की बोतल वाली ट्रेन से बाहर नकली और हंसते हुए अपने दोस्तों से कहा, "अरे यार, इतनी बड़ी दुनिया है, इससे क्या दिखता है!"
लेकिन उस रात धोखा हो गया।
जैसे ही वह आदमी स्टेशन से बाहर जाने लगा, उसके चारों ओर एक अजीब सी ठंडक छा गई। स्टेशन के पुराने पेड़ की प्रजाति के पास से सफेद प्लास्टर में एक भूतनी दिखाई दी। उसकी आँखें जलती हुई अंगारों जैसी थीं और बाल शैली की लहरों की तरह हवा में उड़ रहे थे। वह आदमी डरकर पीछे की ओर चला गया, लेकिन उसका पैर जमीन में चिपक गया।
घोस्टनी ने कैथोलिक स्वर में कहा, "क्या हथियार लगता है कि एक बोतल से कुछ नहीं बचेगा? हर बोतल हमारे पानी को जहर बना रही है। अब हथियार इसकी सजा देगा!" उसने अपनी लंबी उंगली उठाई, और उसने प्लास्टिक की बोतल तुरंत मिट्टी की बोतल में बदल दी। आदमी की बोतल का ठंडा पानी भर दिया गया।
भूतनी ने कहा, "यह लो।"
उस आदमी ने सिर हिलाकर बोतल को अपने साथ ले लिया।
### **चिमनियों का धुआं और भूत**
दिल्ली के पास एक मसाला थी, जो अपने निशान से आसमान को काला कर रही थी। हर रात, वहाँ से घना डायनासोर था, जहाँ आस-पास के लोग बीमार पड़ रहे थे। लेकिन एक रात, फ़ैमिली के मालिक को अजीब सपना आया। स्वप्न में उसने देखा कि उसकी माल के चारों ओर काले प्रेत रखे हुए हैं।
उनमें से एक ने कहा, "हम वही हैं जो जहरीला जहर बनाया गया है।" दूसरे ने गार्गेट ने कहा, "अब समय आ गया है कि तुम अपनी चिमनियों पर फिल्म लगाओ। अगर ऐसा नहीं किया, तो हर बार चिमनियों से जो धूम्रपान निकालता, वह घर तक आ जाती है और सांस रोक लेती है।"
सपना इस्माइलो था कि सुपरमार्केट के मालिक ने अगली सुबह तुरंत निर्णय लिया कि वह अपनी चिमनी प्लांट्स प्लांटगा पर है। वह केवल स्मोक कम नहीं करेगा, बल्कि आसपास के लोगों को मुफ्त मास्क और पेड़ों के बीज भी बांटेगा।
### **नदी की चुड़ैलें और जल प्रदूषण**
यमुना नदी के किनारे एक गाँव था। वहां के लोग नदी को प्यासा करने के लिए कचरा और मूंगफली का गंदा पानी बहाते थे। एक रात, नदी में हरी रोशनी और तीन चुड़ैलें दिखाई दीं। उनका पानी जैसा साफ और चमकीला लुक था, लेकिन उनका लुक बिल्कुल वैसा ही था।
उन्होंने गांव के मुखिया को जगाया और कहा, "हम नदी की आत्माएं हैं। हमारे पानी को भिक्षु बना दिया है। अब हमारी बारी है।" अगली सुबह, पूरे गाँव को अपने कुएँ और आलू से गेहूँ का पानी ही शौक़ीन दिखाएँ। जब गांववालों को मुफ्त सुविधाएं और नदी-सफाई की सुविधा मिलने लगी, तो धीरे-धीरे उनका पानी फिर से साफ होने लगा। चुड़ैलों ने कहा, "अगर तुमने नदी को फिर से बर्बाद कर दिया, तो गांव से पानी पूरी तरह से गायब हो जाएगा।"
### **प्रदूषण से आरंभ का पाठ**
ये घटनाएँ धीरे-धीरे पूरे देश में फैल गईं। लोग डर के मारे प्लास्टिक प्लास्टिक बंद करने लगे। रेलवे ने ब्रिटेन में मिट्टी की बोतलें बेच दी, फैक्ट्रियों ने अपनी चिमनियों को साफ कर दिया, और नदियों को बचाने के लिए हर गांव में सफाई अभियान चलाया।
प्रेत और चुड़ैलें अब भी जगह-जगह मौजूद हैं, लेकिन अब वे हर जगह नष्ट नहीं हो रहे हैं। वे चमकती हुई हवा, पानी और मिट्टी को पकाएं और लोगों के प्रयास से जुड़ें।
लेकिन अगर कोई ग़लती करता है, तो वे उसे देर से सज़ा नहीं देते। क्योंकि प्रकृति के संरक्षण के लिए अब और अन्याय करने की तैयारी नहीं थी।
**"जैसे हर बुरी चीज का अंत होता है, वैसे ही प्रदूषण का भी अंत होगा, लेकिन केवल तब, जब हम सब मिलकर काम करेंगे। अन्यथा, प्रकृति की सजा से कोई बच नहीं पाएगा।"**

