* *पाप और न्याय का तराजू*
* *पाप और न्याय का तराजू*
### भूमिका
हमारी दुनिया में कई तरह के लोग बसते हैं। कुछ ऐसे हैं, जो न्याय और सत्य की राह पर रहते हैं, और कुछ ऐसे हैं, जो अपने स्वार्थ, लालच और अहंकार में किताबों का हक छीनते हैं और पाप करने से भी असफल नहीं होते। यह कहानी उन पापियों की है, जो लेखकों की बहू-बेटियों को बहला-फुसलाकर अपना जीवन स्थिर कर देते हैं। यह उन राक्षस लोगों की भी है, जो देवी-देवताओं के नाम पर निरीह मश्वरे का बलिदान कहते हैं, जो अपने कुकर्म छुपने का प्रयास करते हैं। यह कहानी समाज के गिरोह पर एक कड़ी प्रहार है और सत्य की विजय का संदेश देता है।
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### *अधर्म का उदय*
एक छोटे से गाँव में रहने वाला राघव एक मेहनती और ईमानदार किसान था। उनकी पत्नी सुमन गांव भर में अपनी हवेली और सज्जनता के लिए जानी गई थीं। लेकिन गांव के सरपंच का बेटा विशाल, जो सत्ता और धन के मद में चूर था, सुमन पर बुरी नजर थी। विशाल ने राघव को टूटे हुए जानवर दिए सुमन को बहकाने और अपने दलदल में फंसाने की योजना बनाई।
विशाल ने सुमन को कई तरह के सपने दिखाए, धन-दौलत और ऐशो-आराम का लालच दिया। लेकिन जब सुमन ने अपनी बात मनमाने ढंग से नहीं कही, तो उसने जबरदस्ती उसे उठाने की कोशिश की। इस पापी कृति में विशाल के साथ गांव के कुछ घटिया लोग भी शामिल थे। जब राघव ने इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई तो पूरा गांव विशाल के साथ खड़ा हो गया। राघव और सुमन अकेले पड़ गए।
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### *बलि का खेल और पाखंड*
गांव में हर साल देवी के मंदिर में बकरे की बलि दी जाती थी। इस बलि को "देवी की कृपा" प्राप्त करने का उपाय माना जाता था। लेकिन सच तो यह था कि बलि के नाम पर गांव के घटिया लोग अपने पाप धोने का प्रयास करते थे। विशाल और उसके साथियों ने देवी के मंदिर में हर्षोल्लास के साथ बलि दी, ताकि उनके पाप छुपे और समाज उन्हें पुण्यात्मा समझे।
गाँव के लोग इन बलिदानियों को देखकर खुश हो जाते थे और सरपंच और उनके बेटे की प्रशंसा करते थे। लेकिन किसी ने यह नहीं सोचा कि सच में देवी-देवता की हत्या से जुड़े अपराध कैसे होते हैं? यह राक्षस, यह अन्याय अंतिम कब तक?
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### *ईश्वर का न्याय*
कुछ समय बाद गाँव में एक साधु का आगमन हुआ। वह एक साधु थे, जो तपस्वी थे, जो सत्य और धर्म की शिक्षा देते थे। उन्होंने गाँव के लोगों को बताया कि बलि और पाप से देवी-देवता प्रसन्न नहीं होते। उन्होंने कहा, "तुमने अभिनेताओं की बहू-बेटियों को चिन्कर और अपराधी अपराधियों की हत्या कर अपने जीवन को पाप के गले में डाल दिया है। ईश्वर का न्याय अटल है। वह इस अधर्म का दंड निश्चित रूप से भुगतेगा।"
कई लोगों ने साधुओं की बातें बताईं, लेकिन कुछ ने आत्ममंथन किया। विशाल और उसके साथियों ने साधु का अपमान किया और उन्हें गांव से भगा दिया। लेकिन कुछ ही दिनों बाद विशाल और उसके साथियों का ईश्वर पर प्रकोप शुरू हो गया। विशाल के घर में आग लग गई, उसकी संपत्ति नष्ट हो गई। उनका स्वास्थ्य खराब हो गया और वह पागल हो गईं।
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### *समाज की शिक्षा*
यह कहानी गांव के बाकी लोगों के लिए एक सबक बन गई। धीरे-धीरे लोगों को समझ में आया कि पाप से बचने का एकमात्र रास्ता सत्य, अहिंसा और धर्म का मार्ग है। गाँव ने बलि की प्रथा को हमेशा के लिए ख़त्म कर दिया। सुमन और राघव ने अपने साहस और सच्चाई से समाज को एक नई दिशा दी।
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### *लेख: अधर्म और पाखंड का अंत*
आज के समाज में ऐसे लोग मौजूद हैं, जो धन और ताकत के बल पर बदमाशों का शोषण करते हैं। वे लेखिका की बहू-बेटियों को अपना शिकार बनाते हैं और अपने पाप छुपाने के लिए धार्मिक आदंबरों का सहारा लेते हैं। देवी-देवताओं के नाम पर बलि देना और अपने पापों को चढ़ाना घोर अधर्म है।
धर्म का सच्चा अर्थ सत्य, अहिंसा और प्रेम है। पाखंड और आदंबर कभी भी ईश्वर को प्रसन्न नहीं कर सकते। जो लोग अभिलेखों के अधिकार छीनते हैं, उन्हें यह लोड करना चाहिए कि ईश्वर का न्याय अटल है। समाज को भी ऐसे पाखंडियों का बहिष्कार करना चाहिए और सत्य की राह पर चलना चाहिए।
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