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Shailaja Bhattad

Abstract

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Shailaja Bhattad

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फ़र्क पड़ता है

फ़र्क पड़ता है

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"मेरा नाम रमी नहीं रमा है। तुम बार-बार बोलने पर भी गलत ही लिखती हो। क्यों?"
 "नाम में क्या रखा है। एक अक्षर इधर-उधर हो जाए तो क्या फ़र्क पड़ता है।"
 "फ़र्क पड़ता है।"
"मुझे नहीं लगता।"
 "ठीक है।"
 रमा ने अपने साथ ऑफिस में  काम कर रही एक महिला हरिप्रिया से शिकायती लहजे में कहा।
 "अभी तो तुम कह रही थी न फ़र्क पड़ता है। फिर यह क्या है? मेरा नाम तुमने हराप्रिया क्यों लिखा?"
 "हाँ ! सही कहा, फ़र्क मुझे अभी-भी पड़ता है, इसीलिए तुम्हारा नाम हराप्रिया लिखा और अब तुम्हें भी फ़र्क पड़ेगा।"


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