Kumar Vikrant

Fantasy

4.2  

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६०० साल पुरानी स्त्री : साइंस

६०० साल पुरानी स्त्री : साइंस

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वर्ष २८२२ 

स्पेशशिप ऊर्जा ३१२३

"निया क्या तुमने सब हैबरनेशन चैम्बर चेक कर लिए ? क्या कोई भी जीवित नहीं है ?"

"नहीं सिद्धार्थ सब मर चुके है, वो सब इस आकाशगंगीय यात्रा के १५० साल पूरे होते-होते ही मर चुके थे।"

"यह बहुत दुखद है, उनकी मृत्यु का कारण ?"

"उनके शरीर में जीवन तरल की कमी, लगता है यह शिप किसी बहुत ही डेन्स चुंबकीय क्षेत्र से निकला है जहाँ कुछ समय के लिए शिप का पावर फेलियर हुआ होगा और जब तक शिप ऑटो रिकवरी करता तब तक हैबरनेशन चैम्बर में सोये क्रू सदस्य मौत की नींद में सो चुके होंगे।"

"क्या यह चुंबकीय क्षेत्र किसी अज्ञात ब्लैक हॉल का हो सकता है ?"

"लगता तो यही है, लेकिन इस शिप की शील्ड ने न केवल शिप को बचाया बल्कि इसे पुनः विक्टा २८२३ के मार्ग पर भी अग्रसर कर दिया।"

"कहने का मतलब यह हुआ केवल हम दोनों प्रकाश की आधी गति से चलते हुए ३०० साल की यात्रा कर एक सप्ताह में विक्टा २८२३ पर पहुँच जाएँगे ?"

"हाँ सिड, अभी हमारी यात्रा का एक सप्ताह बचा है और हम इस शिप पर १० मृत क्रू सदस्यों के शरीरों के बचे हिस्सों के साथ है।"

"यह दुर्भाग्य था उनका, आओ सबसे उनके शरीर उनके चैम्बर से इजेक्ट करके अंतरिक्ष में उनका अंतिम संस्कार कर देते है, उसके बाद हम विक्टा २८२३ की लोकेशन पर काम करते है।"

विक्टा २८२३ की बाहरी कक्षा

"निया हम विक्टा २८२३ की बाहरी कक्षा में है और तीन सूर्यो के इस गृह का एक मात्र चंद्र्मा और पहला सूर्य सिर्फ एक घंटे के लिए एक लाइन में होंगे और उस समय जो सूर्य ग्रहण होगा उसकी वजह से विक्टा २८२३ पर कुछ देर के लिए अँधेरा हो जाएगा और उसी समय इस ग्रह पर निर्मित दहकते हुए अनगिनत बिल्लोरी घन इतने ठंडे हो हो जाएँगे कि हम उन्हें उठा सके और उन्हें शिप में लाकर वापिस पृथ्वी का सफर पूरा कर सकें।"

"सिड अगर उसी बीच सूर्य की कोई किरण इस ग्रह पर पड़ने लगी तो ?"

"तो हम उन बिल्लोरी घनों की आग से जलकर राख हो जाएंगे। लेकिन ऐसा मत सोचो, हम वक्त रहते उन बिल्लोरी घनों को अपने शिप में ले आएँगे और पृथ्वी की तरफ वापसी का सफर शुरू कर देंगे।"

"सही कह रहे हो सिड यह बिल्लोरी घन हमारी पृथ्वी को असीमित समय के लिए ऊर्जा देते रहेंगे और वहाँ जीवन शांति से जारी रहेगा।"

"भारतीय वैज्ञानिक छत्रकेतु की ४०० साल पहले की गई इन बिल्लोरी घनों की खोज आज सच्ची साबित होने वाली है। आज से हमारी पृथ्वी की और यात्रा ३०० साल की होगी और तब तक हमारी पृथ्वी एक भयानक शीत युग में प्रवेश कर चुकी होगी और यदि हम समय से वहाँ न पहुँचे तो यह शीत युग पृथ्वी पर हर प्रकार का जीवन समाप्त कर देगा।"

"सिड देखो विक्टा २८२३ पर सूर्य ग्रहण प्रारम्भ हो चुका है, आओ हम उन बिल्लोरी घनों को इकट्ठा करते है।"

वर्ष ३१२३ 

स्पेश शिप ऊर्जा ३१२३

अंतरिक्ष से पृथ्वी के ऊपर छाई सफेद बर्फ को देख कर भी न जानें क्यों निया को घर वापिस आने की कोई खुशी नहीं हो रही थी। ६०० साल हैबरनेशन चैम्बर में सोने के बाद वो खुद को ६०० साल पुरानी वो स्त्री समझ रही थी जो अपने साथ आकाशगंगीय यात्रा कर रहे साथियों को खोकर वापिस पृथ्वी पर पहुँच रही थी। 

सिड के साथ उसने १०० बिल्लोरी घन इकट्ठे कर उनके स्पेशशिप ऊर्जा ३१२३ में पहुँचा कर अपनी वापसी की यात्रा सही सलामत शुरू की थी। ३०० साल पहले उस दिन उन्होंने स्पेशशिप ऊर्जा ३१२३ पर अपनी सफलता का एक छोटा सा जश्न मनाया था और उसके बाद वो दोनों अपने-अपने हैबरनेशन चैम्बर में जाकर अपनी ३०० साल की शीत निद्रा में सो गये थे। 

एक सप्ताह पहले जब निया उस शीत निद्रा से उठी तो उसने सिड को उसके हैबरनेशन चैम्बर में मरा पाया, उसकी मृत्यु भी वापसी के आधे सफर यानि १५० साल पहले हुई थी। 

आखिर क्या है उस समय क्षेत्र में जो इतने सुरक्षित स्पेश में यात्रियों की मृत्यु का कारण बना। इस सवाल का उसके पास कोई जवाब नहीं था। उसने सिड का अंतरिक्षीय अंतिम संस्कार किया और पृथ्वी की तरफ बढ़ गई थी। 

निया ने पृथ्वी की कक्षा में प्रवेश किया और भास्कर ३००० अंतरिक्ष केंद्र की लोकेशन तलाश करने लगी। 


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