कवि हरि शंकर गोयल

Tragedy Crime

4.1  

कवि हरि शंकर गोयल

Tragedy Crime

कटा हुआ हाथ

कटा हुआ हाथ

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(सत्य घटना पर आधारित कहानी )

तीन चार ग्रामीण औरतें खेतों पर काम करने के लिए तेज तेज कदमों से जा रहीं थीं। रास्ते में एक जगह एक कुत्ता कुछ खा रहा था । एक औरत का ध्यान उस पर गया और वह जोर से चीख पड़ी । "भाभीऽऽऽऽ" । सारी औरतों का ध्यान उस पर गया तो देखा कि वह औरत डर से बुरी तरह कांप रही थी । सबने एक साथ पूछा "क्या हुआ" ? वह बोली कुछ नहीं और हाथ से इशारा कर कुत्ते को दिखाया । अब सबका ध्यान कुत्ते पर गया। कुत्ता एक इंसानी हाथ को खा रहा था । सब औरतें एकाएक चीख‌ पड़ी । उनके चीखने से कुत्ता भाग खड़ा हुआ । वे उस हाथ के नजदीक पहुंची तो देखा कि वह हाथ किसी औरत का था । नेल पॉलिश लगी हुई थी । उंगली और कलाई सूनी थी । औरतों ने शोर मचाकर वहां आसपास खेतों में काम करने वाले किसानों को बुलवा लिया । किसानों ने जब उस कटे हुए हाथ को देखा तो वे सन्न रह गए। पहले कभी ऐसी घटना गांव में नहीं हुई थी । एक किसान तुरंत थाने में सूचना देने के लिए दौड़ा । दूसरा वहीं बैठा रहा जिससे कोई कुत्ता या और कोई जानवर उसे खा नहीं जाए । 


थोड़ी देर में पुलिस आ गई। मौका देखा गया । फोटो भी ले लिए। हाथ बाजू से कटा हुआ था । गोरा रंग था और साफ सुथरा नजर आ रहा था । लग रहा था कि किसी शहरी संभ्रांत महिला का हाथ है । पुलिस उसे अपने साथ थाने ले आई और मौका पर्चा बना लिया । 


महिलाओं की गुमशुदगी की रिपोर्ट तलाश की जाने लगी । एक व्यापारी ने अपनी विधवा बहू के कल से लापता होने की रिपोर्ट दर्ज करा रखी थी । उस व्यापारी को वह कटा हुआ हाथ दिखाया मगर वह उसे पहचान नहीं पाया । 


दूसरे दिन अखबारों में जब यह समाचार छपा तो पूरे कस्बे में हाहाकार छा गया। ऐसी घटना पहले कभी नहीं हुई थी । पूरे कस्बे में वह कटा हुआ हाथ चर्चा का कारण बना हुआ था । 


पुलिस अभी कुछ और तफ्तीश करती उससे पहले ही एक अन्य गांव से भी ऐसी ही सूचना मिली । वहां पर भी एक कटा हुआ हाथ पाया गया था । पुलिस ने उसे भी बरामद कर लिया। दोनों हाथ एक जैसे थे । नेल पॉलिश भी एक ही कलर की थी । इससे भी सिद्ध हो रहा था कि दोनों हाथ एक ही स्त्री के हैं । 


गुत्थी और उलझती जा रही थी । कस्बे में लोग आक्रोशित होने लगे थे । पुलिस कुछ कर पाती इससे पहले ही समाचार आया कि एक खेत में एक बोरे में से बदबू आ रही है और उस पर मक्खियां भिनभिना रहीं हैं । पुलिस तुरंत पहुंची और बोरे को खोला गया तो सब लोग सन्न रह गये । एक महिला का निर्वस्त्र बदन जो गर्दन से नीचे का और जांघों से ऊपर तक था ,उसके दोनों हाथ कंधे तक कटे थे ,उसमें पड़ा हुआ था । पुलिस ने भी उस क्षेत्र में कभी कोई ऐसी निर्वस्त्र बॉडी नहीं देखी थी इसलिए पुलिस खुद घबरा रही थी । 


थानेदार ने डीएसपी को मौके पर ही बुलवा लिया। । डीएसपी एक नौजवान युवक था । उसने उस शरीर का गंभीर मुआयना किया तो निम्न तथ्य मिले । 

1. महिला के शरीर के अवयवों के कसाव से उसकी उम्र 30-35 वर्ष की लग रही थी । 

2. महिला किसी संभ्रांत परिवार की लग रही थी क्योंकि वह "शेव्ड" थी । 

3. महिला गौर वर्ण की थी जिससे लग रहा था कि वह निश्चित रूप से सुंदर होगी । 

4. अन्य कोई चोट का निशान नहीं था और न ही कोई जेवर पहने हुए थी । 


डीएसपी अंकित सक्सेना ने समस्त तथ्यों को एकत्रित किया । बॉडी को मॉर्चरी में रखवाया और हिफाजत के आवश्यक बंदोबस्त किए । उस व्यापारी को फिर बुलवाया । मगर व्यापारी ने कहा "मैंने अपनी बहू का बदन देखा थोड़ी है जिससे मैं पहचान कर सकूं" ? उसकी पत्नी और घरवालों को बुलवाया लेकिन पहचान नहीं हो सकी । 


अगले दिन दो और अलग अलग गांवों से कटे हुए दोनों पैर बरामद हो गए। उन सबको एक साथ मिला दिया तो अब उस स्त्री की काफी कुछ पहचान हो सकती थी । व्यापारी के परिवार को लग रहा था कि शरीर तो उनकी बहू अंजलि का लग रहा है लेकिन पक्के तौर पर नहीं कह सकते । 

अगले दिन करीब पच्चीस किलोमीटर दूर के एक गांव से सूचना मिली कि एक औरत का सिर जंगल में पड़ा मिला है । उसे लाकर धड़ से मिला दिया गया। हर एक अंग को जानवरों ने कुछ कुछ खा लिया था । व्यापारी ने अब साफ पहचान लिया कि यह उसकी विधवा बहू अंजलि का ही शरीर है । यह किसी के समझ में नहीं आ रहा था कि अंजलि की ऐसी निर्मम हत्या किसने की और क्यों की ? उसका तो कोई दुश्मन भी नहीं था । फिर भी ऐसा घृणित काम किया गया । और हत्या भी ऐसी जघन्य ! निर्वस्त्र क्यों किया गया ? शरीर के अंग काट काट कर अलग अलग क्यों फेंके गए ? 


अंकित ने कड़ियां जोडनी शुरू की । लाश निर्वस्त्र थी । "क्लीन शेव्ड" थी । इसका मतलब प्रेम प्रसंग लग रहा है जिसमें अंजलि की सहमति थी तभी वह इस अवस्था में थी अन्यथा "क्लीन शेव्ड" नहीं होती । इसको एक बहुत बड़ा क्लू मानते हुए अंकित ने जांच आरंभ की । 


व्यापारी ने बताया कि अंजलि से उसके पुत्र रोहित की शादी करीब बारह तेरह वर्ष पूर्व हुई थी । शादी के चार पांच साल तक भी बच्चा नहीं हुआ था । एक दिन रोहित अपनी मोटर साइकिल से व्यवसाय के लिए दूसरे कस्बे में जा रहा था कि सामने से एक ट्रक ओवरटेक करता हुआ आया और रोहित को उड़ा गया । अंजलि विधवा हो गई। उस समय उसकी उम्र सत्ताईस अट्ठाइस वर्ष थी । 


बाद में उसके पुनर्विवाह की बात चली मगर अंजलि ने ही मना कर दिया । बस, उसके बाद से वह साधारण जीवन जी रही थी । यही कहानी है उसकी ,बस । 


अंकित ने पूछा "वह कहां कहां जाती थी" ? 

"केवल शिव मंदिर । और वह भी सोमवार की सोमवार" 

"उसके साथ और कोई जाता था" ? 

"नहीं" । 


अंकित ने वह शिव मंदिर देखा और पुजारी को अंजलि का फोटो दिखाकर पूछा कि वह उसे जानता है ? तो पुजारी ने तसदीक की कि वह हर सोमवार को आती थी मंदिर में पूजा करने । 

अंकित ने पूछा "कोई आता था क्या उससे मिलने ? या उसे लेने या छोड़ने" ? 

" नहीं । मगर एक दिन मैंने उसे एक आदमी के साथ पीछे मोटरसाइकिल पर बैठकर जाते देखा था " 

"उसका हुलिया बता सकते हो" 

"नहीं साहब। बहुत दिन हो गए उस बात को । मगर इतना बता सकता हूं कि उसकी उम्र पचास पचपन की रही होगी" । 

"और कोई जानकारी " ? 

"नहीं साहब" । 


अंकित व्यापारी के पास फिर आया और पूछा "घर पर कौन कौन लोग आते हैं" 

"कोई नहीं आता है, साहब" 

"नौकर हैं" ? 

"हां साहब , पर वे घर पर कभी कभार ही जाते हैं जब कोई जरूरी काम पड़े तो" । 

व्यापारी से नौकरों को बुलवाने को कहा गया । तीन नौकर थे मगर सब पच्चीस से चालीस साल तक के लग रहे थे । पुजारी के बयान से ये मेल नहीं खा रहे थे । 


अचानक व्यापारी ने कहा "करीब दो तीन साल पहले हमारे घर में चोरी हुई थी । तब पुलिस आई थी उसकी जांच करने । बाद में जांच अधिकारी दो तीन बार आया था । 


अंकित को इस जानकारी का कोई उपयोग नहीं लग रहा था मगर उसने थानेदार को कह दिया कि जांच अधिकारी कौन था यह तुरंत पता लगाए। अंकित वहां से आ गया । 


दो दिन के बाद थानेदार ने बताया कि अब्दुल गफूर ASI था उस समय जांच अधिकारी। अंकित ने थानेदार को कह दिया कि उसे भेज दें । 

दो घंटे बाद अब्दुल गफूर आया । उसे देखकर अंकित चौंका । देखने में वह पचास पचपन का लग रहा था । अंकित के मन में शक का कीड़ा कुलबुलाया । उसने उसे कुछ काम बता कर कल सुबह दस बजे आने के लिए कह दिया । इधर मंदिर के पुजारी को मैसेज भिजवा दिया कि वह कल सुबह साढ़े नौ बजे आ जाये । 


नियत समय पर पुजारी आ गया । अंकित ने उसे सब कुछ पहले से समझा दिया कि अभी जो पुलिस वाला आएगा उसे पहचान कर बताना है कि क्या ये वही आदमी है जो मोटरसाइकिल पर उस दिन उसने देखा था ? 


ठीक दस बजे अब्दुल गफूर आया । पुजारी उसे उड़ती निगाह से देखता रहा । अब्दुल गफूर के जाने के बाद अंकित ने उससे पूछा तो उसने कहा "साहब 100% तो नहीं कह सकता , मगर लगता वही है" । 


अंकित को एक क्लू मिल गया था । उसने पुलिस महकमे में उसके बारे में जानकारी हासिल की तो मालूम हुआ कि उसकी छवि अच्छी नहीं थी । आशिक मिजाज का आदमी था वह । अब अंकित ने उसे गिरफ्तार करने की योजना बना ली ‌‌‌‌।


एस पी साहब को सारी जानकारी दी गई और उनकी सहमति से अब्दुल गफूर को गिरफ्तार कर लिया गया। पहले तो वह इधर उधर घुमाता रहा लेकिन जब उसके साथ भी वही ट्रीटमेंट दिया गया तो उसने सच उगल दिया । 


"सेठजी के चोरी हुई थी तो मैं जांच अधिकारी बना । इस कारण मेरा उस घर में आना जाना कई बार हुआ । मैंने वहां पर अंजलि को देखा । बहुत सुंदर थी वह । मेरा मन आ गया था उस पर । जब उसके बारे में पूछताछ की तो मालूम हुआ कि वह विधवा है । मेरा काम आसान हो गया। ऐसी औरतें बड़ी जल्दी गिरफ्त में आ जातीं हैं क्योंकि ये न जाने कब से "भूखी" रहतीं हैं । मैंने उसे देखा और उसने मुझे । दोनों की नज़रें मिलीं और वह मुस्कुरा दी । बस, मेरा काम हो गया । मैंने उसे शिव मंदिर पर आने के लिए बोल दिया । मैंने उसे रास्ते से ही मोटरसाइकिल पर बिठा लिया और उसे एक मक्का के खेत में ले गया । बहुत भूखी थी वह । 


फिर मैंने दूसरे कस्बे में एक कमरा किराए पर ले लिया । हमने तय कर लिया था की हर सोमवार को वह दोपहर तीन बजे घर से निकलेगी । मंदिर से वापसी पर मैं उसे लेकर अपने कमरे में जाऊंगा और फिर वहां पर हम दोनों "मजे" करेंगे । फिर मैं उसे उसी रास्ते पर छोड़ देता था । 


एक दिन मैं "प्रोटेक्शन" लाना भूल गया था । पर वह कामान्ध थी । घर से इसके लिए तैयार होकर आती थी । मैंने मना भी किया कि रिस्क है लेकिन वह नहीं मानी और गड़बड़ हो गई । अगले ही महीने उसने कहा दिया कि शायद वह प्रैग्नैंट है । मैंने एबोर्शन के लिए कहा तो उसने मना कर दिया और मुझ पर शादी का दबाव डालने लगी । कहती थी "तुम्हारे धर्म में तो चार शादी हो सकती है । मैं अपना धर्म बदलने को तैयार हूं । तुम मुझसे शादी कर लो" 


"अब आप ही बताओ साहब , मैं इस उम्र में उससे शादी करता क्या ? मेरे बेटे बेटी का निकाह पहले ही हो चुका है । इसलिए उसे मारने की सोच ली" 


"कैसे मारा" ? 


"हर सोमवार को वह मंदिर आती ही थी । मैं एक मिठाई में बेहोशी की दवा मिलाकर लें गया था । मंदिर से लौटते वक्त उसे वह मिठाई खिलाई जिससे वह बेहोश हो गई । पास के खेत में ले जाकर पहले उसे निर्वस्त्र किया । फिर गला रेता । उसके बाद हाथ पांव काटे । बोरा साथ लेकर गया था इसलिए धड़ उसमें डाला और बाकी अंग दूसरे बोरे में भर दिए । कपड़ों में आग लगा दी । उसके गहने जेवर सब उतार लिए । फिर अलग-अलग दिशाओं में टुकड़े फेंक दिए " । 


"साले दुष्ट, पुलिस में नौकरी करके शातिर अपराधी का काम कर रहा है तू । तू लोगों को बचाने के लिए है या मारने के लिए" ? अंकित का गुस्सा फूट पड़ा । बाद में अनुसंधान कर के उसके खिलाफ चालान पेश कर दिया गया । 



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