**हॉन्टेड गांव: रात का खौफनाक सफर**
**हॉन्टेड गांव: रात का खौफनाक सफर**
### **प्रस्तावना**
रात की रहस्यमयी शैलियाँ, अनजाने रास्ते और भयानक घटनाएँ। एक आदमी की घर वापसी की साधारण यात्रा कैसे एक भयानक अनुभव में बदल गई, यह कहानी आपके देखने वालों को तेज़ कर सकती है।
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### **कहानी**
रात के आठ बज गए थे। शहर से निकले राकेश (मुख्य पात्र) अपने गांव के साथ बस स्टॉप पर उतरे। आकाश में काले बादल छाए हुए थे और पिशाचों की सरसराहट में एक अजीब सा बिखरी हुई रही थी। स्टॉप पर बस का इंतजार करते-करते एक घंटा चुकाना पड़ा। इतनी दूर से एक पुराना और खंडहर बस धीमी गति से आगे।
बस में बैठे लोगों के हावभाव अजीब से थे। हर चेहरे पर एक अजीब उदासी और उदासी थी। रमेश ने ध्यान नहीं दिया और बस में चढ़ गया। कुछ देर बाद बस चलने लगी। जब रमेश विंडो से बाहर का व्यू-व्यू देखा गया तो उसका पता ही नहीं चला।
अचानक, प्लास्टिक की आवाज़ से उसकी नींद। "गाँव आ गया है," यह रिपोर्ट ही थी कि राकेश जल्दी से बस से उतर गया। लेकिन जैसे ही वह उतरा, बस तेजी से अंधेरे में खो गया।
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### **भयानक दोस्ती की शुरुआत**
गांव सुनसान और अजीब सा लग रहा था। चारों ओर घना जंगल और बड़े-बड़े खेत थे। आलीशान जंगली हवा में सियारों की आवाज़ दे रही थी। रमेश को लगा कि यह उसका गांव नहीं है। उन्होंने कुछ दूर तक एक फैक्ट्री का निरीक्षण किया, जहां कुछ झोपड़ियां लगाई गईं। खटिया पर राक्षस, लेकिन चारों ओर अन्य स्थान था।
थोड़ी देर बाद, उसने ट्यूबवेल के पास देखा। वहां से पानी डालने की आवाज आ रही थी। उत्सुकता से वह पास गया, लेकिन जो दृश्य उसने देखा, वह बेकार कर देने वाला था। विपक्ष और परमाणु ऊर्जा संयंत्र पानी में कुछ बच्चे नहा रहे थे। यह देखकर रमेश के रोंगटे हो गए।
तभी एक बच्चा उसे देखकर बोला, "अंकल, आ जाइए! हम आपका ही इंतजार कर रहे थे।" इससे राकेश घबरा गया और तुरंत पीछे मुड़ गया। लेकिन तभी एक बच्चा कोरियोग्राफी पानी से भरा लोटा लेकर उसकी ओर भागा।
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### **अंधेरे का पीछा**
रमेश वहां से भागा, लेकिन बच्चा उसका पीछा करता रहा। डर के मारे उसकी सांस फूल रही थी। दौड़ते-दौड़ते उसने एक पुराना मंदिर देखा और तुरंत अंदर घुस गया। बच्चे के मंदिर के बाहर ही रुक गए। एक बच्चा ऑनलाइन पानी को खरीदा हुआ डरा हुआ राक्षस के साथ रमेश को देख रहा था।
मंदिर में रात भर राम कांपते हुए रुके रहे। वहाँ भगवान की मूर्ति के नीचे जलता दिया ही उसकी मूर्ति का सहारा था। सुबह होने पर वह मंदिर से बाहर निकला। चारों ओर से सिद्ध साधु था। कोई इंसान नहीं, बस घना जंगल और वीरान रास्ता।
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### **सच का खुलासा**
किसी तरह राम जंगल से रेलवे हाईवे तक पहुंच। वहां उसका एक ट्रक मिला। ट्रक ड्राइवर ने बताया कि वह हॉन्टेड गांव है। सबसे पहले बाढ़ में पूरा गांव डूब गया था, और तब वहां के मरे हुए लोग भूत बनकर आने-जानने वालों को याद करते हैं। इससे रमेश के पैर कांप चले गए।
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### **अंतिम पल**
रमेश किसी तरह अपने घर पहुंचें। उसने अपने परिवार को यह घटना नहीं बताई, इसलिए वे परेशान नहीं हैं। लेकिन उस रात के बाद, रमेश ने कभी रात को अकेले यात्रा करने की हिम्मत नहीं की।

