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Sonu Gupta

Crime

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Sonu Gupta

Crime

**"अपराध की सजा और एक प्रेम की तड़प"** ---

**"अपराध की सजा और एक प्रेम की तड़प"** ---

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एक छोटे से गाँव का रहने वाला विद्यार्थी अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प के लिए जाना जाता था। लेकिन किस्मत का खेल ऐसा था कि कुछ रेनॉल्ड्स ने उसे अपराध की दुनिया में धकेल दिया। बचपन से ही गरीबी की मार झेलने वाले बांग्लादेश के दिल में अपनी पत्नी सीता के प्रति चतुर्थ प्रेम था। सीता अपने जीवन का सबसे खूबसूरत हिस्सा थी, जिसे हर दिन अपनी आयत में शामिल किया जाता था, उसकी प्रति अपनी शिष्या प्रेम का इजहार करती थी।


लेकिन जैसे-जैसे समय बीता, एक दिन की उम्र में गंभीर आरोप लगा। उन्होंने कहा कि उन्होंने कुछ ऐसे लोगों के साथ अन्याय किया, जिनके बारे में उन्होंने बताया था। ऐसे बने बनाए गए खंडहरों में एक बहुत बड़ा अपराध पकड़ा गया। उस मुकदमे में गवाही दी गई, सबूत पेश किए गए, और अंततः उसे जेल भेजने का फैसला सुनाया गया। उस वक्त उसकी आंखों में आंखें थीं और दिल में दर्द का सैलाब आ रहा था। जिस दिन उसे जेल डिपार्टमेंट का ऑर्डर मिला, उसने रो दिया। 


सीता ने जब ये सुना तो उनके दिल पर गहरा असर हुआ। वह दौड़ती हुई जेल से बाहर निकली। हिंदूओं को ले जाने में आई पुलिस के सामने सीता ने अपने पति को प्रणाम किया, उन्हें गले लगाकर फूट-फूट कर रोने लगी। उसकी आँसुओं में वह दर्द और ममता की अभिव्यक्ति थी जिसके शब्दों में कठिन कहा गया था। वह चाहती थी कि ये पल थम जाए, और उसका पति हमेशा उसकी गोद में रहे। लेकिन कानून ने अन्याय सहन नहीं किया। पुलिस वाले उसे जबरदस्ती खींचकर ले गए, सीता की पीड़ा उसकी चीख-पुकार में बदल गई, लेकिन वह भी उसे रोकना नहीं चाहती थी। 


जेल की सजा की सजा-कटाटे ये खूबसूरत सीता के दिल पर टूटा हुआ पहाड़ जैसा है। उन्होंने घर पर अपने पति के बिछड़ने की कल्पना में ही फूट-फूट कर रोना शुरू कर दिया। दूसरी ओर, बंदा के जंगलों में जेल की चारदीवारियों को भी अंदर से तोड़ दिया गया था। उसका दिल चाहता था कि वह आखिरी बार अपनी पत्नी के गले लगकर उसे प्यार से अलिंगन कर सके, लेकिन पुलिस वालों ने उसकी इस आखिरी इच्छा को भी ठुकरा दिया। उसका बड़ा अपराध था, उसकी सतर्कता और दंड को पूरा करना अनिवार्य था। 


फ़ेज़ ने पहले उसे अपनी पसंद का खाना खिलाया, लेकिन इस शारीरिक भूख से अधिक, उसकी आत्मा उस अलिंगन के लिए तड़प रही थी जिसे उसने कभी नहीं किया। आख़िरकार, नियति दिवस पर उसे फाँसी दे दी गई। उनके मरते ही उनके जीवन का अध्याय समाप्त हो गया। लेकिन उनके जाने के बाद भी, सीता के जीवन में वो अधूरापन हमेशा के लिए बस गया। 


### कहानी का संदेश


कहानी हमें यह सिखाती है कि संकटपूर्ण परिस्थितियाँ कैसी भी हों, हमें कभी भी अपराध की राह नहीं चुननी चाहिए। एक ग़लत इंसान का जीवन कायम रह सकता है। यह कहानी उस व्यक्ति की है जिसने समाज से कटकर अपनी जिंदगी बर्बाद कर ली और अपने प्रेम की पीड़ा को जीवन भर के लिए छोड़ दिया। समाज में हमेशा सही राह पर चलने वाले ही सम्मान पाते हैं। अपराध से अलाभकारी लाभ हो, पर अंत में दुख और लाभ ही है। हमें चाहिए कि हम हमेशा सच्चाई के मार्ग पर चलें और अपने प्रियजनों के प्रति सच्ची कहानियाँ रखें। 



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