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Kumar Vikrant

Comedy

4  

Kumar Vikrant

Comedy

पिटाई की सालगिरह : एलियन

पिटाई की सालगिरह : एलियन

4 mins
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गर्मी की लंबी और बोर कर देने वाली दोपहर में छत्तर दादा अपनी घुड़साल के विशाल बरामदे में पड़े तख्त पर लेट कर मजे से रेट्रो सांग्स सुनने में मस्त था तभी डमरूदास और डिप्पी ने घुड़साल के मुख्य द्वार में पैर रखा। 

उन्हें आते देख कर छत्तर दादा ने बुरा सा मुँह बनाया और जबरदस्ती अपनी आँखे बंद कर ली। 

'दादा अब सोने का यह ढोंग बंद करो.......' डमरूदास छत्तर दादा के तख्त के पास पड़े मोढ़े पर बैठते हुए बोला, 'दादा एक साल पहले आज के दिन डिप्पी की झोपड़दास नाम के एलियन ने जबरदस्त पिटाई की थी.........'

डमरूदास के मुँह से जो आवाज निकली वो एक औरत की आवाज थी। 

'कम बकवास कर जरा बेटे डमरूदास।' डिप्पी गुर्रा कर बोला, ' सिर्फ मैं ही नहीं पिटा था तू भी पिटा था, झोपड़दास ने तेरी खाल को ढोल की तरह बजाया था, भूल गया?'

डिप्पी के मुँह से निकली आवाज ऐसी थी जैसे आरी से लोहा काटा जा रहा हो।

'चुप हो जाओ ड्रामेबाजों।' छत्तर दादा उन दोनों के मुँह से निकलने वाली अजीबोगरीब आवाजों को सुनकर गुस्से से बोला, 'अबे कहीं किसी ड्रामा कंपनी में भर्ती हो गए हो जो मेरा सिर खाने आ गए.........'

'दादा आज सुबह से हम दोनों के साथ यह हो रहा है।' डिप्पी और डमरूदास अपनी महिला और धात्विक आवाज में एक साथ बोले, 'और हम यह जानबूझ कर नहीं कर रहे है। उस डमरूदास एलियन की वजह से यह सब हो रहा है।'

'तो मेरे पास क्यों आए हो?' छत्तर दादा गुस्से से बोला, 'ये मेरा घुड़साल है, कोई चिड़ियाघर नहीं है।'

'दादा लगता है आज हमारी झोपड़दास से मिलने की एनिवर्सरी है।' डिप्पी महिला वाली आवाज में बोला, 'इसलिए हम दोनों के मुँह से ये आवाजे निकल रही है।'

'ये आवाजे निकल रही है तो मैं क्या करुँ?' छत्तर दादा आश्चर्य से बोला, 'तुम्हे अपने दिमाग के इलाज की जरूरत है, जाओ किसी पागलो के डॉक्टर के पास जाओ।'

'दादा यह उस एलियन झोपड़दास का चक्कर है।' डिप्पी धात्विक आवाज में बोला, 'तुम्हारे सेटी वालो से संबन्ध है, जरा उन्हें फोन लगाओ और हमारी परेशानी का हल पूछो।'

'दिमाग खराब मत करो निकम्मो।' छत्तर दादा गुस्से से बोला, 'अब जरा चलते-फिरते नजर आओ।'

'दादा हम पर रहम करो नहीं तो आज कुछ अनहोनी हो जाएगी।' डमरूदास महिला की आवाज में बोला, 'दादा पिछले साल उस झोपड़दास ने हमें बहुत मारा था।'

'अबे पागलो तुम्हें किसने मारा था, क्यों मारा था?' छत्तर दादा गुस्से से बोला, 'इस सबका मेरे पास कोई इलाज नहीं है........अब मेरी दोपहर खराब मत करो और यहाँ से दफा हो जाओ।'

'खामोश हो जा बुड्ढे।' डिप्पी के मुँह से एक खतरनाक आवाज निकली और वो छत्तर दादा की गिरेबान पकड़ कर गुर्रा कर बोला, 'अब जरा भी बकवास की तो तेरा सिर फोड़ दूँगा।'

डिप्पी की बात सुनकर छत्तर दादा सहम कर पीछे हट गया। 

'उठ निकम्मे इस बुड्ढे की गिरेबान क्यों पकड़ रहा है, चल राँझा मैदान चल वहीं वो झोपड़दास का बच्चा मिला था........' डमरूदास महिला की आवाज में गुर्राकर बोला, 'आ आज या तो वो नहीं या आज हम नहीं।'

'ज्यादा बहादुर बनता है मोटे।' डिप्पी भड़क कर बोला, 'आ तू मुझ से ही निपट ले।'

'आजा आज तेरी खाल का ढोल न बजाय तो मेरा नाम तेरा बाप नहीं।' कहते हुए डमरूदास डिप्पी से भिड़ गया। 

उसके बाद जो हुआ वो आश्चर्यजनक था। वो दोनों डेढ़ कुंतल डेढ़ कुंतल के मोटे एक दूसरे से सूमो पहलवानों की तरह भिड़ गए और एक दूसरे को उठा-उठा कर पटकने लगे। उन दोनों में से एक छत्तर दादा के तख्त पर गिरा तो तख्त के टुकड़े-टुकड़े हो गए। दूसरा बरामदे में पड़े मोढो पर जा गिरा तो दो मोढ़े चकनाचूर हो गए। छत्तर दादा ने भाग कर अपनी जान बचाई। 

उन दोनों ने पूरे आधे घंटे ऐसा आतंक मचाया की छत्तर दादा जैसे दिलेर आदमी की रूह भी कांप गई। तभी दूर आसमान में बादल गरज उठे। 

अरे बेमौसम की बरसात- छत्तर दादा ने सोचा। 

लेकिन आसमान में सिर्फ एक बादल का बड़ा सा टुकड़ा था जो एक बड़े से झोंपड़े का आकार लिए हुए था। छत्तर दादा आसमान की तरफ देख ही रहा था कि उस बादल ने डिप्पी और डमरूदास का आकार ले लिया और वो आकार आसमान में ही लड़ने लगे। लड़ाई ज्यादा देर न चली और जल्दी ही वो बादल का टुकड़ा गायब हो गया। छत्तर दादा ने जो देखा था उसे उस सब पर यकीन नहीं आ रहा था वो अपना सिर खुजाते हुए अपने बरामदे की तरफ देखने लगा। डिप्पी और डमरूदास बरामदे की जमीन पर पड़े हाय तौबा कर रहे थे। 

कुछ देर बाद वो दोनों उठ बैठे और बरामदे में पड़े टूटे फूटे सामान को देखकर एकदम छत्तर दादा के पैरो में गिर पड़े और बोले, 'हमें माफ़ कर दो दादा, हमें न जाने क्या हो गया था। हम आज ही आपका सारा टूटा सामान हटवा कर इसकी जगह नया सामान रखवा देंगे।'

इस बार उनकी मुँह उनकी वास्तविक आवाजे निकल रही थी जो कि किसी भैसे के डकारने जैसी थी। 

डिप्पी और डमरूदास माफ़ी मांगने की औपचारिकता पूरी करके तेजी से घुड़साल के बाहर निकल गए। छत्तर दादा आज हुए इस अजूबे की वजह से अब तक सदमें में था और सोच रहा था कि गुलफाम नगर के ये सारे हादसे, ड्रामे उसकी घुड़साल में ही क्यों होते है?


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