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बेज़ुबानशायर 143

Abstract Fantasy Inspirational

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बेज़ुबानशायर 143

Abstract Fantasy Inspirational

मेरे घर भी एक दिन आ जाना

मेरे घर भी एक दिन आ जाना

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तेरे दर पे आया हूं, ओ मां, मेरी मां, मेरे घर भी एक दिन आ जाना नौ रात्रि के दिनों में---२

तेरे दर पे आया हूं----


तेरा पुत अभागा हूं मैं खाली हाथ चला गया

पान, सुपारी, ध्वजा, नारियल, कुछ भी नहीं ले आया---२

हाथ जोड़े आया हूं, ओ मां, मेरी मां, मेरे घर भी एक दिन आ जाना नौ रात्रि के दिनों में----२

तेरे दर पे आया हूं-----


हलवा पूरी बनाया नहीं मैं तुझे भोग नहीं कुछ चढ़ाया

मैं निर्धन कपूत हूं माता सूखे चने भी नहीं लाया----२

नंगें पैर चलके आया हूं, ओ मां, मेरी मां, मेरे घर भी एक दिन आ जाना नौ रात्रि के दिनों में----२

तेरे दर पे आया हूं------


मेरी माता बड़ी दयालु है वो कभी निराश नहीं करती

बिना कुछ मांगे भक्तों की खाली झोलियां मां भरती----२

मेरी मुरादें पूरी कर दो, ओ मां, मेरी मां, मेरे घर भी एक दिन आ जाना नौ रात्रि के दिनों में----२

तेरे दर पे आया हूं----


सतियों का तू सत है बचाती निपुती को पुत है देती

श्रद्धा से जो कुछ अर्पण कर दो खुशी से मां ले लेती----२

"दुर्लभ" का दुखड़ा मिटा दो, ओ मां, मेरी मां, मेरे घर भी एक दिन आ जाना नौ रात्रि के दिनों में----२

तेरे दर पे आया हूं, ओ मां, मेरी मां, मेरे घर भी एक दिन आ जाना नौ रात्रि के दिनों में-----२


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