मुक्ति एक रूह की भाग 1
मुक्ति एक रूह की भाग 1
डॉक्टर साहब, मैं कब दुनिया देख सकूंगा ? विप्रांश ने कहा।
बहुत जल्द, दिलासा देते हुए डॉक्टर शिव ने कहा।
दो दिन बाद
विप्रांश तुम्हारे लिए खुशखबरी है, तुम्हारा आंखों का ऑपरेशन कल होगा।
वाह, ईश्वर मेरी सुन ली विप्रांश बहुत खुश था।
रेखा तुमने सुना मैं देख सकूंगा विप्रांश खुशी से चीखा।
हां विप्रांश मैने सुना। रेखा (विप्रांश की पत्नी)ने कहा।
विप्रांश का ऑपरेशन डॉक्टर शिव और उनकी टीम ने अगले दिन कर दिया।
5 दिनों बाद जब आंख की पट्टी खुली।
उसका ऑपरेशन सफल रहा, उसे सब कुछ दिखाई दे रहा था।
हॉस्पिटल से डिस्चार्ज हो विप्रांश खुशी खुशी घर पहुंचा, आज फिर से उसकी दुनिया रौशन हो गई थी, एक हादसे में उसकी आंखों की रोशनी चली गई थी।
आंखों की रोशनी आने के बाद उसकी जिंदगी पटरी पर लौट आई।
लेकिन कुछ दिनों बाद उसे अलग ही अनुभव होने लगे ।उसे अपनी आंखों के सामने एक बड़ा सा घर दिखता, साथ में एक व्यक्ति, और एक 6,7 साल की छोटी बच्ची ।
उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था।
अब जब वो रात को सोता तो ये दृश्य करीब करीब दिखाई पड़ता।
आंख खुलते ये सब गायब हो जाता।
विप्रांश परेशान था, वह समझ नहीं पा रहा था ये सब क्या हो रहा है उसके साथ।
आखिर उसने रेखा को ये बात बताई।लेकिन रेखा ने इसे मजाक की तरह लिया।
विप्रांश ने आखिरकार हॉस्पिटल जाकर पता लगाने का निश्चय किया, कि आखिरकार उसकी आंखों का डोनर कौन था?
पता लगा एक 6,7 साल की बच्ची की कॉर्निया विप्रांश को लगाई गई थी, ज्यादा पूछने पर पता चला कि, उस बच्ची की हत्या हुई थी।
सब कुछ जानने के बाद विप्रांश को डॉक्टरों पर बहुत गुस्सा आ रहा था।
लेकिन कुछ दिन बाद सब सामान्य हो गया, अब उसे अनचाहे सपने दिखने बंद हो गए।
समय तेज़ी से पंख लगा कर उड़ रहा था।
विप्रांश सिविल इंजीनियर था,एक दिन उसके ऑफिस में शहर का मशहूर बिल्डर राणा आया।
राणा ने अपना परिचय दिया। विप्रांश से अपने नए प्रोजेक्ट पर ड्राइंग पास कराना था।
पता नहीं उसके आते ही विप्रांश की आंखों में जैसे खून उतर आया।वह उत्तेजित हो गया,उसने तेज आवाज में पूछा यहां क्यों आए हो?और कितनों को मारोगे?
विप्रांश की आवाज सुन ऑफिस के सभी स्टाफ और उसके अधीनस्थ दौड़े दौड़े आए।
राणा हतप्रभ था, उसे समझ में नहीं आ रहा था, वह विप्रांश से पहली बार मिल रहा था, आखिर विप्रांश उससे इस प्रकार का व्यवहार क्यों कर रहा है?
सभी ने विप्रांश को शांत कराया। उसका सर फटा जा रहा था।उसने आधे दिन की छुट्टी ली,और घर की ओर चल पड़ा।
कार वो चला तो रहा था, लेकिन उसका नियंत्रण जैसे कोई और ही कोई कर रहा था।
वह एक बहुत बड़े फार्म हाउस की तरफ बढ़ता जा रहा था, जहां जेसीबी मशीन चल रही थी जो खेती के साथ साथ मिट्टी की खुदाई कर रही थी।बाहर बोर्ड लगा था राणा बिल्डर।
पास में ही एक सुंदर घर था, जिसे वो बंद आंखों से अक्सर देखा करता था।
कार रुक गई थी, वो उतरा और अनायास ही यंत्रवत घर की तरफ बढ़ गया।घर में ताला लगा था,उसने कार की चाभी के गुच्छे में से ही एक चाभी उस ताले में लगाई, और ताला खुल गया।वह अंदर कमरे में दाखिल हो गया।
अचानक उसे वही छोटी लड़की अपने सामने दिखाई पड़ी, जो उसे अपने पीछे आने का इशारा करती आगे चल रही थी,वह उसे एक दीवार के पास जाकर गायब हो गई।
विप्रांश वहां कुछ देर खड़ा रहा।फिर उसने दीवार पर बजा कर देखा तो उसे अंदर खोखला होने का अहसास हुआ।
उसने इधर उधर देखा तो उसे एक फावड़ा दिखाई पड़ा, उसने दीवार तोड़ना शुरू किया।
थोड़ी देर में उसने जो देखा उसकी आंखें फटी की फटी रह गई, वो पसीने से लथ पथ हो गया था, डर से उसकी चीख निकल गई।
क्रमशः

