रानी रूपमती बाजबहादुर
रानी रूपमती बाजबहादुर
प्रेम एक ऐसा शब्द है, जो अपने आप में पूरा नहीं, इसलिए तो ज्यादातर अमर कहानियां अधूरी ही इतिहास के पन्नों में दर्ज हैं।
प्रेम एक अहसास है, एक तड़प है अपने प्रिय से मिलने की , जैसे मीरा का अपने कृष्ण से , लैला को मजनू से सोहनी को महीवाल से।
एक ऐसी ही अमर प्रेम कहानी है , बाजबहादुर और रूपवती की।
मांडू के महल की दीवारों से आज भी इस अधूरे प्यार, बाजबहादुर और रूपमती को एक दूसरे की पुकारने की आवाज आती है, ऐसा वहां महसूस करने वाले कहते हैं।
बारिश की फुहारों में, महल से खंडहर हुए दीवार सब उनके होने का अहसास कराते हैं।
1526 का भारत जब पूरे भारत वर्ष में अकबर का शासन था।राजपूत राजाओं का पतन और मुगलों का उत्थान चरम पर था।
मालवा मध्य भारत का सुल्तान मांडू के अंतिम स्वतंत्र शासक बाजबहादुर अपनी रंगीन मिजाजी और कलाप्रेमी के रूप में प्रसिद्ध था।
वह एक शायर , कवि के साथ साथ संगीतज्ञ भी था।
रूपमती यथा नाम तथा गुण, परम रूपसी, ललिता, सुनयना, जो देखे सो बस देखता ही रहे।
भारत की सुंदर स्त्रियों में से रूपमती की अनेकोनेक तस्वीरों को पेंटरों ने अपने कूची से रंग भरा था। आज भी ब्रिटिश म्यूजियम में रानी रूपमती की तस्वीर लगी है।
रूपमती के बारे में इतिहासकारों का अलग अलग मत है , कुछ इतिहासकार मानते हैं कि रूपमती एक साधारण गड़ेरिया की पुत्री थी , किसी का मानना है कि वो धर्मापुरी में रहने वाली राजपूत कन्या थी।
एक बार बाजबहादुर शिकार के लिए निकले।
सत्ता के मद में चूर, निरीह प्राणियों को शिकार बनाने वाले बाजबहादुर को आज ये नहीं मालूम था कि वो आज किसी के रूप , गायन का शिकार होने वाले हैं।
अचानक वीणा की मधुर आवाज के साथ किसी नारी के सुरीला गायन सुन बाजबहादुर के कदम ठिठक गए।
झाड़ियों की ओट से देखा , एक अत्यंत रूपसी नारी वीणा की स्वरलहरियों के साथ मधुर गायन कर रही।बाजबहादुर आवाज सुन एक दम मुग्ध हो गए।
जब उनकी तंद्रा टूटी तो रूपमती उन्हें निहार रही थी।
बाजबहादुर ने उसके गायन की तारीफ की , और उसका परिचय पूछा , रूपमती ने अपना परिचय दिया।
सुलतान ने रूपमती को अपना परिचय दिया। सुल्तान पहली ही नजर में रूपमती के गायन और रूप के दीवाने हो चुके थे।
किसी भी सुल्तान के लिए किसी आम स्त्री को अपनी मलिका बनाना आसान होता , लेकिन बाजबहादुर का रूपमती के लिए प्रेम पवित्र था।उसने रूपमती से विवाह का प्रस्ताव रखा। लेकिन किसी आम कन्या की तरह रूपमती ने ये सहर्ष प्रस्ताव ठुकरा दिया।
रूपमती ने विवाह की शर्त रखी _
वह कभी अपना धर्म नहीं छोड़ेगी।
मां नर्मदा को बिना देखे पूजन किए वह अन्न जल ग्रहण नहीं करती इसलिए वह बाजबहादुर की रानी नहीं बन सकती।
प्यार, जाति , धर्म के सभी बंधनों से परे है।
खुसरो ने लिखा था
"खुसरो पाती प्रेम की बिरला बांचे कोय
वेद, पुराण , पोथी पढ़े , प्रेम बिना का होय।"
बाज रूपमती के इश्क में पागल थे , उन्होंने अपने इश्क के लिए हर दीवार गिरा दी।
बाजबहादुर ने रूपमती से विवाह पहले हिंदू रीति से और फिर इस्लामी रीति से की।
उन्होंने रूपमती के लिए 3500 फीट की ऊंचाई पर एक महल बनवाया, जहां सुबह उठते ही मां नर्मदा के दर्शन हो सके।कोहरे की वजह से दर्शन न होने की स्थिति में रूपमती महल में ही रेवा कुंड का निर्माण कराया, जिसमें नर्मदा नदी का पानी रहता था।
रूपमती और बाजबहादुर एक दूसरे के प्यार में इस कदर खो गए थे कि शासन पर उनकी पकड़ ढीली हो रही थी।
मांडू की फिजाओं में अब दोनों का संगीत गूंजता था। कला, संगीत , शायरी की महफिलें जमा करती थीं।
अकबर ने अदम खान के नेतृत्व में मालवा की कमजोर सैन्य व्यवस्था को होते देख सेना को भेजा।
बाजबहादुर को जंग के लिए जाना था अपनी प्यारी रूपमती को छोड़।
बाजबहादुर ने जी भर कर रूप को निहारा
"आ साजन मोरे नयनन में, सो पलक ढांप तोहे दूं।
न मैं देखूं ओरन को, न तोहे देखन दूं।"
रोजाना खबर बुरी ही आ रही थी , रूपमती का दिल बैठा जा रहा था।आखिर खबर मिली की बाज को बंदी बना लिया गया है और अब मुगल सेना नगर में प्रवेश कर महल की ओर आ रही है।
रूपमती का जैसे सब लुट गया था, वह अपने आप को मुगलों के हाथ नहीं लगना चाहती थी।वह अपने प्यार के लिए समर्पित थी , इसलिए उसने अपनी जान देना ज्यादा सही लगा , आखिरकार जब तक अदम खान उस तक पहुंचता उसने अपनी जान दे दी।
कहते हैं, रूपमती की मृत्यु से अकबर बड़ा आहत हुआ , उसने बाज बहादुर को कैद से मुक्त कर दिया , लेकिन अपनी रूपमती की मृत्यु की खबर सुन बाजबहादुर ने भी रूपमती के मजार पर अपना सर पटक पटक कर अपनी जान दे दी।
अकबर आखिर इन प्यार के परिंदो से हार गया जो मर कर भी अमर हो गए अपने प्यार के लिए।
आखिर 1568 में अकबर ने बाजबहादुर का मकबरा बनवाया जिसपर लिखा था आशिक_ए_सादिक और रूपमती की समाधि पर लिखवाया शहीदे ए वफा।
प्रेम की कोई सीमा नहीं इसे देश , काल , सीमा, जाति , धर्म में नहीं बांधा जा सकता है।मिशाल है बाजबहादुर और रूपमती का प्रेम।

