रैना बीती जाए
रैना बीती जाए
रुक जा रात ठहर जा रे चन्दा,
बीते न मिलन की ये बेला,
आज चाँदनी की नगरी में,
अरमानों का मेला,
आज जनाब का मूड देखकर तो लग रहा था कि ये रात छोटी न हो... पता नहीं कभी कभी क्या हो जाता है इन्हें... दुनिया भर की रोमांटिक बातेँ फोन पर करते हैं,
सुनकर ऐसा लगता है जैसे सारे सिग्नल तोड़ के बस अभी पहुंचने वाले हैं,
जब जब ब्रेक इन्हें ब्रेक मिलता, हमारे मोबाइल की रिंग शुरू हो जाती,
हाय जान, क्या कर रही हो, आज तो मौसम बड़ा सुहाना हुआ जा रहा है, काश तुम पास होतीं तो प्यार की बारिश में भीगते हम तुम, और फिर तुम भीगती और मैं तुम्हें भीगते देखता,
अच्छा जी, क्या इरादा है आपका, की हम भीग जाएं और निमोनिया हो जाए, और आप दूर से ये नजारा देखकर खुश होते,,
यार तुम ना सच में बड़ी खड़ूस हो, यहां मैं प्रेम की बारिश कर रहा हूं और तुम बीमारियों के नाम ले रही हो..
तो क्या गलत कर रहे हैं, आप ही तो कह रहे हो कि तुम्हें भीगता देखूँ, मतलब आप छतरी लगा कर रहेंगे न..
अरे यार, मेरे कहने का मतलब है, जब बारिश की बूंदे तुम्हारे गालों पर आकर रुकती, तुम्हारे होंठों पर ठहरती, तुम्हारे घुंघराले बालों पर ओस की तरह चमकती जब तुम्हारा साड़ी का आँचल तुम्हारे तन-बदन से लिपटता, और मैं तुम्हारे इस रूप का आनंद लेता न,
जहेनसीब, क्या श्रंगार रस से बारिश को सजाया आपने, आपको प्रोफेसर नहीं बल्कि कवि होना था,
अजी, हमारा ह्रदय तो कवि का ही है, प्रोफेसरी तो चाकरी है जी, वर्ना हमारा बस चले तो तुम पर और तुम्हारे इस रूप पर दिन रात कविता करते.. सोचो जब दूर से हम कल्पनाओं में तुम्हें ऐसे देखकर बावले हुए जा रहे हैं, तो पास होते तो क्या करते,
ये आप ही बता दीजिए कविराज,
एक बात बताएं,
जी बता दीजिए,
तुम न चाबी लगाने में एक्सपर्ट हो,
लो जी, अब हम ने ऐसा क्या कह दिया..
यार तुम सीधे सीधे ये पूछ रही हो कि मैं प्यार कैसे करूंगा, अब ये कोई बताने की बात होती है क्या,
ओह हो,,अच्छा.. ये तो मुझे पता ही नहीं था..
देखो यार, आज मौसम और दिल दोनों बेईमान हुए जा रहे हैं, आज कोई काम नहीं, तुम तैयार रहना, बाहर चलेंगे,
ऐसी बारिश में,
उफ्फ, पूरी बात तो सुन लिया करो न..
अच्छा, बोलो..
तुम तैयार रहना,आज डिनर बाहर, और उम्मीद बिलकुल नहीं है कि बारिश रुके तो आज डिनर के बाद बस भीगना है, बारिश में भी और प्यार में भी,
ऐसी यादगार बनाएंगे इस बरसात की रात को, कि जब हम दोनों बूढे हो जाएंगे न, तब अपने नाती पोतों को अपने रोमांस के किस्से सुनाया करेंगे,
मुझे बहुत जोर की हँसी आ गई,
ओये, मैंने कोई जोक मारा क्या जो यूं खिलखिला रही हो..
पता है, कभी कभी न तुम बिल्कुल बच्चों जैसी बातें करते हो..
ओये मेरे होने वालों बच्चों की अम्मा फिलहाल इस बच्चे पर ध्यान दो, बस कुछ देर में बन्दा हाजिर,
प्रिया जरा होल्ड करो तो,
तीन मिनिट बाद,
हां प्रिया, सुनो न,
जी बोलिए,
यार प्रिंसिपल साहब का बुलावा है, बाकी बातेँ घर आकर,
मैं समझ गई थी आज जनाब का रोमांस सिर चढ़कर बोल रहा है, जल्दी से घर के छुटपुट काम खत्म किए, अब चूँकि खाना तो बनाना नहीं था, इसलिए उनके कपड़े निकाल कर मैं खुद तैयार होने चली गई, उन्हें आने में करीब बीस मिनिट बाकी थे,
सच कहूँ तो आज मेरा भी दिल चाह रहा था कि ये रात जल्दी न बीते,रातें तो रोज आतीं हैं, पर कोई कोई रात की सुबह जल्दी न हो ऐसे दिल चाहता है,
लता जी का गीत गुनगुनाते मैं तैयार हो गई,, इतने में ये भी आ गए....
वक्त के पाबंद जनाब आ भी गए, मुझे देखकर तो बाहों में लिया और एक दीर्घ चुम्बन लेने के बाद बड़ी मायूसी से कहने लगे....
यार प्रिया, एक प्रॉब्लम हो गई..
क्या हुआ,
प्रिंसिपल पल साहब ने एक जरूरी काम दिया है, और उसे करते शायद मुझे काफी रात होगी, जो प्लान हमने बनाया था वो शायद नहीं हो पाएगा,
साॅरी यार,
उफ्फ, इसमें साॅरी की क्या बात है.. काम ज्यादा जरूरी है न.. और मौसम भी देखिये, बारिश के साथ तूफान की भी संभावना नजर आ रही है, ऐसे में बहार जाना सही नहीं है..
अरे जान मेरी, तूफान तो आता ही, यदि ये कमबख्त प्रिंसिपल ने काम न दिया होता..
अरे अरे, ऐसे नहीं कहते,
आप फ्रेश हो जाओ, मैं चाय बना देती हूं, फिर खाना बना लूँगी..
चाय नहीं यार, कॉफ़ी बना दो, तुम ना बहुत स्वीट हो कहते हुए मेरी तरफ एक हवाई चुम्बन उछालते हुए जनाब फ्रेश होने चले गए,
मैं भी चेंज करके रसोई में उनके लिए कॉफी बनाने चली आई,
प्रिया आओ यार, कॉफी साथ ही पीते हैं, फिर मैं अपने काम पर लगूंगा..
जी अभी आई कहते हुए मैंने उन्हें काफी पकड़ाई..
प्रिया खाना कुछ हल्का सा बनाना, मैं देर से खाऊँगा, तुम खाकर सो जाना,
वैसे ऐसा क्या काम दिया सर ने जिसमें इतना वक्त लगेगा.
यार एक लेख तैयार करना है, और कल जल्दी जाकर उन्हें देना है,
किस विषय पर..
बता दिया तो मदद करोगी क्या.. तुम तो इस विषय में एक्सपर्ट हो, बड़ा शरारती लहजा था उनका..
ऐसा क्या है, मैंने भी मुस्कुराते हुए पूछा..
सिंधु घाटी की सभ्यता,
फिर तो बीत ही जाए रैना कहती हुई मैं भाग गई.....

