Swati Rani

Tragedy Crime


4.3  

Swati Rani

Tragedy Crime


अवसाद

अवसाद

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काफी भीड़ लगी थी अपार्टमेंट में, मैंने जैसे घुसने की कोशिश की सामने मेरे पिता जी छाती पकड़े रो रहे थे, पास में रिया दीदी भी जोर-जोर से छाती पीट रही थी! माजरा कुछ समझ आता तबतक कुछ लोगों कि फुसफुसाहट सुनी! 

एक ने कहा, "जरूर लड़की का चक्कर होगा! "

दूसरा बोला, "काफी अच्छी फिल्में दी थी पता ना क्यों ऐसा कदम उठाया, अपने बुजुर्ग पिता का भी नहीं सोचा!"

तीसरे ने कहा, "जो काम इसे करना चाहिए था अब इसका पिता करेगा इसके लिये"! 

"सही भाई जवान बेटे को मुखाग्नि देना भगवान दुश्मनों को भी ऐसे दिन ना दिखाये", चौथा बोला! 

थोड़ी दूर और आगे बढा़ तो ये क्या मैं सोया पडा़ था सफेद कफन में लिपटे! मैं भौच्कका रह गया! 

गले पर लाल पट्टे के से निशान थे!आंखे बंद लग रहा था जैसे सोया हुं! 

आगे बढ़कर पापा के आंसू पोछनें चाहे पर उनको छु भी ना पाया! काफी चीखा-चिल्लाया पर किसी ने एक ना सुनी! 

तभी थोड़ी देर में पुलिस आयी, मेरा कमरा सील कर दिया! मेरे निष्प्राण शरीर को ले जाने लगे पोस्टमार्टम के लिये! मैं भी पीछे पीछे चल दिया! 

तभी मै ओटी में गया अपने शरीर कि दुर्गति देखी ना गयी!पुरा क्षत-विक्षत पड़ा था मैं!किडनी, फेफड़े, आंते सब अलग-अलग कर देख रहे थे की कुछ सुराग मिल जाये! तभी एक पुलिस वाला बोला ये तो मर गया हमारी आफत कर गया! कमसे कम एक चिट्ठी ही लिख देता कि आखिर क्या दुख था जो ऐसा कदम उठाया! मिडिया तो हमारे पीछे नहा धो कर पड़ गयी है जैसे हमें बता कर मरा हो! 

मैं भागा-भागा घर आया दुनिया और पापा को बताना चाहता था मैं कायर नहीं था जो मरूं, मुझे मारा गया है!


मैं बालीवुड में परिवारवाद का शिकार हुआ था, उसके खिलाफ आवाज उठाना चाहता था पर सात बडे़ बैनरों ने मुझे बैन कर दिया मेरे प्रतिभा को कुचल दिया था! मैं अपना दुख किससे कहता एक माँ ही तो मेरे सबसे करीब थी, वो भी छोड़ कर चली गयी थी और मेरी दोस्त उसको तो मैने ही सफलता के चमक धमक में पड़कर ठुकरा दिया था! काफी अकेला हो गया था मैं! जिसको फोन करो काट देता था, तब पता चला सुख के साथी सब है पर दुख अकेले ही काटना पड़ता है! 

मैं कायर नहीं था थक गया था इस दुनिया से लड़ते लड़ते खुद को साबित करते-करते! यहाँ प्रतिभा की कदर नहीं है! मैं अवसाद में था पापा, काश जब मैं ने बुलाया था आप आ गये होते तो मैं जिंदा होता! 

तभी सामने से बहुत ही काले भयानक बडे़ बडे़ दातों वाले व्यक्ति मेरे तरफ आ रहे थे !मैं डरकर अपने पापा के पीछे छिप गया पर उन्होंने मुझे ढुढ़ लिया और कहा,"ये क्या कर लिया तुने अब जन्मो जन्म प्रेत योनि में घुमकर दुख भोगेगा! पृथ्वी का दुख आसान है प्रेत योनि का नहीं!" 

हा हा हा.... 

मैं चीख रहा था चिल्ला रहा था, मैं उनके साथ नहीं जाना चाहता था, पर मेरी आवाज कोई नहीं सुन रहा था, वो दोनों यमदूत मुझे अपने पाश में बांधे खिंच रहे थे, मुझे धरती के मायाजाल से मुक्त कर रहे थे!


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