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Swati Rani

Action


4.5  

Swati Rani

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वीर-वधू

वीर-वधू

2 mins 261 2 mins 261

सुबह से माहौल अजीब था! चारों तरफ मोहल्ले में सन्नाटा पसरा था! टीवी पर बस चीन और भारत में हुये मुठभेड़ के बारे में बात कर रहें थे! सुबह-सुबह मां जी जो भजन लगा कर सुनती थी वो भी आज नहीं सुन रहीं थी! रीना दीदी मां से कुछ बातें कर रहीं थी,पर मेरे पास जातें ही दोनों चुप हो जाती थी! मैनें सोचा शायद कोई बात होगी रीना दीदी के व्यक्तिगत जिंदगी की! अकसर वो दोनों ऐसे बातें किया करते थे! 

मैं नहाने चली गयी! पता ना क्या मन में आया कि मैने सोचा आज मैं ये लाल वाली साड़ी पहनुंगी!मैं आईने के सामने अपनी मांग भर कर और बिंदी लगाने ही वाली थी कि रीना दीदी अचानक आई ,कुछ बोलने ही वाली थी कि तभी मां जी आकर उनका हाथ पकड़ कर ले गयी! मुझे कुछ अटपटा लगा! 

"नाश्ता क्या बनेगा मां?? " मैने पुछा! 

"ब.. ब.. बेटा सुनील कल भारत और चीन के बीच हुये झड़प में शहीद हो चुका है", मां ने भरे आंखों से हकलाते हुये कहा! 

अचानक से लगा कि मेरे अंदर का कोई हिस्सा मर गया!चिल्लाना चाहती थी पर गला रुंध सा गया! मेरे आंसू बह-बह के मेरे सोलह श्रृंगार का आवरण करने लगे! पर फिर होश आया और मैनें खुद को संभाला की मैं टुट गयी तो इनकी बुजुर्ग मां और तलाकशुदा बहन रीना का क्या होगा? मेरी 2 महीनें कि दुधमुंहीं बच्ची का क्या होगा, जिसको सुनील ने देखा भी नहीं था??! 

जिम्मेदारियों के बोझ के तले दबी अचानक मैं घर में खुद को सबसे सयानी समझने लगी! 

मैं अचानक से अंजाने साहस से भर उठी ! 

अपने आंसू पोंछते हुये कहा, "मां मुझे यकीन है इन्होंने खुद मरने के पहले बहुतों को मारा होगा, ये बहुत बहादुर थे मां"! 

"माँ वो अब आते ही होंगे जल्दी उठो हमको उनकी बहुत अच्छी विदाई देनी है, वो मुझसे बोला करते थे जब भी मैं मरू रो कर नहीं तालियां बजा कर विदा करना, विधवा बनकर नहीं सोलह श्रृंगार करके विदा करना, ताकि इस गांव का हर एक बच्चा मेरी शहादत पर गर्व करे और देश कि रक्षा में हरदम तत्पर रहे"!

"सच बहु तुम आज से सुनील कि विधवा नहीं वीर वधू कहलाने कि हकदार हो", कहते हुये माँ ने मुझे गले लगा लिया!

हम दोनों फफक कर रो पड़े! 

मैं भावनाओं के सागर में डुबती उतरती मन में सोच रही थी, सुनील तो एकबार में वतन के लिए शहीद हो गये, पर मुझे अब उनकी याद और अपनी जिम्मेदारियों से रोज जंग लड़ना था! 


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