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Chandresh Kumar Chhatlani

Abstract

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Chandresh Kumar Chhatlani

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महत्वाकांक्षी सन्यासी

महत्वाकांक्षी सन्यासी

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खेल जीवन से सन्यास लेने के कुछ महीनों बाद आज ही शांत मन से घर में दाखिल हो पाया था, उसकी पत्नी ताड़ गयी, और पूछा, "आज बहुत खुश नज़र आ रहे हो ?"

"हाँ, आज रोहन मिला था..."

"अच्छा ! उसे तो लोग आपकी जगह पर मानते हैं।"

"हूँ.... पूछ रहा था कि मैनें इतने रुपये कैसे कमाये ?"

"तो आपने क्या राज़ बताया ?"

"बताया विज्ञापनों में काम करके ही रुपये कमाये जा सकते हैं, वरना खेलों से कहाँ मिलते हैं।"

"इससे तो वो अपने खेल से दूर हो जायेगा।"

"और मेरे रिकॉर्ड से भी..." अपने तमगे देखते हुए उसकी आँखें उनकी रोशनी से चुंधियां रहीं थी।


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