"मकर संक्रांति की रात: पतंगों का भूतिया मेला"**
"मकर संक्रांति की रात: पतंगों का भूतिया मेला"**
इसकी शुरुआत एक छोटे से गांव के किनारे के उस पुराने वीरान मैदान से होती है, जहां हर साल मकर संक्रांति के दिन मेला लगता था। यह मेला सिर्फ इंसानों के लिए नहीं था, बल्कि रात ढलने के बाद वहां कुछ और ही दिलचस्प चीजें बिखरी हुई थीं। यह रात भूत-प्रेतों, चुड़ैलों और अनदेखे अदृश्य सपनों का त्योहार भी था। दिन भर तो गाँव के लोग पतंगें उड़ाते, पकवानों का स्वाद लेते, और बाज़ार में खरीदारी करते थे, लेकिन जैसे ही सूरज ढलता है, यह मेला अपने वास्तविक रूप में बदल जाता है।
शाम होते ही आकाश का रंग गहरा नीला हो गया। धीरे-धीरे अनमोल हवा के साथ किसी के आने का एहसास हो रहा था। पीपल के पेड़ के नीचे अचानक से सफेद साया दिखाई दिया। उसके पास ही एक लंबी काली चुड़ैल अपनी तिरछी हँसी हंसते हुए बोल पड़ी, "अरे, आज तो पतंगबाज़ी का दिन है, कोलम आकाश में रंग बदलते हैं।" पास ही बाकी भूत, प्रेत, और आत्माएं अपनी अदृश्य पतंगों को तैयार करने के लिए। उनकी पतंगे लाल, काले, और नारंगी रंग में जगमग कर रही थी। हवा में घूमने लगे, मानो उन पतंगों में किसी जादुई शक्ति का संचार हो रहा हो।
**चुड़ैलें और साज़िशों की शुभकामनाएं**
वहीं मैदान के पास एक पुरानी हवेली के अंदर चुड़ैलों की टोली का अपहरण था। वे रसोई में अच्छे-अच्छे व्यंजन बनाती रहीं। कोयले का स्टॉक, खून के पकौड़े, और क्वार्टर का तिलवा ही, कच्चे ही से डंठल निकल रही थी। एक चुड़ैल ने अपनी लम्बी नुकीली टाइल से तिल के लोभ और चककर बोली, “अरे, आज तो मजा आ गया!” ये लोधी अविश्वास गजब के हैं।” और फिर सबने मिलकर इन बर्तनों को चखा।
**शॉपिंग और सजावट का पैगाम**
अचानक, सबने ये तय किया कि आज तो बाज़ार में भी घूमना चाहिए। सबने अपने-अपने पुराने फ़तेह-चिथड़े फ़्लोट्स को शैतानी शक्ति से रंग-बिरंगे चित्र में बदल लिया। जैसे ही वे बाज़ार पहुँचे, वहाँ अजीब सा समुद्र बन गया। भूत और प्रेतों ने बाजार की छोटी-छोटी गाड़ियों से तिलकुट, गज़क, और पापड़ियाँ बनाईं।
मंडी में एक लंबे समय तक चलने वाले प्रेट ने मिठाई की दुकान से तूफ़ान गुलाब जामिन का प्याला उठाया और चाव से खाया। उन्होंने कहा, "यह तो अद्भुत स्वाद है!" पास ही एक चुड़ैल ने इमली का पना और बादाम का हलवा खरीद लिया।
**रोमांटिक शाम का कार्यक्रम**
रात में ठंड बढ़ रही थी, और हवा में ठंडी ठंड बढ़ रही थी। आकाश में पतंगों की अदृश्य डोरें चलती रहीं। वे पतंगें आपके साथ टिमटिमाते नामांकित जैसी रोशनी वाली जगह, जो रोमांटिक रोमांटिक बनी रही थी। भूत-प्रेत एक-दूसरे को प्यार करते हैं, भारी संबंधों से देखते हैं और हंसते-खिलखिलाते हैं। एक युवा आत्मा ने हाथ में एक गुलाब लेकर एक सुंदर प्रेतनी को दिया, जिसने उसे एक ओर देखा था। दोनों ने हाथ से पेंट की हुई रात भर पतंग उड़ाई और मिठाइयों का स्वाद लिया।


