हरि शंकर गोयल

Tragedy Crime Thriller

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हरि शंकर गोयल

Tragedy Crime Thriller

छल

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इस कहानी में "खून का प्यासा" मुहावरे का प्रयोग किया गया है 


3 जुलाई 2003 का दिन था । मूसलाधार बरसात हो रही थी । थाने में बरसात के कारण अफरा तफरी मची हुई थी । पूरा थाना टपक रहा था । 

"फाइलों को कहां रखें" ? एक अर्दली थानेदार से पूछ रहा था 

"मेरे सिर पर रख दे । ये पूरी तरह सुरक्षित है क्योंकि यह सरकारी भवन नहीं है" थानेदार गुस्से से चिल्लाया । बेचारा अर्दली साहब का रौद्र रूप देखकर भाग गया । थानेदार जालिम सिंह कुछ सोचता कि थाने के रिकॉर्ड को कैसे बचाया जाए , इतने में थाने में एक सरकारी गाड़ी आकर रुकी । सरकारी गाड़ी देखकर सबका ध्यान उधर जाता ही है इसलिए जालिम सिंह का ध्यान भी उधर गया । गाड़ी में से एक खूबसूरत महिला उतरी और सीधा जालिम सिंह के पास आ गई । 

"एक रिपोर्ट लिखानी है" उस महिला के चेहरे से घबराहट साफ झलक रही थी । बरसात से मांग का सिंदूर थोड़ा मिट गया था मगर वह बता रहा था कि महिला विवाहित है । 

"बताइये क्या रिपोर्ट लिखाना चाहती हैं आप" ? 

"मेरे पति राजेश शर्मा वन विभाग में वन अधिकारी हैं । वे कल रात से घर नहीं लौटे हैं" । महिला ने अपनी शिकायत बताई । 


अब जालिम सिंह के चौंकने की बारी थी । वह राजेश शर्मा को जानता था । जिला कलक्टर के यहां मीटिंग में एक दो बार मुलाकात हुई थी । भले अधिकारी हैं । रिपोर्ट लिखाने वाली स्त्री उनकी पत्नी है यह जानकर जालिम सिंह ने उन्हें कुर्सी पर बैठने का अनुरोध किया और अर्दली को एक गिलास पानी लाने को कहा । 


थाने में इस तरह सबका स्वागत नहीं होता है जैसा रेखा शर्मा का हुआ था । रेखा थोड़ी आत्मीयता पाकर बिलख पड़ी । 

"अरे अरे , रोइए मत मैडम । अभी आपकी रिपोर्ट लिखकर साहब को ढूंढने के लिए जमीन आसमान एक कर देंगे हम लोग । आप बिल्कुल चिंता मत कीजिए । लीजिए, चाय पी लीजिए" । जालिम सिंह ने पूरी हमदर्दी दर्शाते हुए कहा । 


रेखा चाय पीने लगी । फिर उसने रिपोर्ट भी लिख दी और थानेदार को दे दी । जालिम सिंह ने रेखा के हस्ताक्षर रजिस्टर में करवाए और कहा 

"आप इसे अन्यथा मत लीजिए मैम । हम कुछ पूछताछ करेंगे जिससे आपके पति को शीघ्र ढूंढा जा सके । उम्मीद है कि आप हमारा सहयोग करेंगी" । रेखा ने सहमति दे दी । 

"राजेश जी कब से घर नहीं लौटे हैं" ? 

"कल शाम को खाना खाकर सामने पार्क में घूमने चले गये थे । बस, उसके बाद लौटे ही नहीं । पहले तो मैं इंतजार करती रही कि अब आयेंगे, अब आ जायेंगे। मगर जब रात के ग्यारह बजे तक भी वे नहीं आये तो मैं ड्राइवर के साथ उन्हें पार्क में ढूंढने गई मगर वहां पर कोई नहीं मिला । फिर मैंने अपने आसपास का सारा मौहल्ला छान मारा मगर शर्मा जी कहीं नहीं दिखे । न जाने धरती निगल गई या आसमान खा गया उन्हें" कहते कहते रेखा फफक पड़ी । 

"देखिए देखिए, रोइये मत आप । थोड़ा धैर्य रखिए मैम । सब ठीक हो जायेगा । ये बताइये कि किसी से उनकी दुश्मनी थी क्या" ? 

रेखा ने इंकार में सिर हिला दिया । 

"ऑफिस में किसी से कोई कहासुनी हुई हो उनकी ? वन विभाग के किसी ठेकेदार या माफिया से" ? 

"मेरी जानकारी में नहीं है साहब । वे तो कभी मुझसे भी नहीं लड़ते थे तो किसी और से क्या लड़ेंगे" ? रेखा सुबकते हुए बोली 

"किसी से कोई प्रेम प्रसंग तो नहीं चल रहा था उनका" ? थानेदार ने संकोच करते हुए पूछा 

"नहीं साहब , वे तो मुझे बेइंतिहां चाहते थे । और मुझे तो याद नहीं है कि उन्होंने कभी किसी लड़की को गौर से देखा भी हो" । रेखा नीची गर्दन किये हुए बोली । 


अब थानेदार सोच में पड़ गया । इनमें से एक भी कारण नहीं है तो फिर और क्या बात हो सकती है ? "कहीं आप दोनों में कुछ झगड़ा तो नहीं हुआ था कल" ? 

"नहीं साहब । वे तो लड़ना जानते ही नहीं थे फिर हम दोनों में झगड़ा क्यों होगा ? 

"कोई प्रोपर्टी को लेकर घर या बाहर के किसी व्यक्ति से कोई केस तो नहीं चल रहा था उनका" ? 

"मेरी जानकारी में तो नहीं है साहब । हमारा किसी से कोई विवाद है ही नहीं तो फिर केस कैसे चलेगा" ? 

"वो तो ठीक है मैडम पर उनका घर से बाहर जाने का कोई तो कारण होगा ? बिना कारण तो कुछ नहीं होता है ना, ये तो आप अच्छी तरह जानती होंगी ? अच्छा , उनका कोई फोटोग्राफ है क्या आपके पास" ? 

"जी, मैं साथ ही लाई हूं" और रेखा ने अपने पर्स में से एक फोटो निकाल कर दे दिया । 

"ठीक है मैडम, हम उन्हें ढूंढने की कोशिश करते हैं । आपको भी अगर कोई सुराग मिले तो हमें अवश्य सूचित करना" । 

"जी, बेहतर है" कहकर रेखा शर्मा वहां से अपनी सरकारी गाड़ी में बैठकर चली गई । 


वन विभाग में हड़कंप मच गया । एक इतना बड़ा अधिकारी कैसे और कहां गायब हो गया ? वह खुद निकला है या उसका अपहरण हुआ है ? अनेक सवाल थे मगर जवाब किसी के पास नहीं था । बात मुख्य मंत्री तक पहुंची तो मुख्य मंत्री ने जिला पुलिस अधीक्षक को सख्त हिदायत दे दी कि उन्हें जल्दी ढूंढें । जिला पुलिस अधीक्षक ने पूरे जिले की टीम को काम पर लगा दिया । आखिर एक बड़े अधिकारी के गायब होने का मामला जो था । सारे पुलिस स्टेशनों में राजेश का फोटो भेज दिया गया जिससे कोई सुराग हाथ लग सके । पिछले दिनों जितनी लावारिस लाशें मिली थी सबका मिलान कर लिया मगर कोई फायदा नहीं हुआ । फिरौती के लिए अपहरण करने वालों को भी टटोला पर वहां से भी कोई सकारात्मक समाचार नहीं मिला । पूरा पुलिस महकमा परेशान था


जनता में भी काफी आक्रोश था और मीडिया भी इसे लेकर बार बार सरकार की कानून और व्यवस्था की लचर होती जा रही व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही थी इसलिए सरकार पुलिस की कार्यवाही से संतुष्ट नहीं थी । मुख्य मंत्री ने पूरे जिले का पुलिस स्टॉफ बदल डाला । 


नये पुलिस अधीक्षक ने नये सिरे से काम करना प्रारंभ किया । राजेश के ऑफिस में सघन पूछताछ की गई मगर कोई क्लू नहीं मिला । राजेश की पत्नी रेखा से भी कड़ी पूछताछ की गई मगर यहां से भी कुछ हासिल नहीं हुआ । आस पड़ौस में भी सब लोगों से पूछताछ की गई लेकिन वहां से भी कुछ हासिल नहीं हुआ । सिर्फ इतना पता चला था कि राजेश शर्मा बहुत अच्छे इंसान थे और वे बहुत नम्र, नेक दिल और बहादुर इंसान थे । किसी ने भी यह नहीं कहा कि वे गुस्सैल थे , भ्रष्ट थे या चरित्रहीन थे । गुत्थी सुलझने का नाम ही नहीं ले रही थी । 


उस घटना को घटित हुए 6 साल हो चुके थे । रेखा अपने दोनों बच्चों को लेकर कभी पुलिस स्टेशन जाती, कभी पुलिस अधीक्षक से मिलती । कभी वन विभाग के अधिकारियों से मिलती तो कभी मंत्रीगणों से मिलती । एक दो बार मुख्य मंत्री से भी मिल चुकी थी वह मगर कहीं से कोई सुराग नहीं मिल रहा था । वह थक हार कर बैठने वाली नहीं थी । सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटना बंद नहीं किया था उसने । उसका दिल कह रहा था कि एक न एक दिन उसका पति राजेश आयेगा और अवश्य आयेगा । उसने अभी उम्मीद का दामन छोड़ा नहीं था । उसकी मांग में सिंदूर अभी भी चमकता रहता था । " जब तक सांस तब तक आस" इस कहावत पर विश्वास करती थी रेखा । वह भगवान के दर पर रोज अर्जी लगाती थी । 


खंडवा जिले में फिर से नये पुलिस अधीक्षक आये थे । नाम था गौतम मिश्रा । रेखा उनसे मिलने गई  

"सर, मेरे पति को गायब हुए लगभग सात साल हो गये हैं । आज तक उनका कोई सुराग नहीं मिला है पुलिस विभाग को । अब आप ही बताइये कि मैं और कितने दिन इंतजार करूं ? मेरे बच्चे पूछते हैं कि हमारे पापा कहां हैं तो मैं उन्हें क्या जवाब दूं ? सात साल से मुझे न तो पेंशन मिली है और न ही तनख्वाह, फिर आप ही बताइये कि मैं अपना और बच्चों का पेट कहां से भरूं " ? कहते कहते रेखा फट पड़ी थी । उसके आंसू भरभराकर गिर पड़े थे । उसका चीत्कार सुनकर पूरा स्टॉफ एस पी साहब के चैंबर में आ गया था । 


एस पी गौतम मिश्रा का दिल भी द्रवित हो गया था । आखिर एक औरत और कब तक सब्र करे ? कोई तो सीमा होगी ? गौतम को यह केस बहुत अनोखा लगा । उसने दो महिला कांस्टेबल बुलवाये और उन्हें कहा "मैडम को एक गिलास पानी पिलवाओ" 

"मुझे नहीं पीना यहां का पानी वानी । मैं यहां कोई पानी पीने नहीं आई हूं अपितु अपने पति की जानकारी लेने आई हूं । ये सुहानुभूति का नाटक करना बंद करो और मेरे पति को तलाश कर मुझे दे दो । मैं आपके आगे हाथ जोड़कर भीख मांगती हूं साहब" । रेखा गौतम मिश्रा के चरणों में गिर पड़ी । 

गौतम मिश्रा विचलित हो गये । महिला अधिकारी को बुलाकर रेखा को सांत्वना देने के लिये कहा और वे इस केस की फाइल पढने लगे । इस केस की फाइल उनके कार्यालय में तफतीश बंद करने हेतु आई थी । सात साल तक पता नहीं चलने पर क्लोजर रिपोर्ट लगा दी जाती है और कोर्ट को भेज दी जाती है । कोर्ट यदि इस रिपोर्ट को मान लेती है तो गायब अधिकारी की मृत्यु होना मानकर उसके विधिक वारिसों को समस्त पैसा दे दिया जाता है और पेंशन चालू हो जाती है । सात साल में बस एक माह ही रह गया था । 


गौतम मिश्रा ने पूरी फाइल पढनी आरंभ कर दी । इस केस की जांच पहले थाने ने ही की थी । जब वह कुछ नहीं कर पाई तो डी एस पी को जांच दी गई । वह भी कुछ नहीं कर पाया तो स्पेशल सेल को जांच सौंपी गई । उससे भी केस हल नहीं हुआ तो जांच क्राइम ब्रांच को दे दी गई । पर दुर्भाग्य कि क्राइम ब्रांच भी ये केस हल नहीं कर सकी । गौतम को लगा कि केस में कोई दम नहीं है । ले देकर शक की सुंई रेखा पर ही जाकर टिकती थी । रेखा से सारी टीमों ने पूछताछ कर ली थी । उसके बयान हर बार एक जैसे ही थे इसलिए उससे अब और पूछताछ करना उचित नहीं लगता था । वैसे भी मीडिया में पुलिस की छवि बहुत खराब बन गई थी । रेखा को गिरफ्तार करना बहुत जोखिम वाला काम था । गौतम ने ठंडे दिमाग से सोचा और तीन कांस्टेबल को बुलाया और उन्हें रेखा के मकान पर निगरानी रखने के लिए कह दिया । उन्हें सख्त हिदायत दी गई कि वे सादे कपड़ों में रहेंगे । "इस तरह निगरानी करो कि रेखा को पता नहीं चल पाये । तीनों जने आठ आठ घंटे की ड्यूटी बांट लो और मुझे सीधे रिपोर्ट करोगे , समझे" 

"यस सर" । 


तीन दिन बाद एक सिपाही ने कहा कि रेखा से मिलने एक व्यक्ति आया था रात में और वह सुबह होने से पहले चला गया था" । 

यह सूचना बहुत महत्वपूर्ण थी । गौतम की मेहनत कुछ काम आने लगी थी । उस पर और गहन निगाह रखने की हिदायत दे दी गई । 

दूसरे दिन उस सिपाही ने बताया कि वह आदमी एक बार फिर आया था । उस आदमी के बारे में पता किया तो वह आदमी रिजवान बताया गया है । 


गौतम ने थानेदार को तुरंत आदेश दे दिया कि वह रिजवान को उठाकर ले आये । थानेदार ने रिजवान को उठा लिया और पूछताछ करने लगा । उधर रिजवान के घरवाले अपने समुदाय के सैकड़ों लोगों को साथ लेकर थाने पर आ गये और थाने का घेराव कर लिया । अतिरिक्त पुलिस बल बुलाना पड़ा । इतने में मीडिया भी आ गया । सरकार और पुलिस पर आरोप लगाने लग गया कि एक सांप्रदायिक सरकार धर्म निरपेक्ष लोगों को नाजायज परेशान कर रही है । गौतम इन बातों से बिल्कुल नहीं डरा और उसने एक टीम रिजवान के घर की तलाशी के लिए भेज दी । रिजवान को पीछे के दरवाजे से ले जाया गया । चूंकि सारा मौहल्ला थाने पर एकत्रित था इसलिए रिजवान के घर की तलाशी लेने में कोई प्रतिरोध नहीं हुआ । तलाशी में कुछ भी नहीं मिला । केवल एक फोटो मिला जो रिजवान के निकाह का था । उस फोटो में एक लड़की बुर्के में रिजवान के साथ थी । उस लड़की की बस आंखें ही दिखाई दे रही थी और बाकी चेहरा बुरके में छुपा हुआ था । गौतम उन आंखों को देखकर थोड़ा चौंका । वे आंखें कुछ जानी पहचानी सी लग रही थी । उसने अपने दिमाग पर काफी जोर डाला मगर उसे कुछ याद नहीं आया । 


रिजवान के बारे में तहकीकात की गई तो पता चला कि वह राजेश शर्मा का ड्राइवर था । इस बात से यह निष्कर्ष निकला कि रिजवान और रेखा के मध्य कोई न कोई बात थी । रिजवान रेखा से मिलने रात में क्यों आता था ? इसकी पूछताछ रेखा से करनी आवश्यक थी । 


गौतम ने रेखा को उठवा लिया । रेखा से पूछताछ की गई तो रेखा बोली "रिजवान उनका विश्वसनीय ड्राइवर था । जब किसी का कोई सहारा नहीं मिला तब रिजवान ही उनकी मदद कर रहा था । चूंकि वह दिन भर ऑफिस में ड्यूटी देता था इसलिए कभी कभी रात में आकर उनके लिए सामान दे जाया करता था । रेखा की कुटाई भी की गई मगर रेखा अपने बयानों से टस से मस नहीं हुई । गौतम परेशान हो गया । वह दूसरे कमरे में चला गया । 


वहां पर रेखा के दोनों बच्चे खेल रहे थे । गौतम को उन बच्चों में क्लू नजर आया । वह उन बच्चों के साथ खेलने लग गया । थोड़ी देर में दोनों बच्चे उससे हिलमिल गये । गौतम ने दोनों बच्चों के लिए विभिन्न प्रकार के पकवान और नमकीन मंगवाये । दोनों बच्चे बहुत खुश हो गये । बड़े बच्चे ने कहा "थैंक्यू अंकल" तो छोटे बच्चे ने कहा "अंकल, मैं आपसे एक बात कहूं तो आप सच सच बताओगे" ? 

"हां बेटे, बिल्कुल सच बतायेंगे । कहो, क्या बात है" ? 

"अंकल, आप हमें रिजवान अंकल से बचा लेना" 


अब चौंकने की बारी गौतम की थी । उसने छोटे बेटे जो कि लगभग आठ नौ साल का था को अपने सीने से लगा लिया और उसके सिर पर हाथ फेरते हुए कहा "हां जरूर बचा लेंगे पर ये तो बताओ कि तुम्हें रिजवान अंकल से डर क्यों लगता है" ? 

"रिजवान अंकल बहुत बुरे हैं । वे मुझे बहुत मारते हैं और कहते हैं कि वे मुझे वहीं पहुंचा देंगे जहां उन्होंने मेरे पापा को पहुंचाया था" । मासूम बच्चे ने बहुत बड़ा क्लू गौतम को दे दिया था । मतलब रिजवान ने राजेश की हत्या कर दी थी । पर क्यों ? ये बात इन बच्चों को पता नहीं थी क्योंकि तब ये बहुत छोटे थे । इसका मतलब है कि रेखा और रिजवान में कोई संबंध पहले से था । जब उसका पता राजेश को चला तब उसकी हत्या कर दी गई और लाश कहीं ठिकाने पर लगा दी गई । 


अचानक गौतम को रिजवान के निकाह की फोटो याद आ गई । उसमें बुरके वाली महिला की आंखें रेखा की आंखों से मिलती जुलती लगीं । अब तो स्थिति साफ हो गई थी मगर कोई सबूत नहीं था । गौतम ने वह फोटो दुबारा मंगवाई और गौर से देखा तो स्पष्ट हो गया कि वह रेखा ही है । उसे उस दिन की रेखा याद आई जो कितना नाटक कर रही थी उसके कार्यालय में । पूरा आसमान सिर पर उठा लिया था उसने । 


उसने रेखा को थाने बुलवा लिया और चार पांच महिला सिपाहियों से उसकी खूब कुटाई करवाई लेकिन उसने मुंह नहीं खोला । पिटते पिटते कई बार बेहोश हो गई मगर वह यही कहती रही कि रिजवान से उसका कोई संबंध नहीं है और राजेश की हत्या न तो उसने की थी और न रिजवान ने की थी । 


गौतम ने रिजवान को फिर से उठवाया और इस बार उसकी अच्छी "खातिरदारी" की गई तो रिजवान टूट गया और उसने राजेश की हत्या करना कबूल कर लिया । रेखा को रिजवान के सामने बैठाकर रिजवान के बयान दर्ज किये गये तब रेखा ने पहली बार जबान खोली 

"रिजवान सरकारी ड्राइवर था और साहब की गाड़ी चलाता था । साहब दौरों में कई कई दिनों तक बाहर रहते थे । पीछे से रिजवान उनका ध्यान रखता था । घर का छोटा मोटा काम कर देता था । बच्चों को खिलाता था । कब वे दोनों पास आ गये, पता ही नहीं चला । एक दिन बहुत तेज बरसात हो रही थी । राजेश दौरे पर थे । बच्चे डर रहे थे तो मैंने रिजवान को घर पर सोने के लिए कह दिया था । उस दिन हम दोनों में पहली बार शारीरिक संबंध बने थे । फिर तो यह सिलसिला चलता गया । 

एक दिन राजेश दौरे पर गये थे तो उस रात रिजवान घर पर ही सो गया । इतने में राजेश आ गया और हम दोनों को आपत्तिजनक अवस्था में देख लिया । वह दृश्य देखकर राजेश पागल हो गया और वह रिजवान को मारने लग गया । राजेश रिजवान के खून का प्यासा लग रहा था । राजेश का रौद्र रूप देखकर मैं डर गई और एक लकड़ी से राजेश के सिर पर पीछे से प्रहार कर दिया । राजेश गिर पड़ा और अचेत हो गया । मैं बहुत घबरा गई थी । राजेश को जब होश आयेगा तब क्या होगा ? वह तो रिजवान को मार डालेगा । मैं रिजवान के बिना रह नहीं सकती थी इसलिए मैंने रिजवान को राजेश को मारने के लिए कह दिया । रिजवान ने एक तार से राजेश का गला घोंट दिया और वह मर गया । फिर रिजवान और उसके भाई उस्मान ने लाश ठिकाने लगा दी " । 


दोनों के बयान कलमबद्ध करने के बाद उस्मान को उठाया गया। उसने बड़ी जल्दी अपना जुर्म कबूल कर लिया । दोनों से जब पूछा कि लाश कहां ठिकाने लगाई तो उनकी बात सुनकर एस पी साहब दंग रह गए । 


नेशनल हाइवे पर पुल बनाने का काम चल रहा था उन दिनों । खंभों के लिये गहरे गड्ढे खोद रखे थे लगभग 18 फुट गहरे । सातवें गड्ढे में राजेश की लाश फेंक दी और उसके ऊपर मिट्टी डाल दी जिससे किसी को पता नहीं चले । उसके बाद उस पर पुल बन गया । 


बड़ी बड़ी क्रेन मंगवाई गई और सातवां पुल खुदवाया गया । लगभग बीस बाइस फुट गहरा गड्ढा खोदना पड़ा तब एक नर कंकाल मिला । वह नर कंकाल राजेश का ही था, इसके लिए डी एन ए जांच करवानी आवश्यक थी । डीएनए जांच रिपोर्ट आ गयी जिससे सिद्ध हो गया कि वह कंकाल राजेश शर्मा का था । इन सात वर्षों में रेखा ने अपना धर्म बदल कर अपना नाम शबनम रख लिया । रिजवान चूंकि पहले से विवाहित था इसलिए रेखा ने उसकी दूसरी बीवी होना मंजूर कर लिया लेकिन उसने छुपकर निकाह किया था । समाज में वह रेखा राजेश शर्मा बनकर ही रह रही थी और मांग में सिंदूर, बिंदी, चूड़ी वगैरह सब पहनकर रह रही थी । अभिनय भी शानदार कर लेती थी वह । मगर सत्य तो एक दिन बाहर आ ही जाता है । 


तीनों पर मुकदमा चला । रेखा और रिजवान को उम्र कैद की सजा सुनाई गई । इसकी अपील उच्च न्यायालय में विचाराधीन है अभी । यह कोई काल्पनिक कहानी नहीं, वरन एक सत्य घटना है जो मध्य प्रदेश के खंडवा की है । रेखा ने अपने पति के साथ छल किया था जिसका अंजाम वह भुगत रही है मगर इस छल में राजेश मारा गया और दोनों बच्चे अनाथ हो गये । एक छल ने एक हंसते खेलते परिवार को तहस नहस कर दिया था । 



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