Kumar Vikrant

Tragedy Inspirational

4.1  

Kumar Vikrant

Tragedy Inspirational

लिव इन रिलेशनशिप : विवाह

लिव इन रिलेशनशिप : विवाह

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"ये ज्यादा दिन नहीं चलेगा, ये लिव इन रिलेशनशिप मेरे पसंद का रिश्ता नहीं है।" मिली उदासी भरे स्वर में बोली, "रितेश तुम समझते क्यों नहीं मैं इस रिश्ते में न रह सकूँगी।"

"तो मिली क्या चाहती हो तुम?" रितेश गुस्से से बोला, "हम मजे से रह रहे है, हम दोनों खुश है, आज ये बिना मतलब की बकवास तुम क्यों कर रही हो?"

"रितेश मैं क्या चाहती हूँ तुम्हे अच्छी तरह पता है।" मिली शांत स्वर में बोली, "मैंने तुमसे प्रेम किया है और मेरे लिए प्रेम की परिणति विवाह ही है, मुझे तुमसे विवाह करना है, रितेश तुम कहते हो तुम मुझसे प्रेम करते हो, प्लीज मुझसे विवाह कर लो।"

"ये किस तरह की बकवास है?" रितेश गुस्से से बोला, "विवाह प्रेम की परिणति कब से होने लगी, क्या मीता और फिरोज ने विवाह किया था?"

रितेश ने एक मशहूर लेखिका और चित्रकार का उदाहरण देकर मिली की तरफ देखा। 

"वो कौन थे, कैसे रहते थे, उनके लिए प्रेम का क्या मतलब था मुझे नहीं पता।" मिली फिर शांत स्वाभाव से ही बोली, "लेकिन मेरे लिए प्रेम की पूर्णता विवाह ही है। यदि विवाह नहीं तो मुझे प्रेम एक हवस से ज्यादा कुछ नहीं लगता है, बोलो क्या तुम मुझसे विवाह करके मेरे प्रेम को तुम पूर्णता दोगे?"

"मिली हम एक साल से साथ-साथ रह रहे है, और तुम मेरे साथ अपनी मर्जी से रह रही हो।" रितेश रहस्यपूर्ण अंदाज में बोला, "तुम्हारे साथ कोई बलात्कार नहीं किया है मैंने। अब ये विवाह का ड्रामा छोड़ो मुझे ऑफिस टूर पर जाना है, एक हफ्ते बाद जब मैं वापिस आऊँ तो तुम्हारे सिर से ये विवाह वाला भूत उतर जाना चाहिए।"

बलात्कार वाली बात से मिली आहत हुई लेकिन फिर भी शांत स्वर में बोली, "तो तुम मुझसे विवाह नहीं करोगे।"

"विवाह जैसी जिम्मेदारी निभाने के लिए मेरे पास टाइम नहीं है।" रितेश उठते हुए बोला, "बेबी अब जरा मुस्कुरा दो ताकि मेरी ट्रिप मजेदार रहे।"

"रितेश तुम्हारे लिए विवाह की कोई वैल्यू नहीं है लेकिन मेरे लिए है।" मिली उदास स्वर में बोली, "मुझे अफ़सोस के साथ कहना पड रहा है कि मैं भी आज उन लड़कियों में शामिल हो गई हूँ जिनका शारीरिक शोषण विवाह के सपने दिखा कर कहा गया लेकिन इस कर्म में मैं तुम जितनी दोषी हूँ इसलिए तुम्हे दोष नहीं दूँगी। पर अब और शोषण नहीं; मुझे अफ़सोस है मैंने प्रेम के लिए गलत इंसान को चुना। तुम्हे जहाँ जाना है जाओ लेकिन अब मैं वापिस अपने माता-पिता के पास जा रही हूँ, हो सकता है वो मुझे माफ़ कर दे और मुझे फिर से अपनी बेटी का दर्जा दे दे।"


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