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Shailaja Bhattad

Abstract

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Shailaja Bhattad

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परिपक्व निर्णय

परिपक्व निर्णय

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"माँ, बिसलेरी में पानी आता कहाँ से है?" होटल में डाइनिंग टेबल पर रखी बिसलेरी को देख चिंटू ने अपनी माँ सीमा से सवाल किया। "फिल्टर से।" "और फिल्टर में?' "नल से।' "नल में?" "नदी, तालाबों से।' "लेकिन हमारे घर के पास वाली नदी तो सूख गई है न? तो क्या बाकी नदियों में पानी है?" "अभी तक तो है।" एक गहरी साँस लेते हुए सीमा ने जवाब दिया। "फिर बाद में?"

 "..."

 "लेकिन नदी, वर्षा के पानी से भरती है न? और वर्षा तो पूरे साल नहीं होती; फिर? और क्या हर साल वर्षा होने की गारंटी है?"

 "है,अगर...।"

 "अगर क्या, माँ?" सीमा की बात पूरी होने से पहले ही बिट्टू पूछ बैठा। "अगर सब मिलकर पेड़ लगाए तो...।"

 "जब पता है तो फिर लोग पेड़ लगाते क्यों नहीं?"

 "यह सब इनको समझाए कौन?"

 "लेकिन माँ, आपको नहीं लगता? यह हमें भी समझने की आवश्यकता है।" 
अपने पुत्र द्वारा आईना दिखाने वाले सवाल को सुनकर व समझकर सीमा ने सामने बैठी सासु माँ से मुखातिब होकर कहा-

"माँजी, हम अपनी नई खरीदी हुई जमीन पर, किराए पर देने के लिए मकान नहीं बनवाएँगे। उस जमीन पर लगे पेड़ नहीं काटेंगे, बल्कि वहाँ पर एक माली रखकर फलोद्यान बनाएँगे।"
माँ को समय रहते सही निर्णय लेते सुन, राहुल भाव-विभोर होकर माँ के गले लगने से अपने आप को रोक नहीं सका।
"मेरा पोता बहुत समझदार है।" कहने से दादी भी अपने आप को रोक न सकी।
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"चाणक्य वार्ता" राजभाषा हिन्दी की संपूर्ण अंतरराष्ट्रीय पाक्षिक पत्रिका में 1-15 January 2026 को प्रकाशित।




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