तपस्या
तपस्या
पता है ?
क्या ?
हमें यकीन हो गया कि आप और शिव एक ही हैं।
बड़ी देर से पता चला।
नहीं, ऐसी बात नहीं है।पता तो पहले से था,, पर,
पर क्या ?
आजकल हम शिव के साथ साथ आपसे भी बात करने लगे हैं।
अरे वाह! ये तो बहुत अच्छी बात है, मेरी कमी महसूस नहीं होगी।
क्यों ? आप कहाँ जा रहे हैं,, जो कमी की बात कर रहे हैं।
मैं कहां जाऊँगा, मैं तो दिल में हूँ तुम्हारे।
सुनिए।
हां कहो न।
बहुत मुश्किल है।
क्या ?
आप बिन रहना।
पर रहना तो पड़ेगा न।
एक बात कहें, आप नाराज तो नहीं होंगे ?
तुमसे कभी नाराज हुआ हूं, बोलो क्या बात है ।
जिंदगी से मोह खत्म सा हो गया है, अब जीने की बिल्कुल भी इच्छा नहीं है। ना भूख लगती है ना प्यास लगती है। कई बार तो दिल में गलत विचार भी आते हैं कि क्यों जी रहे हैं हम।
ऐ! ये क्या कहे जा रही हो। संभालो खुद को। कुछ कमी है क्या मेरे प्यार में, मेरे होते ऐसे विचार कैसे आ सकते हैं।
प्लीज़, ऐसे मत कहिये ना, आपसे तो प्यार ही मिला है। पर..
ये आज इतने पर, किन्तु, परंतु क्यों। शबरी ने कितनी प्रतीक्षा की राम की, तो राम मिले न।
हम बहुत मामूली इंसान हैं, आप हमारी तुलना उनसे कैसे कर सकते हैं ?
तुम्हारा प्यार भक्ति से कम तो नहीं, हम जरूर मिलेंगे।
समय से डर लगता है, ना जाने कब मिलेंगे आप, इंतजार की अवधि हमारी उम्र को कहीं पीछे न छोड़ दे।
ऐसे नहीं कहो, तुम निराश अच्छी नहीं लगती हो।
हमें कुछ नहीं चाहिए, कुछ भी नहीं, बस इन नयनों को आपका दर्शन हो जाए। उसके बाद कुछ भी देखने की ख्वाहिश नहीं रहेगी।
मैं हर पल तुम्हारे साथ हूँ।
आप हमसे कभी नाराज ना होना।
कभी नहीं।
कभी हमें गलत ना समझना, वादा करिए ।
वादा रहा।
हम क्या हैं, हम में ना जाने कितनी कमियां होंगी, हम बुरे भी होंगे,पर आज हमारी जिंदगी का बस एक ही सच है।
क्या ?
हम आपसे बेइंतहा प्यार करते हैं, हमारे रोम रोम में सिर्फ और सिर्फ आप बसे हुए हैं।पर,,
फिर पर!
,,,,,,, तुम्हारी ही हम रचना हैं.
तुम्हारे दिल में ही रहना है
,,,,,,,,बता भी दो अब सनम मेरे
अभी कितना और तड़पना है....

