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Akshat Garhwal

Crime Thriller

5  

Akshat Garhwal

Crime Thriller

ट्विलाइट किलर भाग ,,8

ट्विलाइट किलर भाग ,,8

14 mins
455


जो उन सभी ने देखा वह कोई अपराध नहीं था, वह पाप था! वैसे तो इस दुनिया में अपराध और पाप की न तो कोई सीमाएं है और न ही कोई परिभाषा, पर पहर भी कुछ लोगों की नजर में इन सभी के बीच बहुत बड़ा अंतर होता है। उस काली रात में जहां पर चांद खुले आम इस दुनिया को अपनी नजरों से निहार रहा था, उस घुप्प अंधेरे में इंसान की इस करतूत को देख कर गुस्से और घृणा से उसने काले बादलों को अपनी नजरों का पहरा बना लिया। हवा मौसम से ही बहुत ठंडी थी पर उस कार्गो कंटेनर के अंदर के नजारे ने जीप में बैठे हुए हर एक व्यक्ति के रोंगटे खड़े कर दिए थे, नजरें जिस का तिरस्कार करे ऐसे दृश्य को आप क्या कहेंगे?क्या वो बदसूरती कहलाती है?........या उसे गंदगी कहेंगे!

“यह तो........! सर.!” टीना की आंखों से आंसू टपक रहे थे, उसने अपने मुँह पर हाथ रख लिया

वह कंटेनर लड़कियों से भरा हुआ था! सभी के नजरों के सामने 12 से 20 सलल की करीब 50-60 लड़कियां वहाँ उस कंटेनर में मौजूद थी। उनके अंगों पर नाम मात्र के वस्त्र थे तो कुछ के ऊपर एक छोटा सा कपड़ा भी नहीं था। सभी लड़कियों के सर झुके हुए. लंबी बेलो से बाल चेहरे को ढके हुए थे किसी के हाथ और पैर आपस में बंधे हुए थे तो कुछ को कंटेनर में लगे हुए हुक्स से बंधा हुआ था। आंखें रो-रो कर ससोज चुकी थी, पलकों के नीचे काले गहरे धब्बे थे, बदन चिकटा रखा हुआ था, आंखों में सब कुछ साफ था पर उनकी चमक कहीं खो गयी थी....वे खाली थी जैसे अब दिन का उजाला भी न देखना चाहती हो, जैसे अब केवल मौत का चेहरा देखना ही उनकी इच्छा थी.... पीछे बहुत सारा ‘कोकेन’ ट्रांसपेरेंट पन्नियों में भरा हुआ था। लड़कियों की यह हालत इन ड्रग्स के कारण ही हुई थी, कुछ के शरीर पर हैवानो के हाथों के निशान छपे हुए थे, उनकी हैवानियत ने खून से लथपथ कर दिया था! ना जाने कितनों का रेप हुआ था, कितनी बार हुआ था? कितने दिनों से यहाँ पर बंद थी! पूरे कंटेनर में मल-मूत्र की बदबू फैली हुई थी, वो सभी असहाय थीं, उन पर हुए अत्याचारों के कोई भी जवाब नहीं था, बहुत ही वीभत्स नजारा था। जिन पुलिस वालों ने इस सब को देखा था उनका शरीर कांप रहा था, इस हैवानियत से भर हुए मंजर ने उन सभी को उस ग्लानि का अहसास कराया था जो उन्हें चीख-चीख कर बता रही थी कि वो एक पुलिस, एक नागरिक, और....एक इंसान के नाते अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में नाकामयाब रहे थे! अतुल खुद को रोक नहीं पा रहा था, उसे खुद से घृणा होने लगी थी!

आखिर सभी के सब्र का बांध टूट गया, गुस्सा, आंसू! सभी एक साथ फूट पड़े थे, उनके रोने की आवाज, चिल्लाने की आवज ने हिमांशु की पूरी टीम को दहला दिया था। दांत पीसते हुए अतुल ने फ़ोन काट दिया.........सब कुछ बिगड़ गया था। इतने सारे अपहरण पर किसी भी तरह की कोई भी शिकायत दर्ज ही नही हुई? यह सबसे बड़ी ग्लानि थी!

“कंट्रोल रूम!” अपने आंसुओं को होंठ काटते हुए रोकने की कोशिश में अतुल के होंठ पर घाव हो गया, खून की बूंदे उसकी गर्दन पर रास्ता बनाने लगी थी “सारी एम्बुलेन्स, महिला डॉक्टर्स और नर्सो के साथ यहां भेजो.....नवी मुंबई अस्पताल के पीछे कारगोयार्ड में.. इसी वक्त!”

“जी अभी कुछ देर पहले ही सारी एम्बुलेन्स निकल चुकी है, आपकी ओर ही आ रही ही। आपके एक साथी ने फ़ोन करके हमे बता दिया था.....कुछ ही देर में एम्बुलेन्स पहुंच जाएगी!”

उस समय यह सोचने का समय नहीं था पर अतुल को समझ आ गया था कि वो साथी कोई और नहीं बल्कि “जय अग्निहोत्री” ही था।

ढेर सारी एम्बुलेंस ने 15 मिनट ही अपनी आवाज से पूरे कार्गो यार्ड को भर दिया, महिला डॉक्टर्स और नर्सों ने अपने कदम उस ओर बढ़ाये झ पर मुँह फेरे अतुल अंदर कार्गो के दरवाजे के पा खड़ा हुआ था। हर एक पुलिस वाला सर झुकाय खड़ा हुआ था, महिला डॉक्टर्स उन सभी को ईद तरह देख कर हैरान थे, पूरा माहौल जैसे अंधेरे और ग्लानि से भरा हुआ था! वो कंटेनर के पास गई, एक बार पीठ दिख रहे अतुल की ओर देखा और जब कंटेनर के अंदर देखा तो! काटो तो खून नहीं, आंखें उस नजारे को देख कर बाहर निकल पड़ी थी, वो ठिठक कर गिर पड़ी!

“आहssss......... हाsssss...!” उस डॉक्टर की चीख में जो दर्द था उसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया।

“प्लीज मेम! जल्दी कीजिये.....उन सभी की जान अब आपके हवाले है,,,,,” अतुल की आंखों से आंसू बहे जा रहे थे बहुत ही रुंधी हुई आवाज में वह सिसक गया।

सभी डॉक्टर्स ने खुद को संभाला और उन लड़कियों की ओर भागीं, सभी को जिंदा देख कर जान में जान आई पर.....क्या उन लाशों को अब जिंदा कहना सही था? क्या दिल का धड़कना, खून का बहना ही जिंदा रहना होता है? अगर ‘हाँ’ तो वे सभी जिंदा थी! स्ट्रेचर ,चादरें दवाइयां, इंजेक्शन्स....जो कुछ भी जरूरी था वह सब कुछ लाया गया। उन बेसहारा बच्चियों को कपड़ों में लपेट कर एम्बुलेन्स में ले जाया जा रहा था पर क्या? वो इन सभी की जान सच में बचा पाए थे? यह सवाल सभी को कचोट रहा था, इतनी शर्मिंदगी महसूस हो रही थी कि वे सभी घर जाकर अपनी पत्नी, बेटी,बहन को चेहरा दिखाना भी गवारा नहीं था! सर झुकाय केवल वो पुलिस वाले नहीं खड़े थे बल्कि इंसानियत एक बार फिर अपना सर झुकाय.....उस ठंडी रात में नजरें झुकाय खड़ी हुई थी!

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इस गर्मी के मौसम की आज की रात खुला आसमान होना चाहिए था, पर खुद चांद उन काले गहरे बादलों में छुपा हुआ था। वैसे तो थाने का यह इलाका पेड़-पौधों से रहित था फिर भी तेज हवाओं के झोंकों ने पूरे इलाके को झकझोर कर रखा था। आधीरात हो चुकी थी पर न तो चांद बाहर आया था और न ही हवाओं में जरा भी ठंडक थी। रोशनी से अब भी पूरा समय समाया हुआ था, आआख़िर शहर होने का प्रमाण यहीं तो था। हर जगह कोई न कोई लाइट जल ही रही थी! केवल एक जगह को छोड़ कर........,वसई क्रीक के पास सभी कॉलोनियों से दूर वो विशालकाय इमारत अंधेरे में डूबी हुई थी, पूरे 20 माले थे उसमें पर एक छोटी सी रोशनी केवल 20वे माले के एक कमरे से आ रही थी, जैसे मोमबत्ती की हल्की रोशनी हो। वो एक आफिस रूम था जिसके अंदर कांच की खिड़की से नज़ारे को देखता हुए कोई बैठा हुआ था, वह काला कोट रात के अंधेरे ऐसे विलीन था जैसे अदृश्य हो। उसके कुर्सी घुमाते ही उसके चेहरे पर हल्की सी रोशनी पड़ी! यहीं कुछ 28 साल के युवक का घिसा हुआ चेहरा था,गोरा रंग रोशनी की ओट में पीला पड़ रहा था, बनी हुई दाढ़ी के निशान वो छोटे बालों का मैदान सा दिख रहा था, हल्के भूरे बाल और लंबा सा चेहरा जिस से अहंकार टपक रहा था:

“मुझे उम्मीद नहीं थी कि कोई मेरे काम में इस तरह अड़ंगा डालेगा..........उस रास्ते के कांटे को स्कूल में ही मार देना था!” उसके चेहरे पर घृणा नहीं थी पर ऐसा क्रोध था जिसमे अफसोस था “मुझे लगा था कि जब तक तुम मेरे लिए काम कर रहे हो कोई भी इस काम में मुझ से टक्कर नहीं ले पायेगा............अपनी नाकामयाबी पर कुछ कहना नहीं चाहोगे!”

सामने सोफे पर कोई बैठा हुआ था, लंबा शरीर नीचे नरम कपड़े वाला चिपका हुआ पेंट जैसा वस्त् पहना हुआ था, ऊपर एक बैगनी रंग का कुर्ते जैसी पोशाक थी जिसमे बटन की जगह सीने से लेकर गर्दन तक मोटा सा धागा था जो जाल सा बनाये हुए था, बाजुएं खुली हुई थी पर हाथ पर आस्तीन थी जो इतनी बड़ी थी कि 4-5 हाथ तो आराम से बन जाते, अपने दोनों हाथों को आपस में उंगलियों से जोड़ कर रखा हुआ था जिस से आस्तीन ने उसके हाथों को पूरी तरह से ढक रखा था। रोशनी कम थी पर उसके सुनहरे लंबे, मोटी झाड़ू जैसे बाल थे जिसमें पीछे एक चोटी बंधी हुई थी तो कुच बाल सामने के ओर भी थे जिन ने उसका चेहरा हल्का सा छुपा रखा था, उसके पीछे 2 बड़े काले साये खड़े हुए थे!

“Zhè bùshì wǒ de shībài, nǐ dì nàxiē rén shì zuìkuí huòshǒu. Tā mā de húndàn!”

ये कोई ऐसी भाषा नहीं थी जो हर कोई समझ सकता था, उसकी यह आवाज इतनी अजीब थी कि कुर्सी पर बैठा हुआ वो इंसान जिसने सवाल पूछा था झुंझल गया।

“हरामखोर! हिंदी में बोल!” उसकी चीख को सुनकर पीछे खड़े हुए दोनों साये, जैसे अपने हथियार निकाल कर मारने को तैयार हो गए! पर उस सोफे पर बैठी शख्शियत ने उन्हें ऐसा न करने का इशारा किया, सब कुछ एकदम शांत हो गया

“तुम्हारे लोग किसी काम के नहीं है करन! एक मामूली आदमी के हाथों से मर जाना,....मुझे तुम्हारे देश के लोगों से बहुत उम्मीद थी” जब कोई अंग्रेज हिंदी बोलता है तो उसकी ‘टोन’ अजीब सी होती है पर इस विदेशी की ऐसी थी जैसे कोई बहुत धीरे बोल रहा हो।

“भूलो मत की यह सब तुम्हारा ही प्लान था ज़िया-ये(Xia-ye)” करन कि आवाज में अहंकार साफ समझ आ रहा था “इस सब का कारण तुम्हारे ही चूतिया लोग है जो उस....उस, भो*ड़ी-के ‘जय’ को ठिकाने नहीं लगा पाए थे...वरना आज सब कुछ सही चल रहा होता और हमारा लड़कियों से भरा हुआ कंटेनर नहीं पकड़ाया होता!” गुस्सा साफ था उसकी आवाज में, जैसे किसी ने गाल पर तमाचा जड़ दिया हो।

“वो इसलिए......” ज़िया-ये सामने की तरफ झुका, उसकी आँखों में गंभीरता के साथ खूनी हवस तैर रही थी “क्योंकि तुमनें हमें यह नहीं बताया था कि वो एक पब्लिकेशन हाउस का मालिक होने के साथ-साथ एक बहुत ही ताकतवर इंसान भी है!...उल्टा तुमने यह कहा था कि वो बस छोटे-मोटे गुंडों से लड़ने लायक है, और कुछ भी नहीं!”

ज़िया-ये की बात और हाव-भाव से करन की फट चुकी थी, ये ठीक वैसा ही था जैसे शेर के सामने निहत्थे होना.....कब वो हमला कर दे कोई भी भरोसा नहीं। डरना लाज़मी था क्योंकि वह अच्छे से जानता था ज़िया-ये बहुत बड़े अस्ससिन(Assassin) आर्गेनाईजेशन का राइट हैंड था। हालांकि यह बात तो माननी पड़ेगी कि जिया-ये का आर्गेनाईजेशन कॉन्ट्रैक्ट का बहुत पक्का था और जब तक कि कॉन्ट्रैक्ट एक्टिव था वो करन को कोई भी नुकसान नहीं पहुंचा सकता था।

“यह..ये बात मुझे खुद पता नहीं थी, जो पता था वहीं बताया.....बाकी का तुम पर इसलिए छोड़ दिया क्योंकि सौरभ ने बताया था कि तुम पर हर हाल में भरोसा किया जा सकता है” वह बोलने से पहले हिचकिचाया, पर थोड़ी सी चाटुकारिता से अपना काम कर दिया

“ठीक है, मैं और मवेरे साथी उस जय की पूरी कुंडली निकाल लेंगे और वो ड्रग भी ढूढ़ लेंगे” जिया-ये की बात सुनकर कर्ण थोड़ा शांत हुआ “पर क्योंकि कंटेनर पकड़ा गया है, तुम्हें पूछताछ के लिए तैयार रहना चाहिए” पूछताछ की बात सुनते ही उसके माथे पर परेशानी की रेखाएं आ गयी। वह जानता था कि इस हादसे ने पूरी पुलिस को सकते में ला दिया था, यहाँ तक कि पोलिटिकल ओपिनियन भी बदल गया था। तो उसका इस सब से बाहर निकलना जरूरी था,

“मैं निकलता हूँ......जब जरूरत पड़े तो मुझे मैसेज पहुंचा देना”

“समझ गया” कनन ने धीमी आवाज में कहा और वो तीनों किसी साये की तरह बिना पैरों की आवाज के अंधेरे में ही गायब हो गए।

बाहर आते ही उन्हें एक काली कार कोने में खड़ी हुई दिख गयी, एक दम काली कार, काले शीशे वाली। वो तीनों पीछे की पैसेंजर सीट पर जाकर बैठ गए, सीट काफी बड़ी थी और अंदर से कार बहुत ही लक्सरी थी पर अंदर एक बैंगनी लाइट जल रहा था जो कि अंधेरे के ही समान था। सामने की सीट पर एक ड्राइवर बैठा हुआ था जो देखने में इंडियन ही था, वह चुप चाप बैठा हुआ था।

“हमे कब तक इस कीड़े की बात सुननी पड़ेगी!” जिया-ये के बाजू में बैठे हुए एक लंबी टोपी वाले ने कहा, चेहरा अभी भी उसका साफ नहीं दिख रहा था पर उसके हाथ की मांसपेशियों की बनावट जिया-ये से 2 गुनी थी और वह असल में एक बॉडीगार्ड लग रहा था।

“भूलो मत किनक्स! हमारा मुख्य काम उस ड्रग को ढूंढना है जो जय के दोस्त ने बनाया था” जिया-ये की दूसरी तरफ बैठे आदमी ने भारी आवाज में कहा, उसने एक हुड वाला जैकेट पहन रखा था। उसका शरीर भी भरा हुआ था पर किनक्स ज्यादा टाइट(Tight) मांसपेशियां थी उसकी जैसे कोई बड़ा सा सांड हो।

“देसु की बात सही है किनक्स! इन छोटे-मोटे कीड़ों से हमारा कोई खास लेना देना नहीं है। ...एक बार मिशन पूरा हो जाये.....इस पूरे शहर को जला कर खाक कर देंगे” बहुत ही ठंडी आवाज में जिया-ये बोला।

“उस जय का क्या करना है?” देसु ने पूछा

“उसकी पूरी जानकारी निकालो, कोई भी चीज नहीं छूटनी चाहिए!”

“ओह, लगता है ये ‘जय’ काफी दिलचस्प है!......क्या मैं उसका काम तमाम कर दूं?” बहुत ही अश्लील चेहरे के साथ उसने अपने होंठों को सांप जैसी जीभ से चाटा, उसका चेहरा जैसे बिगड़ सा गया था 

“जय अकेला नहीं है जिस से हमारे प्लान को खतरा है! हमें उस ‘ब्लैक हॉक’(Black Hawk) पर भी ध्यान देना होगा। उसने पिछली बार हमसे वो ‘चॉपर’ चुरा लिया था....वो ‘अर्टिफेक्ट’ वापस लेना जरूरी है!” जिया- ये ने जब यह कहा तो ऐसा लग जैसे पहली बार उसके चेहरे पर गुस्सा आया था पर पल भर में गायब भी हो गया 

“ब्लैक हॉक का तो समझ आता है, उसके पास एक ‘अर्टिफेक्ट’ है। फिर उस जय पर इतना ध्यान देने की क्या जरूरत है?” किनक्स ने सन्देहपूर्वक पूछा

जिया-ये ने आगे झुक कर अपनी गंभीरता दर्शाई, एक पल के लिए ऐसा लग जी कोई पुराना सा बदला उसके मन में था, जय के खिलाफ!

“क्योंकि उस जय ने हमारे 20 लोगों को अंडरवर्ल्ड में ढूंढ कर मार दिया है, वो लोग कमजोर नहीं थे और जब उसका वीडियो मैंने देखा तो वह अच्छा नजारा नहीं था!” जिया ने ने गंभीरता से कहा

“क्यों?... आखिर ऐसा क्या खास है उसमें?” दोनों ने एक साथ सवाल किया जिसका जवाब देने में जिया-ये ने देर नहीं कि और उसकी आवाज के भाव अब भी गुस्से से भरे हुए थे।

“क्योंकि उस जय ने “आई ऑफ होरस” सीख रखा है, इसलिए वो हमारे मिशन के लिए खतरा है!”

उसके बाद उनकी बातें उस बंद गाड़ी के साथ ही वहाँ के अंधेरे में गायब हो गयी। उस रात स्याह बदलों ने जिस ओट में आसमान को ढंक रखा था, वो आने वाले समय के लिए अच्छा संदेश नहीं था। .........

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अगली सुबह तक तो पूरी न्यूज़ में हर जगह एक ही खबर चल रही थी,

सालों की शांत के बाद, आज एक बार फिर मुंबई शहर ह्यूमन ट्रेफिकिंग की चपेट में! नवीमुम्बई अस्पताल के पीछे कारगोयार्ड में मिली 80 मासूम जाने.....वाशी पुलिस ने की छापेमारी और सभी मासूम बच्चियों की जिंदगियां बचाई। माना जा रहा है कि कोई बहुत ही पावरफुल गैंग सालों से छुप कर दे रही है इस तरह के गैरकानूनी कायदों को अंजाम....बड़ी शख्शियतों के इस सब में शामिल होने की गुंजाइश।‘

न्यूज़ चैनलों और अखबार में यही खबर जोरों-शोरों से थी, उन लड़कियों के मां-बाप पूरा परिवार यहाँ तक कि दोस्त भी इस हुए गंदे कृत्य को लेकर क्रोधित थे। सोशल मीडिया पर ह्यूमन ट्रेफिकिंग को लेकर कैम्पन चल रहा था, आज लोगों का एक असली सत्याग्रह सड़कों पर चलता हुआ दिख रहा था जिसे किसी के बहकावे की जरूरत नहीं थी। सभी अपने दम पर अपनी बात पर अडिग रहने के लिए जमा हुए थे, ह्यूमन ट्रेफिकिंग में फंसी लड़कियों को नया दिलाने की मांग चल रही थी। कल रात के इंसिडेंट ने पूरे के पूरे शहर को सूखे पत्ते की तरह हिला कर रख दिया था। खासकर नेताओ के अंदर इस बात का ख़ौफ़ था कि अगर उन्होंने जल्दी से कोई कदम नहीं उठाया तो ना जाने जनता क्या करेगी?!......................

कल रात को ही कारगोयार्ड से लौट कर हिमांशु ने आसुना और निहारिका को अपने सेक्रे बेस में ले आया था। अतुल रात से ही पुलिस स्टेशन में था, सारी की सारी पुलिस और अस्पताल के डायरेक्टर्स की रात को ही मीटिंग बुलानी पड़ी थी। कमिश्नर राकेश राव ने ‘गोपाल अस्पताल’ को सभी का इलाज मुफ्त में करने के लिए आदेश दिया था जिसे बिना किसी परेशानी के अस्पताल वालों ने मान लिया था.....पर उसके बाद से ही इस मामले की अच्छे से छानबीन करने की जिम्मेदारी ने सभी पुलिस वालों को व्यस्त रखा था। निहारिका और आसुना अंदर कमरों में आराम कर रहीं थी जबकि अभी उठ कर आये सभी हिमांशु की टीम वाले मेन रूम में एक टेबल के इर्द-गिर्द बैठे हुए थे...सभी के हाथ में कॉफी का एक मग था,

“क्या सभी की नींद अच्छी रही?” हिमांशु ने छोटी सी मुस्कान के साथ पूछा

सभी के चेहरे पर 12 बजे हुए थे जैसे रात भर सो नहीं पाए हो, खासकर पुनीत की हालत ज्यादा खराब लग रही थी, वह कल रात से ही अच्छा महसूस नहीं कर रहा था...उसे कई बार उल्टियां हुई थी..चेहरा सफेद से पड़ गया था।

“पुनीत! मुझे लगता है तुम्हें और भी आराम की जरूरत है जायो, जा कर आराम करो”

“नहीं सर,....मैं पहले से ठीक हूँ..... मौतें देखना अलग बात होती है जब मरने वाले बुरे लोग हो पर....” पुन का चेहरा टेबल पर टिका हुआ था, वह पेट पकड़े बोल रहा था

“मासूमों का टॉर्चर देखना!. समझ सकती हूँ, बहुत ही Uncomfortable था” टीना में पुनीत की बात पूरी की, वह भी कल रात के दृश्य से उभरी नहीं थी, आखिर वो खुद एक लड़की थी। उसके अंदर बहुत गुस्सा पनप रहा था

“इतना तो समझ आ गया कि जय इस सब के पीछे बिल्कुल भी नहीं था...” राम ने कॉफी का मग मुँह से लगाया

“ और...यह भी की उसे अंडरएस्टीमेट करना बहुत बड़ी गलती थी!...” राघव ने अपनी गर्दन को सहलाते हुए कहा, कल रात उसने जय की ताकत को खुद परख लिया था और उसका स्वाद भी चख लिया था।

“चलो कम से कम तुम सभी को यह तो पता चल गया कि हमारा असली दुश्मन जय नहीं है!” हिमांशु ने सभी से पूछा

और सभी ने सहमति में सर हिलाया,........ अब कहीं जाकर हिमांशु के हाव-भाव गंभीर हो गए जिस देख कर सभी ठीक से बैठ गए। हिमांशु की आँखों में जैसे अंगार दहक रहे थे।

“अब जो मैं तुम्हे बताने वाला हूँ उसे ध्यान से सुनो! क्योंकि यह मिशन जितना आसान लग रहा है उतना है नहीं” हिमांशु ने अपने हाथ टेबल पर रख दिये

यह मिशन अब से बहुत ही खतरनाक होने वाला है तो तुम सभी को सीरियस होने की जरूरत है!”

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