STORYMIRROR

हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Comedy Action

3  

हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Comedy Action

जलेबी दिवस

जलेबी दिवस

5 mins
9

हास्य व्यंग्य : जलेबी दिवस 

भारत के इतिहास में 8 अक्टूबर, 2024 का दिन हमेशा हमेशा के लिए दर्ज हो गया । इस दिन भारत में जिधर देखो उधर जलेबी की फैक्ट्री खुल रही है । क्या गली और क्या मौहल्ले ! सब जगह जलेबियां बन रहीं हैं । लोगों को पकड़ पकड़ कर जलेबी बनाने की नौकरी पर रखा जा रहा है । किसी को जलेबी पैक करने के लिए डिब्बा बनाने का लाइसेंस बांटा जा रहा है तो किसी को टिस्यू पेपर बनाने के कारखानों के लिए जमीन का आबंटन किया जा रहा है । हरियाणा से जलेबी की जो आंधी चली थी वह भारत को कवर करते हुए अमरीका , आस्ट्रेलिया , जापान से लेकर पूरी दुनिया में फ़ैल गई है । लोग डब्बों में जलेबियां पैक करके अपने रिश्तेदारों को लंदन , पेरिस और इटली भेज रहे हैं । इटली वालों ने अब पास्ता खाना छोड़कर जलेबी खाना शुरू कर दिया है । जलेबी उद्योग से हरियाणा की बेरोजगारी खत्म हो गई है । अब हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक की बेरोजगारी खत्म करने की योजना है । 

चार दिनों में जलेबी की लोकप्रियता आसमान को छूने लगी है । वैसे हमारे यहां खानदानी दल के लोग और उसके चाटुकार कहते आये हैं कि उनके जलेबी बाबा के हाथों में जादू है । वे जिसे चाहें रातों रात प्रसिद्ध कर देते हैं । कभी जलेबी बाबा ने आलू पर अपना हाथ रख दिया था और वह आलू तुरंत सोने में तबदील हो गया था । तब देश में आलू से सोना बनाने की अनेक फैक्ट्रियां खुली थीं और उससे करोड़ों लोग करोड़पति बन गये थे । तभी तो गद्दों से , अलमारी से , छत से नोटों के बंडल आज भी निकलते हैं । 

वैसे जलेबी बाबा "सर्वज्ञानी" हैं । दुनिया में ऐसी कोई बात नहीं जिसका पता जलेबी बाबा को नहीं हो । दाढ़ी के गेटअप में वे लगते भी "बाबा" जैसे ही हैं । वे कभी अर्थशास्त्र पर ज्ञान पेलते हैं तो कभी संविधान पर । उनका "जात - पांत" पर विशद अध्ययन है । कहते हैं कि उनका खानदान पिछली पांच पीढ़ियों से जात पात विषय में चैंपियन बना हुआ है । आजकल जलेबी बाबा सबको जलेबी की फैक्ट्री खोलने का सुझाव दे रहे हैं । 

लोगों में जलेबी की बढ़ती मांग को देखकर कई सारे एक्टिविस्ट सक्रिय हो गए हैं । उन्होंने जलेबी को "राष्ट्रीय मिष्ठान्न" घोषित करने की मुहिम छेड़ दी है । इसके लिए कुछ पश्चिमी देश फंडिंग भी कर रहे हैं । 

खानदानी दल ने तो 8 अक्टूबर को "जलेबी दिवस" घोषित करने के लिए बाकायदा एक आंदोलन छेड़ रखा है । वैसे भी खानदानी दल के पास में पिछले 10 सालों से कोई काम धाम तो है नहीं । राज्यों से भी उसे लतिया कर खदेड़ा जा रहा है तो बेचारे करें तो क्या करें ? आंदोलन ही कर रहे हैं तब से । कभी CAA के नाम पर तो कभी किसानों के नाम पर और कभी हरियाणे की पहलवान छोरियों की अस्मत के नाम पर । इस बार भी उन्होंने जलेबी बाबा के नेतृत्व में (घोषित नेता तो खड़ाऊ बाबा है लेकिन नाम जलेबी बाबा का ही चलता है) खटाखट, सटासट और फटाफट नाम की तीन योजनाओं की घोषणा की लेकिन न तो खटाखट दही जमा , न सटासट पैसे बैंक खाते में जमा हुए और न ही फटाफट नौकरी लगी । 

कहते हैं कि जहं जहं पांव पड़े संतन के तहं तहं बंटाधार । तो जलेबी बाबा के झांसे में आकर जिस राज्य के लोग मूर्ख बन गये और खानदानी दल के हाथों खुद को गिरवी रख दिया , उन राज्यों में अब टॉयलेट टैक्स लगाया जा रहा है । उन राज्यों को खानदानी दल का तोहफा मिला है ये । 

सयाने लोग कह रहे हैं कि जलेबी की फैक्ट्री लगाने का मक़सद यह है कि लोग अधिक से अधिक जलेबी खायें । यदि अधिक जलेबी खायेंगे तो पेट खराब अधिक होगा । यदि पेट अधिक खराब होगा तो टॉयलेट का प्रयोग भी अधिक होगा और यदि टॉयलेट अधिक प्रयोग में आयेंगे तो टॉयलेट टैक्स भी अधिक वसूल किया जाएगा । इसलिए जलेबी और टॉयलेट टैक्स में चोली दामन का साथ है । 

8 अक्टूबर को कुछ ढ़ोल वाले मायूस होकर जाते हुए दिख रहे थे । लोगों ने उनसे उनकी मायूसी का राज जानना चाहा तो उन्होंने कह दिया कि जलेबी में चाशनी कम थी इसलिए जलेबी फीकी रह गई थीं । बेचारे ढ़ोल वालों को न तो पूरे पैसे ही दिये और न जलेबियां खिलाईं" ? 

जनता की बेहद मांग को ठुकराते हुए लेकिन जलेबी बाबा की मांग को मानते हुए सरकार ने 8 अक्टूबर को जलेबी दिवस के रूप में मनाने की घोषणा कर दी । चारों ओर हर्ष के बादल छा गये थे । वोटों की बरसात होने लगी । खानदानी दल में मिठाइयां बंटने लगी लेकिन हर बार की तरह इस बार भी ईवीएम लव जिहाद के चक्कर में पड़कर किसी लफंगे के संग भाग गई । खानदानी दल को मौका मिल गया । वह ईवीएम के बाप चुनाव आयोग पर उंगली उठाने लगा । जब चुनाव आयोग ने डंडा चलाया तो इनको इनकी नानी याद आ गई । 

"ये दुःख खत्म क्यों नहीं होता है बे" ? कार्यकर्ता चिल्लाने लग गये । चारों ओर ईवीएम की चरित्रहीनता के गीत गाए जाने लगे । बेचारी ईवीएम ने शर्म के मारे खुद स्वीकार कर लिया कि वह चरित्रहीन है । 

अब तो ईवीएम खुद ही गाने लग जाती है कि वह चरित्रहीन है इसलिए उससे थोड़ी दूरी बनाए रखें । 

जलेबी बाबा का और कोई योगदान है या नहीं , इस पर गंभीर बहस हो सकती है लेकिन इस पर सब लोग एक मत हैं कि उन्होंने 8 अक्टूबर को सरकार पर दबाव डालकर इसे जलेबी दिवस घोषित करवा दिया है । हरियाणा के हर चौराहे पर जलेबी बाबा की प्रतिमा लगाने का फैसला खानदानी दल द्वारा ले लिया गया है और अगले 5 सालों में ये प्रतिमा हर गली , चौराहे पर लग जाएगी । लोग जलेबी बाबा की पूजा करके जलेबी का भोग लगाकर जलेबियां बांटकर जलेबी दिवस को मना रहे हैं । एक अच्छी शुरुआत के लिए जलेबी बाबा का हार्दिक आभार । 



Rate this content
Log in

Similar hindi story from Comedy