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Kumar Vikrant

Horror Thriller

4  

Kumar Vikrant

Horror Thriller

रहस्यमय जोड़ा : रहस्य

रहस्यमय जोड़ा : रहस्य

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शुक्रवार की शाम सुनीता जब विल सिटी से देवदुर्ग जाने वाले राजमार्ग के प्रथम पैट्रोल पम्प पर पहुँची तो शाम के छह बज चुके थे और नवंबर महीने में शाम के छह बजे रात का अँधेरा छा चुका था।

"टैंक फुल कर दो भैया।" सुनीता ने सुनसान पड़े राजमार्ग की तरफ देखते हुए कहा।

"मैडम देवदुर्ग जा रही है?" फ्यूल भरते सेल्समैन ने पुछा।

"हाँ; तुम क्यों पूछ रहे हो?" सुनीता ने आश्चर्य से पुछा।

"मैडम रात के समय सफर करने के लिए अब यह राज मार्ग सुरक्षित नहीं है। दो दिन पहले एक रहस्यमय जोड़े से डरकर एक व्यक्ति कार दुर्घटना का शिकार हुए और अब हस्पताल में मौत से जूझ रहे है।" सेल्समैन फ्यूल भरकर टैंक का ढक्कन बंद करते हुए बोला।

"हाँ यह बकवास मैंने अख़बार में पढ़ी थी। अब क्या हुआ, कैसे हुआ वो दुर्घटनाग्रस्त आदमी ही बता सकता है और ज्यादा बेहतर यह होगा कि तुम सिर्फ अपना काम देखो, यह मुफ्त की सलाह बाँटना बंद करो।" कहते हुए सुनीता ने फ्यूल का दाम चुकाया और अपनी कार आगे बढ़ा दी।

अजीब बेवकूफ आदमी है, यहाँ खड़ा खड़ा अन्धविश्वास फैला रहा है। एक तो रात का सफर उसपर यह मनहूस सोच, भाड़ में जाए, हर शुक्रवार को इसी टाइम इस राजमार्ग से निकलती आज कौन सी खास बात है जो अपना दिमाग खराब करूँ। आराम से ड्राइव करते हुए रात ११ बजे तक अपने घर पहुँच जाऊँगा और मम्मी के हाथ का गर्मागर्म खाना खाकर सो जाऊँगी।

सोचते हुए सुनीता ने अपनी कार के एक्सीलेटर पर अपने पैर का दबाव बढ़ा दिया।

विल सिटी से देवदुर्ग तक का ३०० किलोमीटर का यह सफर काली घाटी के बीहड़ से होकर निकलता है। राष्ट्रीय राजमार्ग बनने से पहले यह सड़क शाम को छह बजे के बाद सामान्य आवागमन के लिए बंद कर दी जाती थी। वजह थी काली घाटी के डाकू जो लूटपाट और अपहरण के लिए कुख्यात थे। लगभग १० साल पहले जैक नाम के एक घुड़सवार का नाम घाटी में गूँजने लगा, वो डाकुओ का शिकार करता था, सीधे गोली मारकर खत्म कर देता था। यहाँ तक कहा जाता था कि सात साल पहले देवा गैंग से हुई उसकी मुठभेड़ में उसने अकेले अपने दम पर पूरे गैंग का सफाया कर दिया था। जैक कौन था, सच था या झूठ था यह किसी को कभी पता न लग पाया। यह सच है कि पिछले सात साल से घाटी में डाकुओं का प्रकोप कम रहा और लोग इसका श्रेय उस रहस्यमय जैक को ही देने लगे।

कौन है यह जैक, कोई बहादुर आदमी ही होगा; अब या राजमार्ग जैक की वजह से सुरक्षित था या किसी और वजह से लेकिन मुझे तो पिछले एक साल से इस राजमार्ग पर सफर करने में कभी कोई दिक्कत नहीं हुई।

सोचते हुए सुनीता ने अपनी कार इस राजमार्ग के सबसे खराब हिस्से कर्नल दर्रे की तरफ बढ़ा दी।

यह दर्रा दस साल पहले सैकड़ों महिलाओं व बच्चियों के अपहरण व उन के साथ हुई दरिंदगी का गवाह बना था। दरिंदे थे काली घाटी में रहने वाले वो डाकू जिनके लिए इस तरह की हैवानियत कोई बड़ी बात नहीं थी लेकिन वक्त की धूल में वो दरिंदगी भी भुला दी गई और दर्रे में यातायात सामान्य हो गया।

लेकिन आज राज मार्ग कुछ सूना सा था कभी कभार कोई बड़ा सा ट्रक मार्ग के दूसरी तरफ विल सिटी की तरफ जाता नजर आ जाता था। हमेशा की तरह सुनीता ने कानों को राहत देने वाला संगीत कार के म्यूजिक सिस्टम पर चला दिया और ध्यान से कार ड्राइव करने लगी।

सुनीता मुझे तेरा यह रात का कार चलाना बिलकुल पसंद नहीं है, तुम उस बियाबान उजाड़ में कार चला कर आती हो तो मुझे बिलकुल अच्छा नहीं लगता है, जब तक तुम आ नहीं जाती हो मेरी जान सूखती रहती है।

माँ की बात सुनीता के कानों में गूँज गई।

माँ पचास की हो गई हूँ, पति छोड़ कर जा चुका है, सप्ताहांत में मैं विल सिटी में रहकर क्या करुँगी इसलिए शुक्रवार की शाम को ही ऑफिस छूटने के बाद घर चली आती हूँ तुम्हारे हाथ का खाना खाने के लिए।

सुनीता मुस्कुराते हुए धीमे से बोली।

वो विल सिटी से लगभग १०० किलोमीटर दूर आ चुकी थी और पीला पानी रिज पर चाय पीकर आगे चलने का इरादा था लेकिन पीला पानी रिज अभी ५० किलोमीटर दूर था। तभी न जाने क्या हुआ उसकी कार एक्सीलेटर प्रेस करने के बावजूद भी धीमी पड़ने लगी और एक वक्त ऐसा आया कार रुक गई।

सुनीता ने फ्यूल मीटर चेक किया, फ्यूल तो बहुत था कार में उसने एक बार फिर कार स्टार्ट करने की कोशिश की लेकिन कार स्टार्ट न हुई और राज मार्ग के किनारे खड़ी रही।

सुनीता कार से निकली और कार का बोनट खोल कर देखा। बोनट से धुंए का अंबार निकला और आग का भभका सा कार से निकला। सुनीता ने कार का बोनट ऐसे ही खुला रहने दिया और कुछ देर राजमार्ग पर ऐसे ही खड़ी रही।

"क्या हुआ मैडम कार खराब हो गई है क्या?" एक पुरुष की आवाज से सुनीता चौंक पड़ी।

उसने पीछे देखा साईकिल पर सवार एक युवक और एक युवती उसके पीछे खड़े थे।

"पता नहीं खराब हुई या नहीं लेकिन चलते-चलते रुक जरूर गई है।" सुनीता ने उन दोनों की तरफ देखते हुए जवाब दिया लेकिन वो आश्चर्यचकित थी कि वो दोनों रात के समय काली घाटी के बीहड़ में क्या कर रहे थे।

"मैडम यह जगह सुरक्षित नहीं है आप हमारे साथ सड़क के उस पार चल सकती है?" साईकिल पर सवार युवती ने सुनीता से पूछा।

"सड़क के दूसरी तरफ क्या सुरक्षा है?" सुनीता ने चिंता के साथ पुछा।

"वो सामने देखिए एक महिला और पुरुष एक बैल के साथ आ रहे है वो तीनों हैवान है, यदि आप यहाँ रहोगी तो आपका बचना मुश्किल है।" साईकिल सवार युवक ने कहा।

अब तक सुनीता की आँखें अँधेरे में देखने में अभ्यस्त हो चुकी थी उसे दूर से खाली राजमार्ग पर पैदल आते एक महिला अपने सिर पर गठरी रखे हुए, एक पुरुष एक बड़े से बैल का रस्सा अपने हाथ में थामे हुए दिखाई दिए। उन्हें देखकर सुनीता के रोंगटे खड़े हो गए, क्योकि पिछले सप्ताह एक आदमी को रात में इसी राजमार्ग पर ये महिला, पुरुष और उनका बैल दिखाई दिए थे और वो उस पुरुष के कुल्हाड़े से मरते-मरते बचा था।

"हाँ वो आ रहे है।" सुनीता डरते हुए बोली, "क्या हम सड़क के दूसरी और सुरक्षित रहेंगे?"

"हाँ मैडम सड़क के पार यह कुछ नहीं कर सकेंगे।" कहते हुए उस युवक ने सुनीता को राजमार्ग की दांयी तरफ वाली सड़क पर चलने का इशारा किया।

जब तक वो तीनों राजमार्ग की दायीं सड़क पर पहुंचे वो महिला पुरुष सुनीता की कार के सामने बैठ गए थे और कुछ ही देर बाद उस पुरुष ने बैल को मार डाला और उसके शरीर के हिस्से बड़े से बर्तन में भरने लगा। बहुत ही भयावह दृश्य था। जब वो पुरुष पूरा बैल उस बर्तन में भर चुका था तब वो अपना कुल्हाड़ा लेकर सुनीता की कार की तरफ बढ़ा और कार के पास जाकर कार के अंदर झाँकने लगा और कुछ देर बाद बाद उसने सड़क के दूसरी तरफ खड़ी सुनीता को अपनी जलती निगाहो से देखा और कुल्हाड़ा हाथ में लहराते हुए सड़क के पार सुनीता की तरफ बढ़ने लगा। लेकिन तभी तेज रौशनी से वो राजमार्ग नहा गया और एक तेजी से आता हुआ ट्रक उस कुल्हाड़े वाले को कुचलते हुए निकल गया।

सुनीता फ़टी फ़टी आँखों से उस हादसे को देखती रही और अपने पीछे खड़े उस युवा जोड़े की तरफ देखा जिनके साथ वो सड़क के इस तरफ आई थी। लेकिन उसके आस-पास कोई नहीं था।

कुछ देर सुनीता डरी सी खड़ी रही और फिर हिम्मत करके सड़क के दूसरी पार खड़ी अपनी कार की तरफ बढ़ गई।

सड़क पर उसे दुर्घटना का कोई चिन्ह नजर नहीं आया, न वो कुल्हाड़े वाला, न मरा बैल और न ही वो औरत।

सुनीता बुरी तरह डरी हुई थी उसके काँपते हाथों से अपनी कार खोली और उसमें बैठ कर कार स्टार्ट करने की कोशिश की और तीसरी बार में कार स्टार्ट हो गई। कार स्टार्ट होते ही सुनीता ने तेजी से कार आगे बढ़ा दी। जो कुछ उसने देखा वो उसकी समझ से बाहर था, वो कुल्हाड़े वाला कौन था? वो युवा जोड़ा कौन था? उसकी कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था। ये जो भी था उसके बारे में सोचते हुए उसने रात को उस राजमार्ग पर सफर न करने की कसम खाई और अपने कार तेजी से राजमार्ग पर आगे की तरफ बढ़ा दी।


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