मेरी बहना
मेरी बहना
वो बचपन की नटखट सी
होली, दिवालिया तेरे संग
हर पल, एक जीवन जैसा
मेरी बहना मैं जिया तेरे संग
मेरी शैतानियों पर तेरा, मुझे
मां की डांट से बचाना
कभी कभी बापू के आने पर
मुझे इशारे से भगाना
मेरी हर खुशी का ख्याल रखना
मेरी थाली से तेरा खाने को चखना
बचपन तो नहीं रहा मगर
तुझमें आज भी वही गुड़िया है
तेरा चेहरा तब भी सुकून देता था
तू आज भी खुशियों की पुड़िया है
ये बांधी है जो तूने डोर रेशम की
तेरी खुशियों की मैंने भी कसम ली
हमेशा यूं ही, तेरा ख्याल रखूंगा
मेरी बहना तेरी खुशियों की खातिर ,
मैं हर शय को झुका दूंगा
तेरी राहों में जो भी आएगी
मैं उस मुश्किल को हटा दूंगा।
