Swati Rani

Abstract Inspirational Others


4.6  

Swati Rani

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मास्क

मास्क

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किसी गांव मे पीपल के पेड़ के नीचे लौकडाऊन में सब उचित दुरी बना के बात कर रहे थे।

करीब बीस लोगो का झुंड था।

"पता ना क्या आफत है ये कोरोना, सबको घर में बिठा के पंगु बना दिया है",एक बोला।

" अभी दवाई भी नहीं है इसका, कोई-कोई कहता है इसका टीका निकलने में साल-दो साल लगेगा", दुसरा बोला।

"जब दवाई ही नहीं है तो ,कोई ठीक नही है कब तक ऐसे बैठना पड़ेगा" तीसरा बोला।

"ये एक तरह का प्रलय है बेटा, रोज मरीजों का संख्या भी बढ रहा है, पर जितना कोरोना से नहीं मरेंगे भूखमरी से मरेंगे आने वाले दिनों मे" मुखिया बोले।

"अब जो प्रभु कि मरजी, उनहीं कि माया है सब" चौथा बोला।

दुर खडा एक इंजिनियर लडका जो कोरोना के वजह से घर आ गया ये सब सुन रहा था।

"उसपर से मोदी जी का भाषण देखा परसो टी. वी.पर बोल रहे थे, बाहर के सामान का बहिष्कार करना है" एक बोला।

"अरे चाचा जिंदा बच गये तो स्वदेशी भी अपना लेंगे" दुसरा बोला।

"अच्छा सब बोलते हैं चीनी सामान का बहिष्कार करो तो सरकार ही क्यो नही बंद कर देता मंगाना, ना बाजार मे आयेगी ना हम लेंगे", तीसरा बोला।

" बढिया बात बोले हो", चौथा बोला ।

अब शिक्षित युवक बीच में आता है"सुनो कोई भी सरकार बाहर के सामान का आयात नहीं रोक सकती, कुछ अंतर्राष्ट्रीय कानुन के तहत, पर अगर हम उन सामानों को कम उपयोग में लाये, अपना सामान खुद बना ले,भले शुरु में उसकी गुणवत्ता कम होगी, तो दुसरे देशो को वो सामान हमें बेचने मे फायदा नहीं होगा और हमारे देश में रोजगार भी बढेगा।

सबसे जाना माना उदाहरण लो सबको पता है अमेरिका ने जापान पर दो परमाणु बम गिराये थे, पता है उसके बाद जापान खुद उठा, स्वदेशी अपनाया, आज वो अमेरिका पर निर्भर नहीं है।

इस विषम परिस्थिति में अच्छे-अच्छे विकसित देशों का हालत खराब है, हम तो अभी विकास कि सिढिया चढ ही रहे थे।

सभी बातों से संतुष्ट नजर आ रहे थे उस युवक कि ।

अच्छा बेटा मोदी जी क्यों नही बताते स्वदेशी कैसे अपनाये ? 

"जहां सारी दुनिया चाईनीज मास्क का दिवाना है, 

आपने टी.वी. पर देखा मोदी जी ने गमछे का मास्क लगाया था, वही तो है स्वदेशी अपनाना चाचा", लड़का बोला।

एक ने कहा हा-हा उसके बाद से गमछा, मोदी मास्क के नाम से प्रचलित हो गया है, और गांव मे सब वही लगा के घुमते है।

अच्छा बेटा जेब मे पैसा नहीं है तो कैसे स्वदेशी अपनाये? एक ने कौतुहल से पुछा।

"अभी मोदी जी ने 16 लाख करोड़ के पैकेज का ऐलान किया तो है, और बिना उसके भी कर सकते हो आप खुद रोजगार पैदा करो, और आने वाली भूखमरी कि विपदा से खुद भी बच़ो और देश को भी बचाओ, अपने फालतू खर्चे नियंत्रित करो, सुई से ले कर कार तक अपने देश में बनाओ ।

" क्या तुम्हारे पास कोई तरकीब है इसकी जिससे हम स्वदेशी भी अपनाये और हमारे गांव में भुखमरी भी ना फैले ? 

"सुनो चाचा आप सब ये मत समझना कि मै मोदी जी का भक्त हुं, पर मुश्किल वक्त में जब कुछ समझ ना आये चुपचाप देश के नेता का सुनो,खुद में लडने से कोई फायदा नहीं होगा"।

"अब मेरा प्लान सुनो अभी जितने भी सामान उपलब्ध है,हमारे गांव में,जैसे कपड़े,धागे, उससे हम मास्क बनायेंगे, चाहे जितने बने, गांव कि लडकिया सिलाई मशीन से सिलेंगी, फिर हम उसको बेचेंगे, जितना मुनाफा होगा उसी पैसै से और सामान ले कर नये मास्क बनायेंगे", लडका बोला।

"पर आज के आधुनिक युग मे कौन लेगा हमारा देसी मास्क ? मुखिया पुछता है।

सब लेंगे चाचा लौकडाऊन खुलने वाला है, मास्क सबके लिये अनिवार्य होगा, देश में मास्क कि कमी होगी, और फिर दुसरे मास्क तो एक बार ही पहनते हैं, इसको गरम पानी से साफ करके दोबारा पहन सकते हैं।

सब बोले चलो -चलो तैयारी करते हैं, कल से काम पर लगना है, बहुत हो गयी बेरोजगारी, इस मुश्किल वक्त में देश के साथ रहना हैहै, धन्यवाद बेटा आंखे खोलने के लिये ।


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