नोलेज की बारिश
नोलेज की बारिश
कभी कभी कोई घटना आपको विज्ञान से परे भी कोई दुनिया है ,उसे मानने पर मजबूर कर देती है।
ऐसा ही हुआ नीरज के साथ
अरे प्रिया ,तुम बाहर क्यों खड़ी हो?घर नहीं चलना क्या?
क्या करूं...... ये बारिश कम होने का नाम नहीं ले रही (अजीब ,मुंह बनाते हुए)।
देखो ना। बारिश और लॉकडॉउन के कारण कोई भी टैक्सी सर्विस कॉल रिसीव नहीं कर रही _प्रिया ने कहा।
नो प्रोब्लम ,चलो मैं तुम्हें छोड़ देता हूं।_नीरज ने कहा।
अरे नहीं बेकार तकल्लुफ न करो,मैं एक और शिफ्ट कर लूंगी,अगर बारिश नहीं रुकी तो।
अरे इसमें तकल्लुफ की क्या बात, तुम्हारा साथ होगा ,ये भीगी बरसात भी होगी और तुम्हारे हाथ से बने चाय पकौड़े होंगे ,फिर तो जन्नत यहीं _नीरज ने शरारती अंदाज में कहा।
अच्छा बाबा ,चलो तुमको झेलना होगा,चाय ,पकौड़े भी खिलाने होंगे!! _प्रिया ने इस अंदाज में कहा कि नीरज हंस पड़ा।
प्रिया ,नीरज के साथ कार में बैठ गई।प्रिया और नीरज दोनों एक कॉल सेंटर में काम करते थे।नीरज अपनी कार से आता था,और प्रिया को ऑफिस की गाड़ी पिक अप,और ड्रॉप करने आती थी।
लेकिन बारिश के कारण ,ऑफिस की गाड़ी के इंजन में पानी भर गया था,इसके कारण गाड़ी स्टार्ट नहीं हो रही थी।मजबूरन प्रिया को प्राइवेट टैक्सी एजेंसियों को फोन करना पड़ा ,जो की उसका फोन ही नहीं पिक की।
नीरज एक हैंडसम ,स्मार्ट लड़का था,कॉल सेंटर की सभी लड़कियां उसके आगे पीछे मंडराती रहती,और उसके साथ वक्त गुजारने का मौका ढूंढती।
वहीं उनके बीच थी प्रिया,जिसे किसी में कोई दिलचस्पी नहीं थी।वह किसी ऑफिस स्टाफ से बात भी नहीं करती थी।
वह हमेशा से गुमशुम रहती थी , कस्टमर से अच्छे से बात करती , उसे सिर्फ अपने काम से मतलब था।
कोई उसके बारे में कुछ नही जानता था।
प्रिया बला की खूबसूरत थी,लंबे केश,बड़ी बड़ी आंखें , धवल रंगत,हल्की सी गुलाबी लिपस्टिक लगाती ,और जुड़े में एक गुलाब ,उसके ऑफिस आने से ऑफिस का माहौल खुशनुमा हो जाता ,जैसे अंधेरे में हजारों दीपक टिमटिमा जाते।
ऑफिस में लड़कियां उसे अकडू,घमंडी समझती थीं,और लड़के उससे बात करने का बहाना ढूंढते ,नीरज भी उन्हीं में से एक था।
आज नीरज को जैसे उसके मन की मुराद मिल गई थी।
उसने गाना लगा दिया
"कितना हसी है मौसम,कितना हसी सफर है
साथी है खूबसूरत ,ये मौसम को भी खबर है।"
बीच बीच में कनखियों से उसे देख लेता ।नीरज का दिल इतनी तेज धड़क रहा था ,जैसे अभी निकल आएगा।
नीरज को लग रहा था ,ये रास्ता कभी खत्म न हो ।
तभी अचानक एक अपार्टमेंट के सामने प्रिया ने गाड़ी रुकवा दी।
नीरज ने गाड़ी रोक दी।प्रिया ने कहा _आओ ,अब देर हो ही गई है ,चाय पी कर जाओ।
नीरज को इसी आमंत्रण का इंतजार था।
प्रिया आगे आगे चलने लगी।
गाड़ी से उतरने में वे भीग चुके थे ,उनके कपड़े गीले हो चुके थे।
फ्लैट नंबर _307
प्रिया ने चाभी लगाकर कमरा खोला ।कमरा सुव्यस्थित था।ऐसा लगता था कि इसमें कोई किसी चीज को हाथ ही नहीं लगाता हो ,सब चीजे यथा स्थान रखी थीं।
प्रिया ने कहा _मैं नहा कर आती हूं।तुम भी ये टॉवेल रखा है ,सर पोंछ लो।कपड़े निकाल कर सुखा लो।
प्रिया नहाने चली गई ।नीरज ने कपड़े चेंज कर टॉवेल लपेट लिया,और पंखे में अपने कपड़ों को सूखने के लिए डाल दिया।
उसने देखा कुछ किताबें रखी हैं ,टेबल पर ।
उसने किताब उठाई तो हैरत में पड़ गया,1915 की किताब ।उसने और भी किताबें देखी तो सबमें वही सन लिखा था।
तब तक प्रिया नहा कर आ गई ,मुस्कुराते हुए उसने पूछा _क्या देख रहे हो नीरज?
नीरज ने सर उठा कर देखा तो ,वह देखता ही रह गया , बला की खूबसूरत ,वह जो सवाल करने वाला था ,भूल गया।
प्रिया ने बाथरोब पहन रखा था , और टॉवेल से अपने गीले बालों को बांध रखा था।
धीरज धीरे धीरे उसके पास पहुंचा,उसकी आंखों को प्रिया पढ़ सकती थी।
उसने उसके बालों से टॉवेल खोल दिया एक झटके से उसके बाल खुल गए,एक मीठी सी सुगंध उसके दिलों दिमाग पर छा गया।
वह बेकाबू हुआ जा रहा था,फिर क्या हुआ ,उसे नहीं पता ।
9 बजे रात को जब ऑफिस की घंटी बजी,तो नीरज हड़बड़ा कर उठा ।
उसने अपने आप को प्रिया के बेड रूम में पाया।
अनूठी कलाकृतियों जो ,इस समय में एंटीक कहलाती हैं, से सुसज्जित था कमरा।
उसने देखा प्रिया भी उसके बगल में सो रही थी।
ऑफिस से फोन था ,उनकी ड्यूटी शुरू हो गई थी।
उसने प्रिया को उठाया ।दोनों शांत थे,प्रिया की आंखों में अजीब सा संतोष दिख रहा था,जबकि नीरज अपने आप को बड़ा कमजोर महसूस कर रहा था।
प्रिया तैयार होने लगी।नीरज उसके पास आया और कहने लगा _,कल आवेग और भावनाओं का ऐसा सैलाब उठा मैं खो गया प्रिया ,प्लीज प्रिया मुझे माफ कर दो।
प्रिया कुछ नहीं बोली।
दोनों साथ ऑफिस के लिए निकल गए।
बारिश थम चुकी थी,लेकिन सारा शहर दरिया बन चुका था।नीरज के अंदर एक युद्ध चल रहा था,उसने बहुत लड़कियों को फ्लर्ट किया था ,लेकिन मर्यादा की हद में रहकर।
सबसे बड़ी बात प्रिया के चेहरे को वो पढ़ नहीं पा रहा था, कि प्रिया खुश है या नाराज।
ऑफिस पहुंच कर दोनों ने अपना अपना काम निपटाया और वापस अपने अपने घर चले गए,दोनों के बीच कोई बातचीत नहीं हुई।ऑफिस में सबको आश्चर्य हो रहा था , कि हमेशा बोलने वाला नीरज शांत कैसे है?
दोस्तों ने पूछा तो नीरज टाल गया,_अरे यार तबियत ठीक नहीं है ,इसलिए शांत हूं।
, प्रिया 10 दिनों से ऑफिस नहीं आई थी,सब नीरज से पूछ रहें थे।स्टाफ ,और बॉस परेशान थे।
नीरज उसके घर गया,कमरे में ताला लगा था।फोन किया ,वो भी नॉट रीचेबल था।
अंत में सबने पुलिस में उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखवा दी।
पुलिस इन्वेस्टिगेशन शुरू हुई,सारे स्टाफ की गवाही हुई,उसके परिवार,के बारे में पूछा गया किसी को कुछ भी नहीं मालूम था।एड्रेस में वही फ्लैट नंबर लिखा था।
पुलिस उस अपार्टमेंट में पहुंची ।फ्लैट नंबर_ 306 वालों से पूछताछ की गई तो ,बहुत चौंकाने वाली बात मालूम हुई,जिसे सुनकर सबके पैरों तले की जमीन खिसक गई।
फ्लैट नंबर 306वालों ने बताया ,ये फ्लैट शुरू से खाली है।जब फ्लैट बन कर तैयार हुआ था,जिसने इसका पहले पसेशन लिया था ,उसने कुछ ही दिनों में ही घर छोड़ दिया था। उसे इसमें एक लड़की दिखती थी।
जब उसने इसकी शिकायत बिल्डर से की तो बिल्डर ने बताया कि ,जमीन लेने के बाद ,इसकी खुदाई में बहुत से कंकाल मिले थे।
बिल्डर ने कहा, कि और किसी फ्लैट में कोई दिक्कत नहीं तो आपको क्या दिक्कत है?
मिस्टर अय्यर को हल्ला न करने की बिल्डर ने हिदायत दी ,क्योंकि ऐसी खबर सुनने के बाद कोई फ्लैट नहीं खरीदता।
मिस्टर अय्यर ने एक चांस और लिया ,उन्होंने एक तांत्रिक को बुलाया ,उसने अपनी तंत्र साधना से उस लड़की को बुलाया ,जिसने बताया हमलोग यहां झोपड़ी बना कर रहते थे, अंग्रेजों को यहां रेस कोर्स मैदान बनाना था,जिससे उन्होंने रातों रात हमारी झोपड़ी गिरा दी,और घर के सभी सदस्यों को मार डाला,और मेरे साथ दुर्व्यवहार कर मुझे भी उन्होंने मार डाला।जब तक मुझे कोई सच्चा व्यक्ति नहीं मिल जाता ,मैं यहीं रहूंगी।
उसके बाद मिस्टर अय्यर को बिल्डर ने दूसरा फ्लैट आवंटित किया ,और तब से ये मकान खाली है।
पुलिस ने अपनी इन्वेस्टिगेशन बंद कर दी।
नीरज आज तक कुंवारा है,वह उस बारिश को नहीं भूल पा रहा ,जब वह और प्रिया एक हुए थे।

